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बिहार की बेटी भावना कंठ ने रचा इतिहास, फाइटर कॉम्बैट लीडर बनने वाली देश की पहली महिला पायलट

| Published: | Updated:
बिहार की बेटी भावना कंठ ने रचा इतिहास, फाइटर कॉम्बैट लीडर बनने वाली देश की पहली महिला पायलट
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मुख्य बातें

  • बिहार की बेटी और स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने देश के सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
  • उन्होंने प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर (एफसीएल) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसके साथ ही वह यह युद्धक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं।
  • इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद अब वह युद्ध के दौरान हवाई अभियानों का नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम हो गई हैं।
  • मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित भारतीय वायुसेना के 'टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट' (टीएसीडीई) में अगस्त 2026 के दौरान इस कोर्स को पूरा किया गया है।

खबर डोज़ ब्यूरो। बिहार की बेटी और स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने देश के सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। उन्होंने प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर (एफसीएल) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसके साथ ही वह यह युद्धक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद अब वह युद्ध के दौरान हवाई अभियानों का नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम हो गई हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित भारतीय वायुसेना के 'टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट' (टीएसीडीई) में अगस्त 2026 के दौरान इस कोर्स को पूरा किया गया है। एफसीएल कोर्स केवल उन चुनिंदा फाइटर पायलटों के लिए डिजाइन किया जाता है जो अपने युद्ध कौशल में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। ऐसे पायलटों को रक्षा क्षेत्र में 'टॉप गन' का दर्जा भी दिया जाता है। इस प्रशिक्षण के पूरा होने से भारतीय वायुसेना में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और मील का पत्थर स्थापित हुआ है। वर्तमान में स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ पंजाब में अपनी सेवाएं दे रही हैं और उनकी इस सफलता से पूरे देश के साथ-साथ उनके पैतृक राज्य बिहार में भी जश्न का माहौल है।

बिहार की बेटी भावना कंठ ने रचा इतिहास, फाइटर कॉम्बैट लीडर बनने वाली देश की पहली महिला पायलट

मिथिला से लेकर आसमान की बुलंदियों तक का सफर

मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड स्थित बाउर गांव की रहने वाली भावना कंठ का जन्म 1 दिसंबर 1992 को बेगूसराय के बरौनी में हुआ था। उनके पिता तेज नारायण कंठ एक इंजीनियर हैं और उनकी माता राधा कंठ गृहणी हैं। उनके परिवार में शिक्षा और अनुशासन का माहौल रहा है, जिसमें उनके छोटे भाई नीलांबर कंठ और छोटी बहन तनुजा कंठ भी शामिल हैं, जो पेशे से इंजीनियर हैं। भावना की शुरुआती शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, बरौनी से संपन्न हुई थी, जिसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। बचपन से ही उनका सपना आसमान में चिड़ियों की तरह उड़ने का था। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में जाने की उनकी इच्छा उस समय पूरी नहीं हो पाई थी, लेकिन उन्होंने सैन्य सेवा में जाने के अपने सपने को टूटने नहीं दिया और इंजीनियरिंग के बाद वायुसेना का रुख किया। वर्ष 2015 में भारतीय वायुसेना द्वारा महिलाओं को फाइटर स्ट्रीम में शामिल किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय ने उनके सपनों को नई उड़ान दी।

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कठिन प्रशिक्षण और भविष्य की भूमिका

कठिन और कड़े सैन्य प्रशिक्षण के दौर से गुजरने के बाद वर्ष 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने उन्हें कमिशन प्रदान किया था। इसके बाद वह आधिकारिक तौर पर भारतीय वायुसेना के फाइटर स्क्वाड्रन का हिस्सा बनीं। उनके पिता बताते हैं कि बचपन से ही उनकी बेटी की जिद आसमान में ऊंचे गोता लगाने की थी और उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर इस मुकाम को हासिल करके दिखाया है। अब टीएसीडीई से फाइटर कॉम्बैट लीडर का कोर्स पूरा करने के बाद भावना कंठ को भारतीय वायुसेना के सबसे जटिल और रणनीतिक हवाई अभियानों में नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिलेगा। वायुसेना के इस प्रतिष्ठित युद्धक प्रशिक्षण कार्यक्रम से गुजरने के बाद उनका यह सफर देश की युवा पीढ़ी और खासकर युवतियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन गया है। भारतीय वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार के उन्नत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम देश की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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