प्रशांत किशोर ने क्या दी प्रतिक्रिया
जब पत्रकारों ने प्रशांत किशोर से सवाल किया कि क्या अनंत सिंह जनसुराज का दामन थामेंगे और क्या पार्टी चुनाव जीतने के लिए बाहुबली का सहारा ले रही है, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया। प्रशांत किशोर ने कहा कि हजारों लोग समर्थन दे रहे हैं, लेकिन हर समर्थक पार्टी में शामिल हो जाए, यह जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय या बात सामने आएगी, तो पार्टी उस पर विचार करेगी।
प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि यदि किसी को सातवां वेतनमान चाहिए, वित्तरहित शिक्षकों को मान-सम्मान चाहिए या बेरोजगार युवाओं को रोजगार चाहिए, तो वे जनसुराज की विचारधारा से जुड़ सकते हैं। इसमें किसी बाहुबली या धर्मबली का कोई विशेष महत्व नहीं है। पार्टी पूरी तरह से अपनी नीतियों और जनता के समर्थन के दम पर आगे बढ़ रही है।

जदयू के भीतर बढ़ी आंतरिक कलह
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम जदयू के भीतर चल रही अंदरूनी कलह का परिणाम माना जा रहा है। मोकामा विधायक अनंत सिंह और विधान पार्षद नीरज कुमार के बीच चल रहा विवाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लाख प्रयासों के बाद भी सुलझ नहीं पाया है। विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ यह गतिरोध विधान परिषद चुनाव में खुलकर सामने आ गया है, जहां दोनों नेता एक-दूसरे के खिलाफ तीखे हमले कर रहे हैं। पार्टी स्तर पर इस मामले को शांत कराने के लिए केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन बात नहीं बन सकी।
अनंत सिंह ने खुले तौर पर विधान पार्षद नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनकी जमानत तक जब्त कराने की बात कही है। दूसरी ओर, नीरज कुमार ने भी तीखा पलटवार करते हुए बयानों के तीर छोड़े हैं। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से चल रहे इस घमासान और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे गंभीर आरोपों के कारण जदयू का शीर्ष नेतृत्व असहज स्थिति में है। अब देखना यह होगा कि पार्टी इस आंतरिक संकट से कैसे निपटती है और आगामी चुनावों में इसका क्या असर पड़ता है।





