पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार सरकार अपनी वित्तीय जरूरतों और विकास योजनाओं को गति देने के लिए एक बार फिर बाजार से बड़ा कर्ज लेने जा रही है। राज्य सरकार मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी के जरिए 3,000 करोड़ रुपये जुटाएगी। इस उधारी प्रक्रिया का सीधा असर राज्य के वित्तीय प्रबंधन और आगामी बजटीय खर्चों पर पड़ेगा, जिसे आरबीआई के विशेष इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के जरिए अंजाम दिया जा रहा है।
यह पूरी प्रक्रिया आरबीआई के ई-कुबेर (E-Kuber) इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित की जा रही है। सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी के नतीजे मंगलवार शाम तक घोषित किए जाने की योजना है। इस प्रक्रिया में सफल रहने वाले बोलीदाताओं को अगले दिन यानी बुधवार को तय राशि का भुगतान करना होगा। सुरक्षित माने जाने वाले इन निवेश साधनों के जरिए राज्य सरकारें अपने विभिन्न विकास कार्यों और प्रशासनिक खर्चों के लिए संसाधन जुटाती हैं।

दो अलग-अलग अवधियों में बंटी हैं सरकारी प्रतिभूतियां
नीलामी के तहत बिहार सरकार दो अलग-अलग अवधि की सरकारी प्रतिभूतियां बाजार में जारी कर रही है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इनमें से 1,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों की परिपक्वता वर्ष 2044 में होगी, जबकि 2,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां वर्ष 2051 में परिपक्व होकर पूरी होंगी। इन प्रतिभूतियों पर निवेशकों को हर साल 14 अप्रैल और 14 अक्टूबर को छमाही आधार पर ब्याज दिए जाने का प्रावधान तय किया गया है। हालांकि, इस नीलामी की वास्तविक ब्याज दर और अंतिम शर्तें आधिकारिक परिणामों के जारी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होंगी।
आरबीआई की इस व्यापक नीलामी प्रक्रिया के तहत कुल 31,200 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री की जा रही है। इस बड़ी प्रक्रिया में बिहार के अलावा देश के कई अन्य राज्य भी शामिल हैं। आरबीआई के नियमों के मुताबिक राज्य अपनी वित्तीय आवश्यकता के अनुसार प्रतिभूतियां जारी करते हैं और वित्तीय संस्थान या निवेशक इनकी खरीद के लिए अपनी बोलियां लगाते हैं।

दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंधन और अदायगी की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी प्रतिभूतियों के जरिए कर्ज जुटाना राज्यों के लिए वित्तीय संसाधन हासिल करने का एक बेहद सामान्य और नियमित माध्यम है। इससे सरकार को फौरी तौर पर विभिन्न योजनाओं के लिए धन तो उपलब्ध हो जाता है, लेकिन इसके साथ भविष्य में मूलधन और तय ब्याज चुकाने की भारी जिम्मेदारी भी जुड़ी रहती है। वर्ष 2044 और 2051 तक परिपक्व होने वाली इन प्रतिभूतियों से यह साफ है कि इस उदायरी का वित्तीय दायित्व आने वाले कई दशकों तक राज्य पर बना रहेगा।
राज्य सरकार द्वारा जुटाए जाने वाले इस धन का इस्तेमाल किन-किन विशिष्ट मदों में किया जाएगा, यह पूरी तरह से संबंधित बजटीय प्रावधानों और प्रशासनिक निर्णयों पर निर्भर करेगा। दीर्घकालिक वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह जरूरी होता है कि राज्य अपने राजस्व संग्रह, खर्च और कर्ज चुकाने की क्षमता के बीच संतुलन कायम रखे ताकि आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े। नीलामी के नतीजे आने के बाद इस बात की अधिक स्पष्टता होगी कि निवेशकों की तरफ से इस सरकारी कर्ज के लिए कितना उत्साह दिखाया गया है।





