पटना की बेऊर जेल में बड़े स्तर पर मनमानी और बंदियों के शोषण का खुलासा हुआ है। जिला प्रशासन और कारा विभाग की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं जिसने सबको हैरान कर दिया है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, जेल के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा था। कम उम्र के बंदियों और पहली बार जेल आए कैदियों को खतरनाक और कुख्यात अपराधियों के साथ रखा जाता था। जबकि जेल नियमों के अनुसार इन्हें अलग-अलग रखा जाना चाहिए।

आरोप है कि इन कम उम्र के बंदियों से जबरन मालिश करवाई जाती थी और कई तरह के पर्सनल काम करवाए जाते थे। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी। कुछ मामलों में यौन शोषण के आरोप भी सामने आए हैं। जांच में यह भी पाया गया कि जेल के अंदर कुछ अपराधियों को खास सुविधाएं दी जा रही थीं। इसके बदले उनसे पैसे लिए जाते थे। मोबाइल फोन, बेहतर खाना और भी कई सारों सुविधाओं की व्यवस्था करने के आरोप भी लगे हैं।

अगर कोई बंदी या उसका परिवार ज्यादा पैसे देने में सक्षम नहीं होता था, तो उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। शिकायत करने वालों को धमकी दी जाती थी कि अगर उन्होंने किसी को कुछ बताया तो उनके खिलाफ नए मामले दर्ज कर दिए जाएंगे या उन्हें जेल के अंदर नुकसान पहुंचाया जाएगा। इतना ही नहीं बल्कि जेल के अंदर खाने-पीने की व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। जांच टीम ने पाया कि कई वार्डों में कैदी खुद हीटर पर खाना बना रहे थे। आरोप है कि जेल का खाना खराब टेस्ट का दिया जाता था, ताकि बंदी निजी मेस से खाना खरीदने को मजबूर हो जाएं।
इसके अलावा सामान और सब्जियां भी मनमाने दामों पर बेची जा रही थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि सरसों का तेल और रोजमर्रा की चीजें बाजार कीमत से कई गुना ज्यादा दाम पर बेची जा रही थीं।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब मुख्यमंत्री के सहयोग पोर्टल पर कैदियों और उनके परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद गृह विभाग और कारा विभाग ने संयुक्त जांच कराई। 20 जून को अधिकारियों की टीम ने करीब आठ घंटे तक जेल का निरीक्षण किया और कई बंदियों से बातचीत की।

जांच रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बेऊर जेल के अधीक्षक नीरज कुमार झा, उपाधीक्षक अजय कुमार समेत कुल 7 अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि जेल अधीक्षक ने जांच टीम के साथ सहयोग नहीं किया। उन पर पीड़ित बंदियों को डराने और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के आरोप भी लगे हैं।

अब सबके मन में इस खुलासे के बाद यही सवाल उठ रहा है कि क्या घिनौनी हरकत करने एले अधिकारियों की नौकरी जा सकती है? तो देखिए फिलहाल ये कहना है कि तुरंत निलंबन किया गया है, लेकिन अगर आगे की जांच में आरोप सही साबित होते हैं और FIR दर्ज होती है, तो आरोपी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।नौकरी भी जा सकती है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और सरकार की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।





