जमशेदपुर (खबर डोज़ ब्यूरो) शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से आरंभ होने जा रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस आस्था और भक्ति के पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। इस साल पंचांगीय गणना के अनुसार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा, जबकि उनका प्रस्थान घोड़े की सवारी पर तय किया गया है। जमशेदपुर समेत देशभर के मंदिरों और पूजा पंडालों में नवरात्र को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
सनातन धर्म और पौराणिक मान्यताओं में नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के आगमन और गमन के वाहनों का विशेष ज्योतिषीय व धार्मिक महत्व माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्र के प्रारंभ और समापन के दिन यानी वार के आधार पर माता के वाहन तय होते हैं। चूंकि इस वर्ष शारदीय नवरात्र की शुरुआत रविवार के दिन हो रही है, इसलिए मां जगदम्बा का आगमन वाहन 'हाथी' बन रहा है। वहीं, विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को पड़ने के कारण देवी का प्रस्थान वाहन 'घोड़ा' यानी अश्व रहेगा।

हाथी पर आगमन और घोड़े पर प्रस्थान के मायने
धार्मिक शास्त्रों में देवी दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है। हाथी को सुख, समृद्धि, शांति और उत्तम वर्षा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जब माता गज पर सवार होकर आती हैं, तो देश में अच्छी मानसूनी और मौसमी बारिश होती है, जिससे कृषि पैदावार में बढ़ोतरी होती है और समाज में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
दूसरी ओर, विजयादशमी के दिन माता का घोड़े पर प्रस्थान करना ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सजगता और सतर्कता का संकेत माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, घोड़े पर गमन को सामाजिक, राजनीतिक और मानसिक अस्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में पंचांग और धार्मिक जानकारों के अनुसार समाज में आपसी सद्भाव और धैर्य बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया जाता है।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और तिथिवार कैलेंडर
धर्मशास्त्रों के अनुसार नवरात्र के पहले दिन प्रतिपदा तिथि को शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है। पंचांग के मुताबिक 11 अक्टूबर को सुबह 06:21 बजे से सुबह 10:11 बजे तक घटस्थापना का सबसे उत्तम समय रहेगा। इसके अलावा दोपहर 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक अभिजित मुहूर्त भी उपलब्ध रहेगा।
- 11 अक्टूबर (रविवार): प्रतिपदा - घटस्थापना व मां शैलपुत्री पूजा
- 12 अक्टूबर (सोमवार): द्वितीया - मां ब्रह्मचारिणी पूजा
- 13 अक्टूबर (मंगलवार): तृतीया - मां चंद्रघंटा पूजा
- 18 अक्टूबर (रविवार): अष्टमी - मां महागौरी पूजा और कन्या पूजन
- 19 अक्टूबर (सोमवार): नवमी - मां सिद्धिदात्री पूजा एवं हवन
- 20 अक्टूबर (मंगलवार): दशमी - विजयादशमी और प्रतिमा विसर्जन
विजयादशमी के दिन श्रद्धालु मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन कर उन्हें विदाई देंगे। इन नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों के जरिए मां के नौ स्वरूपों की उपासना की जाएगी।





