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बिहार विधानसभा में 'भूमिहार' पर घमासान, सरकार ने सुनाया बड़ा फैसला

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बिहार विधानसभा में 'भूमिहार' पर घमासान, सरकार ने सुनाया बड़ा फैसला
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मुख्य बातें

  • बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन "भूमिहार" और "भूमिहार ब्राह्मण" शब्द के इस्तेमाल को लेकर सदन के भीतर जोरदार राजनीतिक बहस देखने को मिली।
  • यह पूरा विवाद सरकारी दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और जाति प्रमाण पत्रों में इस्तेमाल की जाने वाली आधिकारिक शब्दावली को लेकर खड़ा हुआ।
  • बिहार सरकार ने विधानसभा में पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के सभी सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक जाति प्रमाण पत्रों में केवल "भूमिहार" ही दर्ज किया जाएगा, "भूमिहार ब्राह्मण" शब्द का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
  • सरकार के इस रुख पर सत्ता पक्ष के ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों ने अपनी असहजता जताई और अपनी ही सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किए।

बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन "भूमिहार" और "भूमिहार ब्राह्मण" शब्द के इस्तेमाल को लेकर सदन के भीतर जोरदार राजनीतिक बहस देखने को मिली। यह पूरा विवाद सरकारी दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और जाति प्रमाण पत्रों में इस्तेमाल की जाने वाली आधिकारिक शब्दावली को लेकर खड़ा हुआ। बिहार सरकार ने विधानसभा में पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के सभी सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक जाति प्रमाण पत्रों में केवल "भूमिहार" ही दर्ज किया जाएगा, "भूमिहार ब्राह्मण" शब्द का प्रयोग नहीं किया जाएगा। सरकार के इस रुख पर सत्ता पक्ष के ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों ने अपनी असहजता जताई और अपनी ही सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किए।

सरकार का रुख: आधिकारिक दस्तावेजों में सिर्फ 'भूमिहार' ही रहेगा दर्ज

सदन में बहस के दौरान सरकार की तरफ से आधिकारिक जवाब देते हुए राज्य के डिप्टी सीएम एवं सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने साफ कहा कि बिहार सरकार सरकारी रिकॉर्ड में "भूमिहार ब्राह्मण" लिखने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर सामाजिक संगठनों की ओर से मांग पत्र मिलने के बाद विषय को समीक्षा के लिए उच्च जाति आयोग के पास भेजा गया था।

उच्च जाति आयोग ने अपनी बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की और सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वर्तमान में लागू व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, सवर्ण वर्ग में ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ को अलग-अलग जातियों के रूप में वर्गीकृत और दर्ज किया गया है। मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन को अवगत कराया कि सरकारी रिकॉर्ड में "भूमिहार ब्राह्मण" जैसे शब्दों का उपयोग करने से प्रशासनिक स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए भविष्य में भी आधिकारिक दस्तावेजों में केवल "भूमिहार" शब्द का ही प्रयोग किया जाएगा और जहां आवश्यक होगा, वहां रिकॉर्ड को इसी आधार पर सुधारा जाएगा।

बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए उठाया मुद्दा

दरभंगा जिले के जाले विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक जीवेश कुमार उर्फ जीवेश मिश्रा ने इस मुद्दे को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सदन के पटल पर रखा। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब पुराने सरकारी रिकॉर्ड, राजपत्र (गजट) और राजस्व विभाग के दस्तावेजों में "भूमिहार ब्राह्मण" दर्ज रहा है, तो अब इसे बदलकर केवल "भूमिहार" क्यों किया जा रहा है?

बिहार विधानसभा में 'भूमिहार' पर घमासान, सरकार ने सुनाया बड़ा फैसला

बीजेपी विधायक ने सदन में दावा किया कि वर्ष 1931 की जनगणना और पुराने राजस्व विभाग के कई रिकॉर्ड में "भूमिहार ब्राह्मण" नाम दर्ज है। उन्होंने बताया कि सामाजिक संगठनों द्वारा इससे संबंधित दस्तावेज पहले ही सरकार को सौंपे जा चुके हैं और इस विषय पर दोबारा विचार करने की मांग की गई है। विधायक ने तर्क दिया कि पुराने और नए दस्तावेजों में नाम का अंतर आने के कारण आम लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने और अन्य सरकारी कार्यों को पूरा कराने में व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, सरकार का जवाब आने के बाद भी जीवेश मिश्रा असंतुष्ट नजर आए और पुराने दस्तावेज दिखाते हुए फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

विधायक विशाल प्रशांत की मांग: भूमिहार समाज को एससी दर्जा देने पर हो विचार

इस बहस के दौरान भारतीय जनता पार्टी के एक अन्य विधायक विशाल प्रशांत ने एक अलग मांग सदन में रखी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार दस्तावेजों में "भूमिहार ब्राह्मण" नाम स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है, तो भूमिहार समाज को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने पर विचार किया जाना चाहिए।

विधायक विशाल प्रशांत का कहना था कि इस समाज का एक बड़ा वर्ग वर्तमान में गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसलिए केवल औपचारिक उत्तर देने के बजाय इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए गंभीर चर्चा की जानी चाहिए। सदन में अपनी बात रखने के बाद उन्होंने अपनी इस मांग को सोशल मीडिया पर भी साझा किया।

सदन का घटनाक्रम और वर्तमान स्थिति

बिहार विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। बिहार सरकार ने अपने निर्णय के तहत यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि आधिकारिक अभिलेखों और प्रमाण पत्रों में केवल "भूमिहार" शब्द ही मान्य रहेगा। उच्च जाति आयोग के फैसले के आलोक में सरकार अपने रुख पर कायम है, जबकि बीजेपी विधायकों द्वारा इस फैसले पर असंतोष व्यक्त करते हुए रिकॉर्ड की समीक्षा करने की मांग उठाई जा रही है।

बिहार विधानसभा में 'भूमिहार' पर घमासान, सरकार ने सुनाया बड़ा फैसला

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