जमुई (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। जमुई जिले में नए परिसीमन के तहत ग्राम पंचायतों की संख्या 152 से बढ़कर लगभग 230 होने जा रही है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर प्रति 7,000 की ग्रामीण आबादी पर नई पंचायत के गठन के मानक से प्रशासनिक ढांचे और त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।
पंचायती राज विभाग द्वारा शुरू की गई पुनर्गठन की इस कवायद से गांवों की प्रशासनिक इकाइयां छोटी होंगी। इससे विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और आम लोगों तक सरकारी सुविधाओं की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से सिकंदरा और इस्लामनगर अलीगंज प्रखंडों में 57 वर्षों से चला आ रहा पंचायतों की संख्या का ढांचा अब पूरी तरह बदलने जा रहा है।

2011 की जनगणना बनेगी परिसीमन का आधार, जानें क्या हैं नए मानक
विभाग द्वारा तय किए गए नए नियमों के अनुसार, वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को परिसीमन का मुख्य पैमाना बनाया गया है। अब प्रति 7,000 की ग्रामीण आबादी पर एक स्वतंत्र ग्राम पंचायत का गठन किया जाएगा। वर्तमान में जमुई जिले में कुल 152 ग्राम पंचायतें अस्तित्व में हैं। हाल ही में सिकंदरा को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने के कारण ग्रामीण पंचायतों की संख्या में एक की कमी आई थी।
नया फार्मूले लागू होते ही सिकंदरा और अलीगंज प्रखंडों में संयुक्त रूप से पंचायतों की संख्या 38 से 40 तक पहुंच सकती है। छोटी प्रशासनिक इकाइयां बनने से मुखिया, सरपंच और पंचायत समिति सदस्यों के नए पद सृजित होंगे, जिससे स्थानीय राजनीति में नए चेहरों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा।

57 साल बाद टूटेगा चुनावी समीकरण: 1969 से अब तक का ऐतिहासिक सफर
सिकंदरा और अलीगंज क्षेत्र में पंचायतों की संख्या का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1969 में जब एकीकृत सिकंदरा प्रखंड था, तब यहां कुल 27 ग्राम पंचायतें थीं। इसके बाद 1972 में हलसी प्रखंड से पिरहिंडा पंचायत के शामिल होने पर यह संख्या बढ़कर 28 हो गई, जो 1978 के पंचायत चुनाव तक यथावत बनी रही।
वर्ष 1994 के परिसीमन के दौरान एकीकृत सिकंदरा प्रखंड को विभाजित कर इस्लामनगर अलीगंज नाम से नया प्रखंड बनाया गया। उस दौरान सिकंदरा में 14 और अलीगंज में 13 पंचायतें गठित की गईं। इसके बाद से लगभग पांच दशकों से इस क्षेत्र में ग्राम पंचायतों की संख्या स्थिर बनी हुई थी।

जमुई जिले के अन्य प्रखंडों में भी इस परिसीमन का सीधा प्रभाव देखने को मिलेगा:
- चकाई प्रखंड: वर्ष 1994 के परिसीमन में यहां पंचायतों की संख्या 21 से बढ़कर 23 हुई थी, जिसमें अब नए मानकों के तहत और बढ़ोतरी होगी।
- खैरा और लक्ष्मीपुर क्षेत्र: पूर्व में खैरा में तीन पंचायतें बढ़ी थीं, जबकि तत्कालीन लक्ष्मीपुर प्रखंड से गिद्धौर और बरहट के अलग होने के बाद दायरा 24 से बढ़कर 30 तक पहुंचा था।
- स्थानीय प्रतिनिधित्व में वृद्धि: पंचायतों की संख्या 152 से 230 होने पर पूरे जमुई जिले में त्रिस्तरीय जनप्रतिनिधियों की संख्या में भारी इजाफा दर्ज किया जाएगा।
नए परिसीमन से केवल भौगोलिक सीमाओं में सुधार नहीं होगा, बल्कि मतदाता सूची के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जाएगी। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रशासनिक प्रस्तावों की जांच की जा रही है ताकि आगामी चुनाव से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं समय पर पूरी की जा सकें।





