बिहार में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या नहीं? इस सवाल को लेकर अब बड़ा संशय पैदा हो गया है। चुनाव दिसंबर तक पूरे होने हैं, लेकिन अभी तक चुनाव की तैयारी काफी पीछे चल रही है। मतदाता सूची जारी नहीं हुई है, मतदान केंद्र तय नहीं हुए हैं और सबसे अहम आरक्षण की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार पंचायत चुनाव तय समय पर हो पाएंगे? बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ सकी हैं। साल 2026 के छह महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन कई जरूरी काम अब भी अधूरे हैं। यही वजह है कि दिसंबर 2026 तक चुनाव पूरा होने पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

सबसे पहले बात करें अगर वोटर लिस्ट की। तो अब तक नई वोटर लिस्ट प्रकाशित नहीं की गई है। इसके अलावा मतदान केंद्रों का चयन भी बाकी है। चुनाव की प्रक्रिया में ये दोनों सबसे जरूरी कदम माने जाते हैं। इतना ही नहीं, पंचायत चुनाव के लिए तीसरे चरण का पदवार आरक्षण भी अभी तक शुरू नहीं हुआ है। बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 के अनुसार हर दो चुनाव के बाद नए सिरे से आरक्षण तय करना जरूरी होता है। पहली बार वर्ष 2006 में आरक्षण लागू हुआ था और दूसरी बार 2016 में। अब तीसरे चरण में फिर से आरक्षण तय किया जाना है।

इस बार करीब ढाई लाख पदों के लिए आरक्षण निर्धारित करना होगा। इनमें मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के पद शामिल हैं। इतनी बड़ी प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय लगता है। एक और बड़ी चुनौती राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़ी हुई है। वर्तमान राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद का कार्यकाल 27 जुलाई को समाप्त हो रहा है। अगर सरकार नए आयुक्त की नियुक्ति करती है, तो नए अधिकारी को पूरी व्यवस्था समझने और चुनावी तैयारियों को गति देने में समय लगेगा। वहीं अगर नियुक्ति में देरी होती है, तो चुनाव की तैयारियां और प्रभावित हो सकती हैं।
नए आयुक्त के सामने सिर्फ पंचायत चुनाव ही नहीं, बल्कि नवसृजित नगर निकायों और अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की जिम्मेदारी भी होगी। ऐसे में चुनाव आयोग पर काम का दबाव और बढ़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, अति पिछड़ा वर्ग के लिए राजनीतिक रूप से पिछड़ेपन का निर्धारण होने के बाद ही आरक्षण तय किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में भी समय लगता है। साल 2022 में नगर निकाय चुनाव के दौरान भी इसी मुद्दे के कारण चुनाव करीब दो महीने देर से हुए थे।

अगर पंचायत चुनाव की बात करें तो इस बार कुल लगभग ढाई लाख पदों पर चुनाव होना है। इनमें 8 हजार 53 मुखिया, 8 हजार 53 सरपंच, 1 लाख 9 हजार 635 वार्ड सदस्य, 1 लाख 9 हजार 635 पंच, 11 हजार 85 पंचायत समिति सदस्य और 1 हजार 160 जिला परिषद सदस्यों का चुनाव होना है।
इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने के लिए मतदाता सूची, मतदान केंद्र, आरक्षण और प्रशासनिक तैयारियां समय पर पूरी होना बेहद जरूरी है। लेकिन फिलहाल इन सभी कामों में देरी साफ दिखाई दे रही है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग पर है। सबसे पहले नए आयुक्त की नियुक्ति और उसके बाद चुनावी तैयारियों में तेजी लाना जरूरी होगा। अगर आने वाले कुछ हफ्तों में प्रक्रिया तेज नहीं हुई, तो दिसंबर तक पंचायत चुनाव पूरा कराना मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल आधिकारिक तौर पर चुनाव टालने की कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन तैयारियों की धीमी रफ्तार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग कितनी तेजी से लंबित प्रक्रियाओं को पूरा करते हैं और क्या बिहार में पंचायत चुनाव तय समय पर हो पाते हैं या नहीं।





