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फ्लैट खरीदारों को मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

By | Published: 06 Jul 2026, 04:33 PM
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फ्लैट खरीदारों को मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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मुख्य बातें

  • Explained: देशभर के लाखों फ्लैट खरीदारों के लिए एक बड़ी खबर है।
  • Supreme Court ने फ्लैट खरीदने वालों को मुआवजा देने का ऐलान किया है।अपने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि अगर बिल्डर तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देता, तो खरीदार को ...
  • सबसे बड़ी बात यह है कि केवल फ्लैट का कब्जा मिल जाने से खरीदार का अधिकार खत्म नहीं हो जाता।यह फैसला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी.
  • कोर्ट ने National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) के उस पुराने फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अगर खरीदार को फ्लैट का कब्जा मिल चुका है, तो ...

Explained: देशभर के लाखों फ्लैट खरीदारों के लिए एक बड़ी खबर है। Supreme Court ने फ्लैट खरीदने वालों को मुआवजा देने का ऐलान किया है।अपने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि अगर बिल्डर तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देता, तो खरीदार को बाद में भी मुआवजा पाने का अधिकार रहेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि केवल फ्लैट का कब्जा मिल जाने से खरीदार का अधिकार खत्म नहीं हो जाता।


यह फैसला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) के उस पुराने फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अगर खरीदार को फ्लैट का कब्जा मिल चुका है, तो वह अब उपभोक्ता नहीं माना जाएगा और देरी के लिए मुआवजा नहीं मांग सकता। 


यह मामला दिल्ली-एनसीआर के द्वारका क्षेत्र में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। साल 2005 में एक फ्लैट खरीदार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे बिल्डर ने तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया। कई सालों की देरी के बाद आखिरकार उसे फ्लैट मिल गया, लेकिन तब तक वह मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान और भी कई परेशानियों का सामना कर चुका था।


नीचे की उपभोक्ता अदालतों ने यह कहकर उसकी शिकायत खारिज कर दी थी कि अब जब उसे फ्लैट मिल चुका है, तो वह उपभोक्ता नहीं रहा और मुआवजे का दावा नहीं कर सकता। इसी फैसले को चुनौती दी गई थी।और अब सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को गलत बताया। अदालत ने कहा कि अगर किसी खरीदार को समय पर सेवा नहीं मिली, तो उसका अधिकार सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो सकता क्योंकि बाद में सेवा दे दी गई। कोर्ट ने साफ किया कि देरी से हुआ नुकसान अलग मुद्दा है और उसके लिए मुआवजा मिलना चाहिए।


कोर्ट ने यह भी कहा कि फ्लैट का कब्जा मिलना और देरी के कारण मुआवजा पाना दो अलग-अलग बातें हैं। इसलिए दोनों को एक साथ जोड़ा नहीं जा सकता।इस मामले में एक और महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि बिल्डर और खरीदार के बीच समझौते में अक्सर आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) क्लॉज होता है। बिलकुल स्पष्ट करते हुए Supreme Court of India ने कहा कि सिर्फ आर्बिट्रेशन क्लॉज के होने से उपभोक्ता अदालत का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस जिला उपभोक्ता आयोग को भेज दिया है। उसे एक साल के भीतर इस मामले का निपटारा करने को कहा गया है। 

आयोग अब यह जांच करेगा कि क्या फ्लैट देने में सच में देरी हुई थी?देरी के लिए जिम्मेदार कौन था, बिल्डर या कोई और कारण?क्या खरीदार ने बिना शर्त कब्जा स्वीकार किया था? और क्या उसे मुआवजा मिलना चाहिए?


इन सभी जांच के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। यह फैसला देश के लाखों फ्लैट खरीदारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि बिल्डर प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं करते और खरीदार सालों तक परेशान रहते हैं। कई बार कब्जा मिलने के बाद लोग मुआवजे की उम्मीद छोड़ देते हैं। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद स्थिति बदल जाएगी। अब कोई भी खरीदार, जिसे देरी से फ्लैट मिला है, वह मुआवजे के लिए उपभोक्ता आयोग में जा सकता है।



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