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PMCH मामले में सम्राट से निशांत की शिकायत

By | Published: 06 Jul 2026, 09:21 PM
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PMCH मामले में सम्राट से निशांत की शिकायत
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मुख्य बातें

  • PMCH Action: बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH में हुई एक प्रशासनिक कार्रवाई अब बड़ा विवाद बन गई है।
  • नरेंद्र प्रताप सिंह को पद से हटाए जाने के बाद मामला सिर्फ विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें साजिश, भ्रष्टाचार और राजनीतिक विवाद जैसे गंभीर आरोप भी जुड...
  • इस पूरे मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और विश्व स्वास्थ्य संगठन तक शिकायत भेजी गई है।
  • 23 जून को बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल यानी पीएमसीएच पहुंचे थे।

PMCH Action: बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH में हुई एक प्रशासनिक कार्रवाई अब बड़ा विवाद बन गई है। प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को पद से हटाए जाने के बाद मामला सिर्फ विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें साजिश, भ्रष्टाचार और राजनीतिक विवाद जैसे गंभीर आरोप भी जुड़ गए हैं। इस पूरे मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और विश्व स्वास्थ्य संगठन तक शिकायत भेजी गई है। 


23 जून को बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल यानी पीएमसीएच पहुंचे थे। यहां उन्होंने रेडियोलॉजी विभाग में नई सुविधाओं का उद्घाटन किया और अस्पताल का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अपने कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि उन्होंने फोन पर संपर्क करने की कोशिश भी की, लेकिन बात नहीं हो सकी। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए डॉ. सिंह को प्रभारी प्राचार्य के पद से हटा दिया।


सरकारी पक्ष का कहना है कि डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित थे। विभागीय जांच में यह दावा भी किया गया कि जिस समय मंत्री अस्पताल पहुंचे थे, उस दौरान डॉ. सिंह अपनी निजी क्लीनिक में प्रैक्टिस कर रहे थे। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।


लेकिन इस कार्रवाई के बाद पूरा मामला नया मोड़ ले चुका है। पटना के बुद्ध कॉलोनी निवासी विधिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाष चंद्र शर्मा ने राज्य सरकार के RTMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री और विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी शिकायत भेजी गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने जनवरी 2026 में पीएमसीएच का कार्यभार संभालने के बाद अस्पताल की सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में रखे करोड़ों रुपये के महंगे चिकित्सा उपकरणों की कथित अनियमितताओं और अवैध जमाखोरी का मामला उजागर किया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसी वजह से उन्हें पद से हटाया गया।


शिकायत में यह भी कहा गया है कि स्वास्थ्य मंत्री का पीएमसीएच दौरा पहले से तय रणनीति का हिस्सा था और बिना कारण बताओ नोटिस या विभागीय जांच पूरी किए महज 24 घंटे के भीतर डॉ. सिंह को पद से हटा दिया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि डॉ. सिंह अपनी ईमानदार कार्यशैली के कारण पहले भी प्रताड़ना झेलते रहे हैं और यह कार्रवाई भी उसी का हिस्सा है।

हालांकि, यह सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं। इन आरोपों की अभी तक संबंधित सरकारी विभाग या स्वास्थ्य मंत्री की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


उधर, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने भी सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें बिना पक्ष सुने और बिना उचित अवसर दिए पद से हटा दिया गया। उनका कहना है कि जिस दिन मंत्री का दौरा था, उसी दिन वह एक दुर्घटना में घायल हो गए थे और इसलिए कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और सचिव से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई।

डॉ. सिंह का कहना है कि उन्होंने पीएमसीएच की व्यवस्था सुधारने और मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए पूरी ईमानदारी से काम किया, लेकिन उनके प्रयासों को नजरअंदाज कर दिया गया।


इतना ही नहीं, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने सरकार से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी वीआरएस देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा प्रशासनिक माहौल में अब उनके लिए काम करना संभव नहीं है। उन्होंने भारतीय चिकित्सा संघ और विपक्षी दलों से भी इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। वहीं शिकायतकर्ता ने मांग की है कि डॉ. सिंह को 24 घंटे के भीतर सम्मानपूर्वक बहाल किया जाए, स्वास्थ्य मंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और कथित प्रतिष्ठा हानि के लिए 100 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

फिलहाल इस पूरे मामले में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन भ्रष्टाचार, साजिश और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई जैसे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग इन शिकायतों पर क्या जवाब देते हैं और आगे क्या कार्रवाई होती है।

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