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नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बिहार की गंडक नदी में बाढ़ का भयानक रूप

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नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बिहार की गंडक नदी में बाढ़ का भयानक रूप
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मुख्य बातें

  • बिहार में गंडक नदी की बाढ़ से मची तबाही की भयावहता अब अंतरिक्ष से भी साफ दिखाई दे रही है।
  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) की सैटेलाइट तस्वीरों में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर और उत्तर बिहार के विशाल भूभाग में फैले बाढ़ के पानी का डरावना मंजर दर्ज हुआ है।
  • नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के कारण गंडक नदी का पानी तटबंधों को तोड़कर रिहायशी इलाकों में घुस गया है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं।
  • नासा अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने 2 अक्टूबर 2026 को 'रेंस स्वैम्प द गंडक रिवर' (Rains Swamp the Gandak River) शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है।

पटना (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार में गंडक नदी की बाढ़ से मची तबाही की भयावहता अब अंतरिक्ष से भी साफ दिखाई दे रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) की सैटेलाइट तस्वीरों में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर और उत्तर बिहार के विशाल भूभाग में फैले बाढ़ के पानी का डरावना मंजर दर्ज हुआ है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के कारण गंडक नदी का पानी तटबंधों को तोड़कर रिहायशी इलाकों में घुस गया है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं।

नासा अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने 2 अक्टूबर 2026 को 'रेंस स्वैम्प द गंडक रिवर' (Rains Swamp the Gandak River) शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में 20 सितंबर और 29 सितंबर 2026 को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। इन तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि मात्र नौ दिनों के भीतर गंडक नदी के आसपास के मैदानी इलाकों में पानी का फैलाव कितनी तेजी से बढ़ा है।

नेपाल में रिकॉर्ड बारिश और देवघाट का ऐतिहासिक जलस्तर

नासा की रिपोर्ट के अनुसार, 24 से 27 सितंबर के बीच नेपाल के लुंबिनी और गंडकी प्रांतों में असाधारण रूप से भारी बारिश दर्ज की गई। इस मूसलाधार बारिश के चलते नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में कई जगह भीषण भूस्खलन भी हुआ। नेपाल में गंडक नदी को नारायणी के नाम से जाना जाता है। पानी का बहाव इतना तेज था कि नेपाल के देवघाट में 27 सितंबर को नदी का जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंच गया।

यह आंकड़ा इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि देवघाट में साल 1960 के दशक से जलस्तर का रिकॉर्ड रखा जा रहा है, और पिछले छह दशकों में यह अब तक का सबसे ऊंचा जलस्तर है। इस ऐतिहासिक जलस्तर के कारण गंडक नदी का पानी सामान्य मानसूनी उतार-चढ़ाव की सीमाओं को लांघकर तबाही का कारण बन गया।

नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बिहार की गंडक नदी में बाढ़ का भयानक रूप

बिहार के इन जिलों में गंडक ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

नेपाल से आने वाले इस भारी जलप्रवाह का सीधा असर बिहार के सीमावर्ती और मैदानी जिलों पर पड़ा। भारत में प्रवेश करते ही गंडक नदी के किनारे स्थित बगहा, डुमरियाघाट, रेवा घाट और लालगंज जैसे क्षेत्रों में जलस्तर ने पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। नदी का पानी उफान पर होने के कारण कई स्थानों पर सुरक्षा तटबंधों के ऊपर से बहने लगा, जबकि कुछ संवेदनशील जगहों पर तटबंध टूटने से बाढ़ का पानी गांवों में फैल गया।

इस प्राकृतिक आपदा का सबसे गंभीर असर बिहार के पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर जिलों में देखने को मिल रहा है। इन जिलों के सैकड़ों गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने नासा की इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये सैटेलाइट आंकड़े इस बार की बाढ़ की असाधारण और गंभीर स्थिति को प्रमाणित करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंडक में पानी का यह बहाव सामान्य मौसमी बारिश जैसा नहीं था, बल्कि नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई अप्रत्याशित अतिवृष्टि का सीधा परिणाम है। राज्य सरकार प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य चला रही है और इन वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के सटीक आकलन के लिए कर रही है।

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