बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। प्रशांत किशोर को लगातार जीत की बधाइयां मिल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की इस हार को लेकर समीक्षा और मंथन की बातें कही जा रही हैं। इस बीच, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक अनंत सिंह ने भी प्रशांत किशोर की जीत पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
जनता ही मालिक है: अनंत सिंह
बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने सीधे शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है। उन्होंने कहा, "जिनको जनता ने वोट दिया वह जीते हैं और जिनको नहीं दिया वह हार गए। सीधी बात है, जनता मालिक होती है और जनता ही फैसला लेती है।"
नीतीश कुमार को लेकर उठ रहे सवालों पर दिया जवाब
उपचुनाव के नतीजों के बाद मीडिया द्वारा अनंत सिंह से यह सवाल पूछा गया कि क्या अगर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होते, तो बांकीपुर का चुनाव बीजेपी नहीं हारती? इस सवाल का जवाब देते हुए जेडीयू विधायक ने कहा कि जनता के बीच यह बात फैल गई है कि बीजेपी ने नीतीश कुमार को हटा दिया है। हालांकि, नेताओं का कहना है कि यह फैसला मिलजुल कर लिया गया है।
अनंत सिंह ने आगे कहा, "जनता का मानना है कि हमने नीतीश कुमार को वोट दिया है लेकिन मुख्यमंत्री किसी और को बना दिया गया। यह बात जनता को अच्छी नहीं लगी है।" इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि नीतीश कुमार ने खुद ही मुख्यमंत्री पद को छोड़ा है, न कि किसी और के दबाव में आकर उन्होंने यह कदम उठाया।

राजद प्रत्याशी की जमानत जब्त होने पर कसा तंज
बांकीपुर उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रत्याशी की जमानत जब्त होने पर भी अनंत सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राजद पर निशाना साधते हुए कहा, "हमने कई बार कहा है कि वह तो पार्टी ही नहीं है। जनता अपना वोट बर्बाद करना नहीं चाह रही थी, इसलिए उनका वोट कहीं और कन्वर्ट कर गया।"
बांकीपुर के नतीजों ने छेड़ी नई राजनीतिक बहस
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर की जीत ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। लंबे समय से इस सीट को भाजपा का बेहद मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में इस सीट पर मिली जीत को राजनीतिक विश्लेषक केवल एक उपचुनाव का परिणाम नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस चुनावी नतीजे के बाद बिहार में तीसरे राजनीतिक विकल्प की उपस्थिति, शहरी मतदाताओं की नई पसंद और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।





