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बिहार पंचायत चुनाव की तैयारियों में देरी, दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी होने पर उठ रहे सवाल

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बिहार पंचायत चुनाव की तैयारियों में देरी, दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी होने पर उठ रहे सवाल
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मुख्य बातें

  • बिहार में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या नहीं, इसको लेकर अब बड़ा संशय पैदा हो गया है।
  • चुनाव दिसंबर तक पूरे होने हैं, लेकिन अभी तक चुनाव की तैयारी काफी पीछे चल रही है।
  • मतदाता सूची जारी नहीं हुई है, मतदान केंद्र तय नहीं हुए हैं और सबसे अहम आरक्षण की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है।
  • ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार पंचायत चुनाव तय समय पर हो पाएंगे।

बिहार पंचायत चुनाव की तैयारियों में सुस्ती

बिहार में पंचायत चुनाव समय पर होंगे या नहीं, इसको लेकर अब बड़ा संशय पैदा हो गया है। चुनाव दिसंबर तक पूरे होने हैं, लेकिन अभी तक चुनाव की तैयारी काफी पीछे चल रही है। मतदाता सूची जारी नहीं हुई है, मतदान केंद्र तय नहीं हुए हैं और सबसे अहम आरक्षण की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार पंचायत चुनाव तय समय पर हो पाएंगे। बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ सकी हैं। साल के छह महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन कई जरूरी काम अब भी अधूरे हैं, जिस वजह से दिसंबर तक चुनाव पूरा होने पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

मतदाता सूची और आरक्षण की प्रक्रिया अधूरी

सबसे पहले बात करें अगर वोटर लिस्ट की, तो अब तक नई वोटर लिस्ट प्रकाशित नहीं की गई है। इसके अलावा मतदान केंद्रों का चयन भी बाकी है। चुनाव की प्रक्रिया में ये दोनों सबसे जरूरी कदम माने जाते हैं। पंचायत चुनाव के लिए तीसरे चरण का पदवार आरक्षण भी अभी तक शुरू नहीं हुआ है। बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 के अनुसार हर दो चुनाव के बाद नए सिरे से आरक्षण तय करना जरूरी होता है। पहली बार वर्ष 2006 में आरक्षण लागू हुआ था और दूसरी बार 2016 में, और अब तीसरे चरण में फिर से आरक्षण तय किया जाना है। इस बार करीब ढाई लाख पदों के लिए आरक्षण निर्धारित करना होगा, जिनमें मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के पद शामिल हैं। इतनी बड़ी प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय लगता है।

बिहार पंचायत चुनाव की तैयारियों में देरी, दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी होने पर उठ रहे सवाल

एक और बड़ी चुनौती राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़ी हुई है। वर्तमान राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद का कार्यकाल 27 जुलाई को समाप्त हो रहा है। अगर सरकार नए आयुक्त की नियुक्ति करती है, तो नए अधिकारी को पूरी व्यवस्था समझने और चुनावी तैयारियों को गति देने में समय लगेगा। वहीं अगर नियुक्ति में देरी होती है, तो चुनाव की तैयारियां और प्रभावित हो सकती हैं। नए आयुक्त के सामने सिर्फ पंचायत चुनाव ही नहीं, बल्कि नवसृजित नगर निकायों और अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की जिम्मेदारी भी होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, अति पिछड़ा वर्ग के लिए राजनीतिक रूप से पिछड़ेपन का निर्धारण होने के बाद ही आरक्षण तय किया जा सकता है और इस प्रक्रिया में भी समय लगता है। साल 2022 में नगर निकाय चुनाव के दौरान भी इसी मुद्दे के कारण चुनाव करीब दो महीने देर से हुए थे।

बिहार पंचायत चुनाव की तैयारियों में देरी, दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी होने पर उठ रहे सवाल

अगर पंचायत चुनाव की बात करें तो इस बार कुल लगभग ढाई लाख पदों पर चुनाव होना है। इनमें 8 हजार 53 मुखिया, 8 हजार 53 सरपंच, 1 लाख 9 हजार 635 वार्ड सदस्य, 1 लाख 9 हजार 635 पंच, 11 हजार 85 पंचायत समिति सदस्य और 1 हजार 160 जिला परिषद सदस्यों का चुनाव होना है। इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने के लिए मतदाता सूची, मतदान केंद्र, आरक्षण और प्रशासनिक तैयारियां समय पर होना बेहद जरूरी है। फिलहाल इन सभी कामों में देरी साफ दिखाई दे रही है और सभी की नजर राज्य सरकार तथा राज्य निर्वाचन आयोग पर टिकी हुई है। सबसे पहले नए आयुक्त की नियुक्ति और उसके बाद चुनावी तैयारियों में तेजी लाना जरूरी है। अगर आने वाले कुछ हफ्तों में प्रक्रिया तेज नहीं हुई, तो दिसंबर तक पंचायत चुनाव पूरा कराना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर चुनाव टालने की कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन तैयारियों की धीमी रफ्तार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार पंचायत चुनाव की तैयारियों में देरी, दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी होने पर उठ रहे सवाल

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