बिहार सरकार ने बदले सरकारी कर्मचारियों के तबादले के नियम
बिहार में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब कर्मचारियों के लिए मनचाही पोस्टिंग हासिल करना पहले जैसा आसान नहीं रह गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य तौर पर तबादले नहीं किए जाएंगे और जिन मामलों में तबादला जरूरी होगा, उनके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय यानी CMO की मंजूरी अनिवार्य होगी।
राज्य सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, फिलहाल तबादलों पर लगभग पूरी तरह रोक रहेगी ताकि केवल आवश्यकतानुसार ही कदम उठाए जा सकें। लंबे समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि कई कर्मचारी अपने प्रभाव का उपयोग करके मनचाही जगहों पर पोस्टिंग पा लेते थे। नए नियमों के लागू होने से इस प्रक्रिया पर लगाम लगेगी और पारदर्शिता आएगी।

गंभीर बीमारी और विशेष परिस्थितियों के लिए तय हुई प्रक्रिया
यदि किसी कर्मचारी या उसके परिवार में कोई गंभीर बीमारी है, तो ऐसे मामलों में नियमों के तहत राहत मिल सकती है। इसके लिए कर्मचारी को संबंधित विभाग के सचिव या सक्षम अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा। इसके बाद विभागीय स्थापना समिति आवेदन की जांच करेगी और उसकी सिफारिश के आधार पर फाइल को मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा जाएगा। CMO से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही तबादले का आदेश जारी किया जाएगा।
पंचायत चुनाव के मद्देनजर भी सरकार ने विशेष व्यवस्था बनाई है। चुनाव कार्य से जुड़े किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला राज्य निर्वाचन आयोग की अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई स्वास्थ्य विभाग का डॉक्टर जेल अस्पताल में काम करना चाहता है, तो उसे स्वास्थ्य विभाग और कारा विभाग दोनों से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC लेना अनिवार्य होगा। दोनों विभागों की सहमति मिलने पर ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

पुलिस और शिक्षक वर्ग के लिए क्या है व्यवस्था
कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पुलिस विभाग को इस नई नीति से कुछ हद तक अलग रखा गया है। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले प्रशासनिक और कार्य की जरूरत के अनुसार पहले की तरह किए जा सकेंगे। वहीं, शिक्षकों के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं, जिसके तहत महिला और पुरुष शिक्षकों को उनके गृह क्षेत्र या उसके आसपास के इलाकों में प्राथमिकता देने की बात कही गई है। खासकर महिला शिक्षकों को घर के नजदीक पोस्टिंग देने पर जोर दिया गया है ताकि उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ काम करने में आसानी हो।
नए नियमों के आने से उन कर्मचारियों को झटका लगा है जो इस साल तबादले की उम्मीद लगाए बैठे थे। सामान्य परिस्थितियों में अब उन्हें अगले तबादला चक्र का इंतजार करना होगा। सरकार का मानना है कि इस नीति से विभागों में स्थिरता आएगी और प्रशासनिक कामकाज में निष्पक्षता तथा पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।





