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Bihar Sugar Mill Policy 2026: 1₹ में जमीन, 70 करोड़ तक सब्सिडी, जानिए पूरी योजना

By | Published: 06 Aug 2026, 05:33 PM
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Bihar Sugar Mill Policy 2026: 1₹ में जमीन, 70 करोड़ तक सब्सिडी, जानिए पूरी योजना
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मुख्य बातें

  • Bihar Sugar Mill Subsidy: बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा दांव खेला है।
  • अब अगर कोई निवेशक बिहार में नई चीनी मिल लगाना चाहता है, तो उसे सरकार की ओर से कई आकर्षक सुविधाएं मिलेंगी।
  • सिर्फ 1 रुपये की टोकन राशि पर सरकारी जमीन लीज, 70 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी और 5 साल तक 100 फीसदी SGST रिफंड जैसी घोषणाओं के साथ सरकार ने निवेशकों को खुला न्योता दिया है।
  • बिहार सरकार ने राज्य में गन्ना आधारित उद्योगों को नई रफ्तार देने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

Bihar Sugar Mill Subsidyबिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा दांव खेला है। अब अगर कोई निवेशक बिहार में नई चीनी मिल लगाना चाहता है, तो उसे सरकार की ओर से कई आकर्षक सुविधाएं मिलेंगी। सिर्फ 1 रुपये की टोकन राशि पर सरकारी जमीन लीज, 70 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी और 5 साल तक 100 फीसदी SGST रिफंड जैसी घोषणाओं के साथ सरकार ने निवेशकों को खुला न्योता दिया है। 

बिहार सरकार ने राज्य में गन्ना आधारित उद्योगों को नई रफ्तार देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने शुगरकेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पोर्टल यानी SIPP लॉन्च किया है। यह पोर्टल बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 के तहत तैयार किया गया है, जिसका मकसद राज्य में निवेश बढ़ाना और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

सरकार का कहना है कि अब निवेशकों को अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। SIPP पोर्टल पर उद्योग लगाने से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां, जिलेवार उपलब्ध सरकारी जमीन का विवरण, सब्सिडी की जानकारी और ऑनलाइन आवेदन की सुविधा एक ही जगह उपलब्ध होगी। यानी निवेशक घर बैठे आवेदन कर सकेंगे। इस नई नीति की सबसे बड़ी खासियत है 70 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी। यदि कोई निवेशक बिहार में नई चीनी मिल स्थापित करता है, तो उसे परियोजना के आधार पर सरकार की ओर से अधिकतम 70 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इतना ही नहीं, उद्योग शुरू होने के बाद अगले 5 वर्षों तक राज्य सरकार SGST का 100 फीसदी रिफंड भी देगी। इससे उद्योग लगाने की शुरुआती लागत काफी कम हो जाएगी।


सरकार ने एक और बड़ा ऐलान किया है, जिसने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। नई उद्योग नीति के तहत निवेशकों को सिर्फ 1 रुपये की टोकन राशि पर सरकारी जमीन लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि उद्योग लगाने में जमीन की लागत बाधा न बने और अधिक से अधिक निवेशक बिहार में अपने उद्योग स्थापित करें। फिलहाल बिहार में लगभग 10 चीनी मिलें संचालित हो रही हैं। लेकिन सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 25 नई चीनी मिलों तक पहुंचाना है। इसके साथ ही लंबे समय से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को भी दोबारा शुरू करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।

सरकार की योजना केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं है। राज्य को इथेनॉल उत्पादन, बिजली उत्पादन और कंप्रेस्ड बायोगैस के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति तैयार की गई है। इसके लिए गन्ना आधारित उद्योगों का विस्तार किया जाएगा, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

इस नई नीति का फायदा केवल उद्योगपतियों को ही नहीं, बल्कि गन्ना किसानों को भी मिलने वाला है। सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए गन्ने पर 10 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त आर्थिक सहयोग दे रही है। साथ ही बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले गन्ने के बीज मुफ्त उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि इससे गन्ने की पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आमदनी में भी इजाफा होगा।


यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो बिहार में चीनी उद्योग को नई पहचान मिल सकती है। इससे न सिर्फ बड़े निवेश आएंगे, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। अब देखना होगा कि सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है और कितने निवेशक बिहार में उद्योग लगाने के लिए आगे आते हैं। लेकिन इतना तय है कि 1 रुपये में सरकारी जमीन, 70 करोड़ तक की सब्सिडी और 5 साल तक टैक्स रिफंड जैसी सुविधाओं ने बिहार को निवेश के लिहाज से चर्चा के केंद्र में जरूर ला दिया है।

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