नई दिल्ली (खबर डोज़ ब्यूरो)। देश के सरकारी बैंकों में पांच दिवसीय कार्यसप्ताह लागू होने और हर शनिवार-रविवार को छुट्टी रहने का दावा सोशल मीडिया पर वायरल है। हालांकि, सरकार ने अभी ऐसा कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है। बैंक यूनियनों और भारतीय बैंक संघ (IBA) के बीच इस मुद्दे पर विचार के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने पर सहमति बनी है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे संदेशों में दावा किया जा रहा है कि वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 30 सितंबर 2026 को एक राजपत्र अधिसूचना जारी की है। इस कथित अधिसूचना में परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act), 1881 की धारा 25 के तहत सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए हर शनिवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित करने की बात कही गई है। लेकिन आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह दावा पूरी तरह भ्रामक है और सरकार ने अभी ऐसा कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया है।
दरअसल, बैंक कर्मचारी संगठनों की लंबे समय से मांग है कि बैंकिंग व्यवस्था को पूरी तरह पांच दिवसीय कार्यसप्ताह में बदला जाए। इसी मांग को लेकर सितंबर 2026 के अंत में एक देशव्यापी हड़ताल प्रस्तावित थी, जिसे द्विपक्षीय बातचीत के बाद टाल दिया गया। इस बातचीत के दौरान आईबीए और बैंक यूनियनों के बीच एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर सहमति बनी। यह समिति सभी शनिवारों को अवकाश देने के प्रस्ताव और उसके व्यावहारिक पहलुओं पर विचार करेगी।

काम के घंटे और परिचालन व्यवस्था में बदलाव की चुनौती
अब इस नवगठित समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि सभी शनिवारों को छुट्टी घोषित की जाती है, तो बैंकिंग कामकाज के घंटों को कैसे समायोजित किया जाए। रोजाना के काम के समय को बढ़ाने और अन्य परिचालन पहलुओं को व्यवस्थित करने पर विचार चल रहा है ताकि ग्राहकों को मिलने वाली सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

वर्तमान व्यवस्था के तहत बैंकों में केवल रविवार और महीने के दूसरे व चौथे शनिवार को ही अवकाश रहता है। केंद्र सरकार ने साल 2015 में दूसरे और चौथे शनिवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। तब से बैंक कर्मचारी सभी शनिवारों को छुट्टी देने की मांग कर रहे हैं।
हड़ताल टलने के बाद की स्थिति
सितंबर के अंत में प्रस्तावित हड़ताल के दौरान ग्राहकों को होने वाली संभावित असुविधा से बचाने के लिए सरकार ने विशेष कदम उठाए थे। इसके तहत 27 सितंबर 2026 (रविवार) को भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) को खुला रखने का निर्देश दिया गया था। फिलहाल, बैंक कर्मचारी और संगठन समिति की रिपोर्ट और सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।





