बिहार की राजधानी पटना से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कल दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों की पेशी होनी है। कोर्ट की इस सुनवाई को देखते हुए लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। यह मामला काफी पुराना है, लेकिन पिछले कुछ समय से इसकी कानूनी प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। अब 10 सितंबर को कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद इस मामले में आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। अदालत ने कुल 16 आरोपियों में से 9 के खिलाफ PMLA यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया था। वहीं, 7 आरोपियों को मामले से डिस्चार्ज कर दिया गया।

जिन 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया गया है, उनमें RJD प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेमचंद गुप्ता, उनकी पत्नी सरला गुप्ता, सुजाता होटल्स, लारा प्रोजेक्ट्स और होटल कारोबारी विनय कोचर और विजय कोचर भी इस मामले में आरोपी हैं।
अब सवाल है कि आखिर पूरा मामला क्या है?
यह मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है। उस समय लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसी दौरान रेलवे के रांची और पुरी स्थित BNR होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका देने में कथित तौर पर अनियमितता हुई।
CBI का आरोप है कि रेलवे के इन दोनों होटलों का ठेका सुजाता होटल्स को दिया गया। सुजाता होटल्स से विनय कोचर और विजय कोचर जुड़े हुए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि होटल का ठेका देने की प्रक्रिया में नियमों को कथित तौर पर बदला गया और इसके बदले पटना की एक कीमती जमीन को बेहद कम कीमत पर हासिल किया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, जिस जमीन की कीमत बाजार और सर्किल रेट के हिसाब से काफी ज्यादा थी, उसे कथित तौर पर कम कीमत पर एक कंपनी के जरिए हासिल किया गया। एजेंसियों का आरोप है कि बाद में इस कंपनी और जमीन पर लालू यादव के परिवार का प्रभाव और नियंत्रण बढ़ा।
ED ने इसी पूरे लेन-देन को मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांचा। एजेंसी का आरोप है कि रेलवे के होटल ठेकों में कथित तौर पर हुए लेन-देन से अपराध की आय यानी proceeds of crime पैदा हुई और बाद में इसी पैसे और संपत्तियों को अलग-अलग लेन-देन के जरिए आगे बढ़ाया गया।
10 सितंबर को राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने 9 आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को आगे सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार माना। वहीं, सात आरोपियों को मामले से बाहर कर दिया गया।

अब कल की पेशी इसलिए भी अहम है क्योंकि आरोप तय होने के बाद मामला ट्रायल के अगले चरण में आगे बढ़ेगा। अदालत में आरोपियों की मौजूदगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि अदालत द्वारा आरोप तय करने का मतलब दोष साबित होना नहीं है। आरोप जांच एजेंसियों की ओर से लगाए गए हैं और अब इन आरोपों को अदालत में सबूतों और गवाहियों के जरिए साबित किया जाना है। आरोपियों को अदालत में अपना पक्ष रखने और आरोपों का बचाव करने का पूरा कानूनी अधिकार है। इस मामले में लालू यादव और उनके परिवार की ओर से पहले भी जांच एजेंसियों के आरोपों को खारिज किया जाता रहा है। बचाव पक्ष का कहना रहा है कि मामले में लगाए गए आरोपों में दम नहीं है और पूरे मामले को राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। दूसरी तरफ जांच एजेंसियां अपने आरोपों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत के सामने अपना पक्ष रख रही हैं।

यानी आने वाले समय में अदालत में होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि जांच एजेंसियों की ओर से लगाए गए आरोपों के समर्थन में कितने ठोस सबूत सामने आते हैं और बचाव पक्ष उन आरोपों का किस तरह जवाब देता है। फिलहाल पटना से दिल्ली रवाना हुए लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की कल राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी होनी है। IRCTC होटल टेंडर से जुड़े इस पुराने मामले में अब आरोप तय होने के बाद कानूनी लड़ाई अगले चरण में पहुंच चुकी है।
ऐसे में कल की सुनवाई पर बिहार की सियासत के साथ-साथ कानूनी गलियारों की भी नजर रहेगी। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कोर्ट में आगे क्या होता है, बल्कि यह भी है कि इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों के आरोपों और बचाव पक्ष के दावों के बीच अदालत के सामने कौन-कौन से तथ्य और सबूत सामने आते हैं।





