बिहार के वैशाली जिले के लालगंज प्रखंड अंतर्गत जलालपुर में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे एक निर्माणाधीन फोरलेन पुल का भारी-भरकम लोहे का लॉन्चर अचानक विस्थापित होकर ढह गया। इस भीषण हादसे में कार्यस्थल पर मौजूद सात मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक टीम की मदद से मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। यह दुर्घटना गंडक नदी से महज आधा किलोमीटर पहले ओवरब्रिज निर्माण कार्य के दौरान घटित हुई, जिसके बाद निर्माण कंपनी की घोर लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।
सुबह के वक्त हुआ हादसा, गैस कटर से काटे गए लोहे के गार्डर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह हादसा गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे हुआ जब मजदूर पुल के स्पैन पर लॉन्चर को विस्थापित करने का काम कर रहे थे। अचानक अनियंत्रित होकर लोहे का विशालकाय ढांचा नीचे गिर गया, जिसकी चपेट में कई मजदूर आ गए। हादसे के तुरंत बाद चीख-पुकार मच गई और एक मजदूर लोहे के भारी स्ट्रक्चर के बीच बुरी तरह फंस गया। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए फंसे हुए मजदूर को ढांढस बंधाया और उसे पानी पिलाकर जीवित रखने का प्रयास किया। बाद में प्रशासन और तकनीकी टीम ने गैस कटर की मदद से लोहे के गार्डर को काटकर फंसे हुए मजदूर को सुरक्षित बाहर निकाला।

घायल मजदूरों की सूची और उनकी स्वास्थ्य स्थिति
वैशाली जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस हादसे में कुल सात श्रमिक घायल हुए हैं, जिनमें से दो की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है। घायलों का विवरण निम्नलिखित है:
- रंजन कुमार (निवासी: बेगूसराय) - स्थानीय अस्पताल में उपचाराधीन।
- राम भरोसे साह (निवासी: पटना) - स्थिति गंभीर, पटना रेफर।
- गुलशन (निवासी: पंजाब) - स्थानीय अस्पताल में उपचाराधीन।
- अली इमाम (निवासी: पातेपुर, वैशाली) - स्थानीय अस्पताल में उपचाराधीन।
- प्रमोद चौधरी (निवासी: पटना) - स्थिति गंभीर, पटना रेफर।
- संजीव कुमार (निवासी: उड़ीसा) - स्थानीय अस्पताल में उपचाराधीन।
- संदीप कुमार (निवासी: मुजफ्फरपुर) - स्थानीय अस्पताल में उपचाराधीन।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर भड़का जनआक्रोश, कैंप में तोड़फोड़
हादसे के बाद निर्माण स्थल पर सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी को लेकर ग्रामीण उग्र हो गए। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि फोरलेन निर्माण कंपनी द्वारा मजदूरों को हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, सेफ्टी नेट या लाइफलाइन जैकेट जैसे बुनियादी सुरक्षा उपकरण (PPE Kits) उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इसके अलावा, इतने बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण कार्य के बावजूद मौके पर कोई आपातकालीन एम्बुलेंस या प्राथमिक चिकित्सा किट मौजूद नहीं थी।

आक्रोशित भीड़ ने निर्माण कंपनी के कैंप कार्यालय पर धावा बोल दिया और वहां रखी कुर्सियों, मेजों और अन्य फर्नीचर को क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी उखाड़ फेंका। स्थिति को बिगड़ता देख वैशाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शुभांक मिश्रा, लालगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) गोपाल मंडल और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) सुजीत कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया।
लॉन्चर विस्थापन के अनिवार्य SOP और कानूनी प्रावधान
भारी ढांचागत निर्माण कार्यों, विशेषकर पुलों के सुपरस्ट्रक्चर और लॉन्चर इरेक्शन के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा कड़े सुरक्षा नियम (SOP) निर्धारित किए गए हैं। इस मामले में इन नियमों के उल्लंघन के स्पष्ट संकेत मिले हैं:

- लॉन्चर शिफ्टिंग प्रोटोकॉल: नियमानुसार, जब भी लॉन्चर या भारी गर्डर्स को विस्थापित किया जाता है, तो उस क्षेत्र को पूरी तरह से 'नो-गो जोन' घोषित कर बैरिकेडिंग की जानी चाहिए, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति या मजदूर असुरक्षित दायरे में न रहे।
- सुरक्षा अधिकारी की उपस्थिति: किसी भी भारी लिफ्टिंग या शिफ्टिंग प्रक्रिया के दौरान एक योग्य सेफ्टी ऑफिसर (Safety Officer) का मौके पर उपस्थित रहना अनिवार्य है, जो लोड चार्ट और स्टेबिलिटी की जांच करता है।
- BOCW अधिनियम 1996: भवन और अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996 के तहत नियोक्ताओं को कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने होते हैं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का प्रावधान है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS): कार्यस्थल पर घोर लापरवाही के कारण जीवन को खतरे में डालने के मामले में निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ बीएनएस की सुसंगत धाराओं (जैसे लापरवाही से चोट पहुंचाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है।
परियोजना की पृष्ठभूमि और आगामी प्रशासनिक कदम
यह निर्माणाधीन पुल भारतमाला परियोजना का हिस्सा है, जो सारण जिले के बाकरपुर (सोनपुर/शीतलपुर के समीप) से शुरू होकर वैशाली के लालगंज होते हुए मुजफ्फरपुर जिले के मानिकपुर (SH-74) तक लगभग 38.8 किलोमीटर की लंबाई में फैला हुआ है। इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के निर्माण की जिम्मेदारी एक निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के पास है।
वैशाली जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना के कारणों की विस्तृत तकनीकी जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, जिले में चल रहे अन्य सभी बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स के सुरक्षा ऑडिट के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।





