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राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के अपमान पर होगी 3 साल की जेल

By | Published: 19 Jul 2026, 08:39 PM
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राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के अपमान पर होगी 3 साल की जेल
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मुख्य बातें

  • संसद के मॉनसून सत्र में पेश होगा ऐतिहासिक 'वंदे मातरम बिल' संसद के चल रहे मॉनसून सत्र के दौरान एक बड़ा विधायी कदम उठाया जाने वाला है।
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में 'वंदे मातरम बिल' पेश करेंगे।
  • इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को वही कानूनी सुरक्षा और सम्मान प्रदान करना है, जो वर्तमान में हमारे राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' को प्राप...
  • इस नए विधेयक के कानून बनने के बाद, राष्ट्रीय गीत का अपमान करना या इसके गायन में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ जाएगा।

संसद के मॉनसून सत्र में पेश होगा ऐतिहासिक 'वंदे मातरम बिल'

संसद के चल रहे मॉनसून सत्र के दौरान एक बड़ा विधायी कदम उठाया जाने वाला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में 'वंदे मातरम बिल' पेश करेंगे। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को वही कानूनी सुरक्षा और सम्मान प्रदान करना है, जो वर्तमान में हमारे राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' को प्राप्त है। इस नए विधेयक के कानून बनने के बाद, राष्ट्रीय गीत का अपमान करना या इसके गायन में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ जाएगा।

प्रस्तावित कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान

इस नए कानून के मसौदे में राष्ट्रीय गीत के सम्मान को अक्षुण्ण रखने के लिए कड़े दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। प्रस्तावित कानून के तहत, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का अपमान करता है, इसे गाने से रोकता है या इसके गायन में किसी भी प्रकार की रुकावट पैदा करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा, दोषी व्यक्ति पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, या फिर जेल और जुर्माना दोनों की सजा एक साथ दी जा सकती है।


राष्ट्रीय गान के समान मिलेगी कानूनी सुरक्षा

वर्तमान कानूनी व्यवस्था के अनुसार, 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम' (Prevention of Insults to National Honour Act) के तहत केवल राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' को ही विशेष कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय गान का सम्मान करना अनिवार्य है, जिसमें इसे गाते समय खड़े होना और इसके अपमान या रुकावट डालने वाले कृत्यों पर रोक शामिल है।

प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को भी इसी कानूनी दायरे में लाना चाहती है। अब तक राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता प्राप्त होने के बावजूद वंदे मातरम को वैसी कानूनी सुरक्षा हासिल नहीं थी जैसी राष्ट्रीय गान को मिली हुई है। इस बिल के संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद, वंदे मातरम का अपमान करना एक क्रिमिनल ऑफेंस (आपराधिक कृत्य) बन जाएगा। इससे राष्ट्रीय गीत भी उसी कानूनी सुरक्षा चक्र में शामिल हो जाएगा जो राष्ट्रीय गान, राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय संविधान की रक्षा करता है।


विधेयक के मुख्य बिंदु और कड़े नियम

प्रस्तावित कानून के तहत निम्नलिखित गतिविधियों को दंडनीय अपराध माना जाएगा:

  • गायन में बाधा डालना: यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को गाने से रोकता है या इसमें किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न करता है।
  • सभा में व्यवधान: यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत के गायन में लगी किसी भी भीड़ या सभा में जानबूझकर रुकावट डालता है।
  • अपमानजनक कृत्य: राष्ट्रीय गीत के प्रति किसी भी प्रकार का जानबूझकर किया गया अपमानजनक व्यवहार।

इन सभी मामलों में दोषी पाए जाने पर आरोपी को अधिकतम तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों भुगतने होंगे। वर्तमान में यही नियम राष्ट्रीय गान के लिए भी लागू हैं, जिन्हें अब राष्ट्रीय गीत पर भी समान रूप से लागू करने का प्रस्ताव है।

गृह मंत्रालय का हालिया निर्देश और पृष्ठभूमि

इस विधायी बदलाव की पृष्ठभूमि में केंद्रीय गृह मंत्रालय का एक हालिया महत्वपूर्ण निर्देश भी शामिल है। गृह मंत्रालय ने गत 9 जुलाई को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक विशेष निर्देश जारी किया था। इस निर्देश में कहा गया था कि सभी सरकारी कार्यक्रमों और कार्यों के दौरान जब भी राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' गाया जाए, तो उससे ठीक पहले राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' बजाया जाना चाहिए।

गृह मंत्रालय के इसी कदम को आगे बढ़ाते हुए अब इस कानूनी संशोधन को संसद के पटल पर रखा जा रहा है। संसद के वर्तमान मॉनसून सत्र में इस प्रस्तावित विधेयक पर विस्तृत चर्चा होने की पूरी उम्मीद है। यदि यह विधेयक दोनों सदनों से पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो यह देश के राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान की सुरक्षा की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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