जमालपुर। भारतीय रेल के हाई स्पीड युग के सपनों को साकार करने और वंदे भारत जैसी तेज रफ्तार ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करने के लिए बिहार के जमालपुर स्थित भारतीय रेल यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण संस्थान (इरिमी) को एक बड़े तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। रेल मंत्रालय की ओर से इरिमी को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से लगभग 350 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस पहल के माध्यम से संस्थान को हाई स्पीड रेल संचालन, तकनीकी प्रशिक्षण और सुरक्षा का राष्ट्रीय केंद्र बनाया जा रहा है।
138 वर्षों की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत समेटे यह संस्थान अब आधुनिक तकनीकों के साथ भारतीय रेल के मानव संसाधन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रहा है। मंजूर की गई 350 करोड़ रुपये की राशि से संस्थान की प्रशिक्षण सुविधाओं, तकनीकी प्रयोगशालाओं और अनुसंधान क्षमता का व्यापक सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।

सिम्युलेटर आधारित आधुनिक प्रशिक्षण और सुरक्षा मानक
ट्रेनों की बढ़ती गति और नेटवर्क के विस्तार को देखते हुए इरिमी में लोको पायलटों और वरिष्ठ इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने के लिए अत्याधुनिक सिम्युलेटर का उपयोग किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण मॉडल वास्तविक रेल परिचालन जैसी परिस्थितियों पर आधारित है, जिससे प्रशिक्षुओं को निम्नलिखित क्षेत्रों में तैयार किया जा सके:
- मानवीय त्रुटियों में कमी: आपातकालीन और विषम परिस्थितियों में लोको पायलटों के त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाना ताकि ट्रेन संचालन में मानवीय भूल की गुंजाइश खत्म की जा सके।
- आपात स्थिति से निपटने की दक्षता: सिम्युलेटर के माध्यम से वास्तविक परिचालन जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां बनाकर चालकों को संकट प्रबंधन का अभ्यास कराना।
- सुरक्षा मानकों का सुदृढ़ीकरण: हाई स्पीड नेटवर्क पर गाड़ियों के बेहद सुरक्षित आवागमन के लिए सख्त सुरक्षा मापदंड तैयार करना और उनका पालन सुनिश्चित करना।
रेलवे के अनुसार, जैसे-जैसे देश भर में हाई स्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ी है।

लोको पायलटों की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
भारतीय रेल के परिचालन में सुरक्षा को बनाए रखना एक प्रमुख प्राथमिकता और चुनौती दोनों है। वर्तमान में भारतीय रेल में लगभग 1.15 लाख से 1.20 लाख लोको पायलट कार्यरत हैं। इसके साथ ही, लगभग 27 हजार पद रिक्त बताए जा रहे हैं। पटरियों पर ट्रेनों की लगातार बढ़ती संख्या और उनकी तेज गति के बीच सुरक्षित आवागमन बनाए रखने के लिए लोको पायलटों का मानसिक और तकनीकी रूप से दक्ष होना अनिवार्य है।
इरिमी में इसी जरूरत को पूरा करने के लिए लोको पायलटों और तकनीकी अधिकारियों को न केवल सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक तकनीकी ज्ञान दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें कठिन और आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत सही निर्णय लेने के लिए तैयार किया जा रहा है।
138 साल का इतिहास और आधुनिक पाठ्यक्रमों का समावेश
जमालपुर स्थित इरिमी की स्थापना वर्ष 1888 में हुई थी। अपने 138 साल के इतिहास में यह संस्थान अब तक करीब 50 हजार रेल इंजीनियरों को प्रशिक्षित कर चुका है। लंबे समय से रेलवे के तकनीकी प्रशिक्षण का मुख्य स्तंभ रहे इस संस्थान में अब पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इरिमी में वर्तमान में निम्नलिखित विषयों और उन्नत तकनीकों से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं:
- वेल्डिंग एवं आधुनिक रखरखाव तकनीक: रेल पटरियों और डिब्बों के आधुनिक रख-रखाव की उन्नत प्रणालियां।
- हाइड्रॉलिक्स और न्यूमैटिक्स: ट्रेनों के ब्रेक और पावर सिस्टम से संबंधित आधुनिक तकनीकी जानकारी।
- मेकाट्रॉनिक्स एवं डिजिटल सिस्टम: आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और मैकेनिकल प्रणालियों का एकीकरण।
- अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यशालाओं (वर्कशॉप) और सेमिनारों का आयोजन करके संस्थान को वैश्विक तकनीकी ज्ञान नेटवर्क से जोड़ना।
नेतृत्व और निरीक्षण
रेलवे बोर्ड के अपर सदस्य (यातायात) देवेंद्र कुमार ने हाल ही में जमालपुर स्थित इरिमी का दौरा किया था। अपने निरीक्षण के दौरान उन्होंने संस्थान को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित करने की दिशा में जारी विकास कार्यों और तैयारियों की सराहना की।
संस्थान में महानिदेशक अनिमेष कुमार सिन्हा के नेतृत्व में आधुनिक तकनीकों और सिम्युलेटर-आधारित ट्रेनिंग मॉडल को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। आने वाले समय में जैसे-जैसे हाई स्पीड रेल नेटवर्क का दायरा बढ़ेगा, जमालपुर का यह ऐतिहासिक संस्थान भारतीय रेल के तकनीकी प्रशिक्षण, सुरक्षा प्रबंधन और मानव संसाधन विकास के सबसे प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा।





