पटना: बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH (पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) से एक बेहद शर्मनाक और गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद जूनियर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के बीच हिंसक टकराव हो गया है। डॉक्टरों के कथित दुर्व्यवहार और मारपीट के खिलाफ अस्पताल की सैकड़ों नर्सों ने सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार (Strike) कर दिया है, जिससे अस्पताल की इमरजेंसी, आईसीयू (ICU) और ऑपरेशन थिएटर (OT) सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद अस्पताल की ही एक सीनियर नर्स के पति के इलाज से जुड़ा है। मिली जानकारी के अनुसार, पीएमसीएच में पिछले 20 वर्षों से कार्यरत सीनियर नर्स लक्ष्मी कुमारी के पति अरविंद सिंह (55 वर्ष) को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टरों ने इलाज में घोर लापरवाही बरती, जिसके कारण अरविंद सिंह की जान चली गई।
बंधक बनाकर मारपीट का आरोप
परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने डॉक्टरों की इस लापरवाही का विरोध किया और सबूत के तौर पर अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाना शुरू किया, तो जूनियर डॉक्टर बुरी तरह भड़क गए। आरोप है कि डॉक्टरों ने सीनियर नर्स के बेटे और अन्य परिजनों को एक कमरे में बंद कर दिया और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। जब सीनियर नर्स लक्ष्मी कुमारी अपने परिवार को बचाने बीच-बचाव करने पहुंचीं, तो डॉक्टरों ने उनके साथ भी धक्का-मुक्की की और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।

नर्सों का फूटा गुस्सा: 'ये डॉक्टर हैं या गुंडे?'
इस घटना की खबर जैसे ही अस्पताल के अन्य नर्सिंग स्टाफ को मिली, पूरे परिसर में आक्रोश फैल गया। सैकड़ों की संख्या में नर्सों ने तुरंत काम बंद कर दिया और विरोध प्रदर्शन पर उतर आईं।
खराब मौसम और तेज बारिश के बावजूद नर्सें हाथों में छाता लिए पीएमसीएच परिसर में धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शनकारी नर्सों का कहना है:

"जो जूनियर डॉक्टर अभी चिकित्सा के गुर सीख रहे हैं, उनका व्यवहार अपराधियों और गुंडों जैसा हो गया है। अगर अस्पताल में दो दशकों से सेवा दे रही हमारी एक सीनियर साथी और उनका परिवार ही सुरक्षित नहीं है, तो यहाँ आम जनता और मरीजों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?"
नर्सों की मुख्य मांगें:
मारपीट और अभद्रता करने वाले दोषी जूनियर डॉक्टरों की तत्काल पहचान कर उन्हें सस्पेंड किया जाए।

दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर गिरफ्तारी हो।
अस्पताल परिसर में नर्सिंग स्टाफ और महिला कर्मियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं।






