अगर आप NEET UG के जरिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS करने का सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। ने ऐसा फैसला लिया है जिसके बाद लाखों छात्रों को झटका लगा है, तमिलनाडु में करीब 650 MBBS सीटें राज्य काउंसलिंग से बाहर हो सकती हैं। इससे लाखों छात्रों के लिए सरकारी सीटों पर मुकाबला और ज्यादा कठिन हो जाएगा।

NEET UG की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। तमिलनाडु में करीब 650 सरकारी MBBS सीटें राज्य काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो सकती हैं। इससे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की दौड़ पहले से ज्यादा कठिन होने की संभावना है।
हालांकि, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इन सीटों को खत्म नहीं किया जा रहा है। यानी MBBS सीटों की कुल संख्या कम नहीं होगी। बदलाव सिर्फ इतना होगा कि ये सीटें अब तमिलनाडु की राज्य काउंसलिंग के जरिए नहीं मिलेंगी।
दरअसल, कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेजों को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है। इसी वजह से इन कॉलेजों की MBBS सीटें अब राज्य काउंसलिंग की बजाय मेडिकल काउंसलिंग कमेटी यानी MCC की ऑल इंडिया काउंसलिंग के जरिए भरी जाएंगी।

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ेगा, जो तमिलनाडु राज्य काउंसलिंग के जरिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने की उम्मीद कर रहे थे। अब राज्य काउंसलिंग में उपलब्ध सरकारी सीटों की संख्या कम हो जाएगी, जिससे हर सीट के लिए लडाई और बढ़ जाएगी।
यानी अगर पहले किसी रैंक पर सरकारी कॉलेज मिलने की संभावना थी, तो अब उसी कॉलेज में दाखिले के लिए और बेहतर रैंक की जरूरत पड़ सकती है। इससे कट-ऑफ भी ऊपर जा सकती है।

एक और बड़ा बदलाव यह होगा कि डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद इन कॉलेजों में दाखिले के लिए पूरे देश के छात्र आवेदन कर सकेंगे। पहले जहां तमिलनाडु के छात्रों को राज्य काउंसलिंग का फायदा मिलता था, अब उन्हें भी देशभर के अभ्यर्थियों के साथ मुकाबला करना होगा। इसका असर सिर्फ सीटों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फीस पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सरकारी कोटे के तहत निजी मेडिकल कॉलेजों में सालाना फीस करीब 4 लाख 35 हजार रुपये से लेकर 5 लाख 40 हजार रुपये तक होती है। वहीं मैनेजमेंट कोटे की फीस करीब 15 लाख से 16 लाख 20 हजार रुपये प्रति वर्ष तक पहुंच जाती है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों की फीस का बड़ा हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है, जिससे छात्रों पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है।
लेकिन डीम्ड यूनिवर्सिटी में ऐसा नहीं होता। यहां केंद्र सरकार ने फीस की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की है। ऐसे में कई डीम्ड यूनिवर्सिटी में MBBS की सालाना फीस 20 लाख रुपये से लेकर 35 लाख रुपये तक हो सकती है।

यानी जिन छात्रों को पहले कम फीस में सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई का मौका मिल सकता था, उन्हें अब ज्यादा फीस देकर पढ़ाई करनी पड़ सकती है।हालांकि अभी यह पूरी तरह तय नहीं हुआ है कि राज्य काउंसलिंग से आखिर कितनी सीटें बाहर होंगी। इसकी अंतिम जानकारी तमिलनाडु MBBS सीट मैट्रिक्स 2026 जारी होने के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे आधिकारिक काउंसलिंग नोटिस और सीट मैट्रिक्स का इंतजार करें। किसी भी अफवाह या सोशल मीडिया पर चल रही अधूरी जानकारी पर भरोसा न करें।
कुल मिलाकर, MBBS सीटें खत्म नहीं हो रही हैं, लेकिन राज्य काउंसलिंग में उपलब्ध सीटों की संख्या कम होने से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए अच्छे रैंक के साथ सही समय पर काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी करना अब और भी ज्यादा जरूरी हो गया है। तो अगर आप भी NEET UG के उम्मीदवार हैं, तो इस अपडेट पर नजर बनाए रखें। जैसे ही आधिकारिक सीट मैट्रिक्स जारी होगी, तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।





