पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बाढ़ के हालात को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान को महागठबंधन में शामिल होने का खुला ऑफर दिया है। राजद नेता ने कहा है कि यदि चिराग पासवान को बिहार की एनडीए सरकार का कामकाज और कानून-व्यवस्था पसंद नहीं है, तो वे मंत्री पद छोड़कर महागठबंधन के साथ आएं और मिलकर सरकार बनाएं।
हाल ही में चिराग पासवान के एक वीडियो और बयानों के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं, जिनमें कथित तौर पर उन्होंने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और हालिया घटनाओं पर असंतोष जताया था। इसी सिलसिले में प्रतिक्रिया देते हुए राजद विधायक ने कहा कि बिहार में आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं और सरकार केवल कागजी दावे कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि एनडीए के भीतर असंतोष है, तो चिराग पासवान को बड़ा कदम उठाते हुए विपक्षी खेमे में शामिल होना चाहिए।

बाढ़ प्रबंधन और प्रशासनिक विफलताओं पर भी घेरा
केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि बाढ़ के मुद्दों पर भी राजद ने सरकार को आड़े हाथों लिया। भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि सूबे में बाढ़ पीड़ितों को जमीनी स्तर पर राहत और सहायता नहीं मिल रही है। सरकार के तमाम दावों के बावजूद बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोग भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से अपेक्षित मदद समय पर नहीं पहुंचाई जा रही है।
इंडिया गठबंधन की आगामी बैठकों और रणनीतियों पर बात करते हुए राजद विधायक ने एसआईआर (Special Intensive Revision) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि यदि यह प्रक्रिया नहीं होती, तो आज बिहार की राजनीतिक तस्वीर कुछ और होती और प्रदेश में उनके गठबंधन की सरकार सत्ता में होती। हालांकि, कांग्रेस वर्किंग कमेटी और नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस पर केंद्रीय स्तर के नेता ही उचित जानकारी दे सकते हैं।

राजनीतिक हलचल और आगे की सुगबुगाहट
बिहार की राजनीति में लगातार बदलते समीकरणों के बीच एनडीए गठबंधन के भीतर असहजता की चर्चाओं को हवा मिल रही है। चिराग पासवान के बयानों और राजद के इस खुले आमंत्रण ने राज्य के सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि केंद्रीय मंत्री और एलजेपीआर प्रमुख इस राजनीतिक प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और एनडीए में इसका क्या असर पड़ता है।





