सुपौल (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार के सुपौल जिले में पूंजी की कमी से जूझ रहे मत्स्य पालकों को बड़ी राहत देने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से जोड़ने का एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत जिले के 8,900 मत्स्य पालकों को बिना किसी गारंटी के दो लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को ब्याज दर में विशेष छूट दी जाएगी, जिससे उन्हें केवल चार प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
पूंजी के अभाव में मछली पालन का कारोबार बढ़ाने में असमर्थ किसानों के लिए यह योजना बेहद मददगार साबित होगी। केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान के तहत जिले के नौ प्रखंडों में विशेष मेगा कैंप लगाए गए हैं। पहले दिन छातापुर और राघोपुर को छोड़कर अन्य सभी प्रखंडों में बड़ी संख्या में मत्स्य पालकों ने पहुंचकर अपने आवेदन जमा किए।

हर शुक्रवार को लगेंगे प्रखंड स्तरीय मेगा कैंप
मत्स्य पालकों को ऋण प्रक्रिया में किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। अब प्रत्येक शुक्रवार को प्रखंड स्तर पर मेगा कैंप का आयोजन किया जाएगा। यदि शुक्रवार को कोई सरकारी अवकाश रहता है, तो अगले कार्य दिवस पर इस कैंप का आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा। जिला स्तर पर इस पूरे अभियान की निगरानी जिला मत्स्य पदाधिकारी और लीड बैंक मैनेजर मिलकर कर रहे हैं, ताकि बैंकों से समन्वय बनाकर आवेदनों को जल्द से जल्द मंजूरी दिलाई जा सके।
केसीसी के तहत कृषि और उससे जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए अधिकतम तीन लाख रुपये तक का ऋण लिया जा सकता है। लेकिन विशेष रूप से मछली पालन के लिए बिना किसी गारंटी के दो लाख रुपये तक का ऋण स्वीकृत करने का प्रावधान किया गया है। इस ऋण पर सामान्य ब्याज दर सात प्रतिशत वार्षिक निर्धारित है। हालांकि, जो किसान समय पर अपने ऋण का भुगतान कर देंगे, उन्हें ब्याज में तीन प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलेगी, जिससे प्रभावी ब्याज दर घटकर केवल चार प्रतिशत रह जाएगी।

ऋण के लिए आवश्यक दस्तावेज और पात्रता
इस विशेष ऋण योजना का लाभ लेने के लिए मत्स्य पालकों को कुछ अनिवार्य दस्तावेज जमा करने होंगे। आवेदकों को अपनी पहचान के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र में से कोई एक दस्तावेज देना होगा। इसके साथ ही आवासीय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी, पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो और एक सक्रिय मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी।
यदि आवेदक के पास अपना निजी तालाब है, तो उसे जमीन की अद्यतन रसीद प्रस्तुत करनी होगी। वहीं, यदि तालाब किराए पर लिया गया है, तो स्टांप पेपर पर तैयार किया गया लीज एग्रीमेंट देना अनिवार्य होगा।
जिला मत्स्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया, "जिले में विशेष अभियान की शुरुआत कर दी गई है। मेगा कैंप के माध्यम से 8,900 मत्स्य पालकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर केसीसी का लाभ देने का लक्ष्य है। मछली पालन के लिए आवेदक के पास निजी तालाब या जलाशय होना चाहिए। निजी जमीन नहीं होने की स्थिति में कम से कम सात से 10 वर्ष के एग्रीमेंट पर लिया गया तालाब भी मान्य होगा।" इस अभियान के जरिए जिले के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले छोटे और सीमांत मत्स्य पालकों को मुख्यधारा के बैंकिंग सिस्टम से जोड़कर उनके व्यवसाय को नई मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है।





