बिहार में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और धांधली मुक्त बनाने के साथ-साथ युवाओं तथा छात्र-छात्राओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बड़े कदमों का ऐलान किया गया है। राज्य सरकार ने परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल असामाजिक तत्वों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि परीक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए गुंडा एक्ट लगाया जाएगा और उन्हें प्राथमिक तौर पर 1 साल तक जेल की सलाखों के पीछे रखा जाएगा। इसके अलावा, बिहार में परीक्षाओं के पारदर्शी संचालन के लिए दुनिया की सबसे आधुनिक और बेहतरीन टेक्नोलॉजी को लागू करने की योजना तैयार की गई है।

परीक्षा व्यवस्था में सुधार और आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
राज्य में परीक्षाओं के आयोजन को लेकर मौजूद चुनौतियों पर खुलकर बात की गई है। यह स्वीकार किया गया है कि बिहार में मैट्रिक परीक्षा से लेकर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) तक की परीक्षाओं का कदाचारमुक्त और निष्पक्ष आयोजन कराना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। इसी चुनौती से निपटने के लिए अब पूरी परीक्षा प्रणाली और व्यवस्था को 'लीकेज प्रूफ' बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इसके लिए वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही सर्वोत्तम तकनीकों को बिहार की परीक्षा प्रणाली में शामिल किया जाएगा। इस नई और आधुनिक टेक्नोलॉजी के माध्यम से राज्य की परीक्षाओं का संचालन कराया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या पेपर लीक की गुंजाइश न रहे। सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के अभ्यर्थियों को एक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल प्रदान करना है।

छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए बनेगा विशेष ऑनलाइन पोर्टल
परीक्षार्थियों और युवाओं के कल्याण के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की गई है। राज्य में आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए जिस प्रकार 'सहयोग पोर्टल' काम कर रहा है, ठीक उसी तर्ज पर अब छात्र-छात्राओं के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थी अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे।
इस नए ऑनलाइन पोर्टल के तहत निम्नलिखित व्यवस्थाएं की जाएंगी:
- सीधा संवाद और सुझाव: विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक समस्याओं, प्रशासनिक रुकावटों और अपने सुझावों को इस पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे।
- तय समयसीमा में समाधान: पोर्टल पर दर्ज होने वाली शिकायतों को केवल दर्ज करके नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उनके त्वरित समाधान के लिए निश्चित समयसीमा तय की जाएगी।
- 30 दिनों का नियम: यदि किसी छात्र की शिकायत या समस्या पोर्टल पर दर्ज होने के 30 दिनों के भीतर हल नहीं होती है, तो मुख्यमंत्री स्तर पर अलग से 'सहयोग शिविर' आयोजित कर उसका समाधान किया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जमीनी स्तर पर जाने के निर्देश
युवाओं और विद्यार्थियों की समस्याओं को करीब से समझने के लिए प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बड़ी पहल की जा रही है। जल्द ही राज्य के सभी मंत्रियों और संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि वे स्वयं स्कूलों और कॉलेजों में जाएं तथा छात्र-छात्राओं से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करें।
केवल मंत्री और अधिकारी ही नहीं, बल्कि राज्य के सभी विधायकों और सांसदों को भी यह जिम्मेदारी दी जाएगी कि वे अपने क्षेत्रों में युवाओं के बीच जाएं, उनकी समस्याएं सुनें और उनके सुझाव प्राप्त कर सरकार के समक्ष रखें।
पेपर लीक पर कड़ा रुख और गुंडा एक्ट के तहत सीधी कार्रवाई
परीक्षा में धांधली और पेपर लीक करने वाले भू-माफिया या नकल माफिया पर नकेल कसने के लिए सख्त वैधानिक प्रावधानों को लागू किया जा रहा है। परीक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले असामाजिक तत्वों को सख्त संदेश देते हुए स्पष्ट किया गया है कि राज्य में व्यवस्था को पूरी तरह लीकेज प्रूफ बनाया जा रहा है और दोषियों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत मामला दर्ज कर 1 साल की जेल की सजा सुनिश्चित की जाएगी।






