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रोहिणी आचार्य का बीजेपी पर तंज, बोलीं- कोर्ट की फटकार के बाद देवेश कुमार को बनाया 'कुर्बानी का बकरा'

By | Published: 01 Aug 2026, 03:53 PM
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रोहिणी आचार्य का बीजेपी पर तंज, बोलीं- कोर्ट की फटकार के बाद देवेश कुमार को बनाया 'कुर्बानी का बकरा'
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मुख्य बातें

  • Patna: बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
  • देवेश कुमार ने विधान परिषद के सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
  • इस घटनाक्रम के तुरंत बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सत्तारूढ़ एनडीए और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अदालत की तल्ख टिप्पणी के बाद अपनी साख बचाने के लिए बीजेपी ने जल्दबाजी में देवेश कुमार को 'कुर्बानी का ब...

Patna: बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। देवेश कुमार ने विधान परिषद के सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सत्तारूढ़ एनडीए और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अदालत की तल्ख टिप्पणी के बाद अपनी साख बचाने के लिए बीजेपी ने जल्दबाजी में देवेश कुमार को 'कुर्बानी का बकरा' बना दिया है।


रोहिणी आचार्य का बीजेपी और एनडीए पर तंज

राजद नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सुप्रीम कोर्ट से मिली 'कानूनी फटकार' के बाद बीजेपी और एनडीए के भीतर अचानक जागी नैतिकता काबिले-तारीफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को मंत्री पद की मलाईदार सीट पर बनाए रखने के लिए यह पूरा कदम उठाया गया है।

रोहिणी आचार्य के अनुसार, देवेश कुमार का इस्तीफा एनडीए की 'कुर्सी बचाओ, गठबंधन चलाओ' नीति का एक स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जब कोर्ट के कड़े रुख से सरकार की छवि पर असर पड़ने लगा, तब मजबूरी में पार्टी के एमएलसी से इस्तीफा लेकर मंत्री पद को बचाने का रास्ता तैयार किया गया है।

इस्तीफे के दौरान मौजूद रहे बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी

घटनाक्रम के मुताबिक, देवेश कुमार शुक्रवार शाम बिहार विधान परिषद पहुंचे थे, जहां उन्होंने सभापति को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप दिया। इस मौके पर बीजेपी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के साथ-साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई विधान परिषद की इस सीट पर अब पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को भेजे जाने की पूरी तैयारी की जा रही है।

दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर मंडरा रहा था संवैधानिक संकट

वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश अभी तक बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन—विधानसभा या विधान परिषद—के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक प्रावधानों के तहत किसी भी गैर-विधायक को मंत्री पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता हासिल करना अनिवार्य होता है।

दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर बिना सदस्यता की समय-सीमा को लेकर संवैधानिक संकट पैदा हो गया था। यह मामला अदालत तक भी पहुंचा था, जहां कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। अदालत के इस कड़े रुख के बाद सरकार और एनडीए गठबंधन ने दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद का रास्ता साफ करने की प्रक्रिया तेज कर दी।


विपक्ष के सवाल और एनडीए की रणनीति

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर सदस्यता को लेकर विपक्षी दल लगातार राज्य सरकार से सवाल पूछ रहे थे। विपक्ष का तर्क था कि संवैधानिक नियमों के तहत सदन का सदस्य बने बिना मंत्री पद पर बने रहना अनुचित है। वहीं, सत्तारूढ़ एनडीए का कहना था कि इस पूरे मामले में सभी प्रक्रियाएं नियमों और संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप ही पूरी की जाएंगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देवेश कुमार का इस्तीफा और दीपक प्रकाश को विधान परिषद में भेजने की यह तैयारी एनडीए गठबंधन की एक रणनीतिक पहल है। इसका मकसद सरकार में सहयोगियों के साथ संतुलन बनाए रखना और मंत्रियों की संवैधानिक स्थिति को कानूनी रूप से मजबूत करना है। अब आधिकारिक घोषणा के बाद दीपक प्रकाश के बिहार विधान परिषद सदस्य बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।

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