बांकीपुर उपचुनाव संपन्न होने के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर चुनाव के दौरान पुलिस और जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए।
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि चुनाव के दिन उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में लिया गया। उन्होंने पटना के एसएसपी पर सीधे तौर पर भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप मढ़ा। हालांकि, इन सभी गंभीर आरोपों पर प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतजार किया जा रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर उठाए गए सवाल
स्थानीय नागरिकों ने साझा किए अपने अनुभव
पटना में जन सुराज कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव के दौरान हुई कथित अनियमितताओं के तमाम सबूत चुनाव आयोग को सौंप दिए हैं। उन्होंने मीडिया के सामने कुछ दस्तावेज भी रखे। प्रशांत किशोर ने पटना एसएसपी के उस बयान का खंडन किया जिसमें कहा गया था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल बाहर से आए लोगों को हिरासत में लिया गया था।

उनका दावा था कि जिन लोगों को पकड़ा गया, वे असल में पटना के ही स्थानीय निवासी थे। पुलिस कई लोगों के घरों में देर रात पहुंची और उन्हें थाने उठा लाई। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ स्थानीय लोगों ने भी अपनी आपबीती साझा की:
- नवल किशोर गुप्ता (मंदिरी वार्ड-26): उनका दावा है कि रात में पुलिस उनके घर पहुंची, बिना कारण साथ ले गई, दिनभर घुमाया और शाम करीब पांच बजे वोट डलवाने के बाद छोड़ा गया।
- निभा भूषण (वार्ड-22): उनका कहना था कि वह केवल लोगों को मतदान के लिए प्रेरित कर रही थीं, लेकिन उनके घर के बाहर पुलिस बुलाई गई और अनुचित तरीके से प्रवेश किया गया।
- सुनील चंद्रवंशी (वार्ड-38): उन्होंने दावा किया कि पुलिस उन्हें तीन बार पकड़ने घर पहुंची, पहले इधर-उधर घुमाया और फिर थाने ले गई।
प्रशांत किशोर ने सवाल किया कि यदि कार्रवाई बाहरी लोगों के खिलाफ थी, तो स्थानीय लोगों को क्यों पकड़ा गया। उन्होंने यह भी पूछा कि जन सुराज के 54 लोगों को हिरासत में लिया गया, लेकिन भाजपा के कितने लोगों पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान प्रशासन ने निष्पक्षता नहीं बरती और कार्यकर्ताओं के साथ गलत व्यवहार किया गया।
प्रशांत किशोर के मुताबिक, उन्होंने चुनाव आयोग से शिकायत की थी और आयोग ने मतगणना के दौरान निष्पक्ष व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया है। उन्होंने उन 18 स्थानीय लोगों की सूची भी सार्वजनिक की जिन्हें उनके अनुसार पुलिस ने हिरासत में लिया था। प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाए गए थे।





