नीट परीक्षा लीक मामले में आयोजित 'बिहार बंद' के दौरान भड़की जबरदस्त हिंसा के सिलसिले में पूर्व मंत्री और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान इलाके में छात्रों के उग्र प्रदर्शन को उकसाने और सुरक्षा बलों पर पथराव की साजिश रचने के संगीन आरोपों के तहत यह पूरी कानूनी कार्रवाई अंजाम दी गई है। इस मामले में पुलिस ने तेज प्रताप यादव पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और विशेष अधिनियमों की कई गंभीर धाराएं दर्ज की हैं।
गांधी मैदान में हिंसक प्रदर्शन और पुलिस पर पथराव के आरोप
नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं के विरोध में छात्र संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा पूरे सूबे में बंद का आह्वान किया गया था। इस आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षार्थियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में राजधानी पटना की सड़कों पर उग्र प्रदर्शनकारी उतर आए थे। गांधी मैदान के पास एकत्र हुई बेकाबू भीड़ ने नारेबाजी करते हुए मुख्य रास्तों को पूरी तरह जाम कर दिया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इलाके में उपचुनाव की वजह से चुनावी नियम और प्रशासनिक निषेधाज्ञा लागू थी, जिसके कारण किसी भी तरह के सभा या जुलूस की आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी। जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई और उपद्रवियों ने कानून-व्यवस्था को धता बताते हुए पुलिसबल पर अचानक ईंट-पत्रों से हमला बोल दिया। इस भीषण पथराव में कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।

हत्या के प्रयास (बीएनएस धारा 109) में 10 साल से उम्रकैद तक की सजा
तेज प्रताप यादव पर लगाई गई सबसे सख्त और गंभीर कानूनी धारा बीएनएस (BNS) की धारा 109 है, जो सीधे तौर पर हत्या के प्रयास से संबंधित है। यह कानूनी प्रावधान तब लागू किया जाता है, जब कोई व्यक्ति इरादतन ऐसा काम करे जिससे किसी की जान को सीधा खतरा पैदा हो।
यदि अदालत में यह आरोप सिद्ध हो जाता है, तो इसके तहत कम से कम 10 साल तक की सख्त कैद और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है। वहीं, अगर किसी पीड़ित को गंभीर चोट पहुंचाना साबित हो गया, तो यह सजा उम्रकैद में भी तब्दील हो सकती है।
ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला और शारीरिक नुकसान की धाराएं
प्रदर्शन के दौरान ऑन-ड्यूटी तैनात अधिकारियों पर हमला करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में बीएनएस की धारा 132 के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके साथ ही, ड्यूटी पर तैनात पुलिस ऑफिसर को सीधे तौर पर शारीरिक नुकसान पहुंचाने और घायल करने के एवज में धारा 297 लगाई गई है।
पुलिस का कहना है कि भीड़ ने सोची-समझी रणनीति के तहत कानून लागू करने वाली एजेंसी पर धावा बोला, ताकि सरकारी कामकाज को पूरी तरह से ठप किया जा सके। इन धाराओं के जुड़ने से तेज प्रताप यादव की न्यायिक हिरासत की अवधि लंबी होना तय माना जा रहा है।
गैरकानूनी जमावड़े, दंगा और घातक हथियारों के इस्तेमाल पर कसता शिकंजा
प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद भीड़ इकट्ठा करने पर धारा 197(2) और गैरकानूनी जमावड़े के साझा उद्देश्य के लिए धारा 190 लगाई गई है। इसके अलावा घातक हथियारों के साथ उग्र दंगा फैलाने के संगीन आरोप में धारा 251 और धारा 191(3) को शामिल किया गया है।
पुलिस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि प्रदर्शनकारी पूरी तैयारी के साथ लाठी-डंडे और पत्थर लेकर पहुंचे थे, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा को बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया था। इस उपद्रव के कारण शहर का पूरा यातायात कई घंटों तक बाधित रहा।

आपराधिक षडयंत्र, उकसावे और अमर्यादित व्यवहार की धाराएं
हिंसा की पूरी पटकथा तैयार करने के मामले में तेज प्रताप यादव पर आपराधिक षडयंत्र रचने की धारा 61(2) लगाई गई है। साथ ही किसी गंभीर अपराध को अंजाम देने के लिए लोगों को दुष्प्रेरित करने या उकसाने के जुर्म में बीएनएस की धारा 49 जोड़ी गई है। जांच अधिकारियों का तर्क है कि नेता ने मंच से दिए बयानों के जरिए युवाओं के गुस्से को भड़काया और उन्हें पुलिस पर सीधा पथराव करने के लिए प्रेरित किया।
इसके अतिरिक्त, प्रदर्शन के दौरान अमर्यादित व्यवहार और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में धारा 293, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए धारा 299, और समाज के विभिन्न समूहों के बीच आपसी विद्वेष बढ़ाने के आरोप में धारा 196 भी जोड़ी गई है।
निषेधाज्ञा उल्लंघन और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला
क्षेत्र में लागू आचार संहिता और प्रशासनिक निषेधाज्ञा का सीधा उल्लंघन करने पर धारा 223 लगाई गई है, जिसमें छह महीने से एक साल तक की जेल का प्रावधान है।
इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने वाले विशेष अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत भी सख्त मामला दर्ज किया गया है। आंदोलनकारियों ने सड़क पर सरकारी वाहनों और सार्वजनिक ढांचों को काफी नुकसान पहुंचाया था, जिसकी कानूनी भरपाई और जवाबदेही तय करने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है।





