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डॉक्टर पर आया था Prashant Kishor का दिल,पत्नी जाह्नवी दास की अनसुनी कहानी

By | Published: 06 Aug 2026, 02:20 PM
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डॉक्टर पर आया था Prashant Kishor का दिल,पत्नी जाह्नवी दास की अनसुनी कहानी
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मुख्य बातें

  • बिहार की राजनीति में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की पहचान एक बेहतरीन चुनावी रणनीतिकार और नेता के तौर पर है।
  • लेकिन इन दिनों उनकी जीत जितनी चर्चा में है, उतनी ही चर्चा उनकी पत्नी डॉ.
  • लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वह कौन हैं, कहां की रहने वाली हैं और कैसे उनकी मुलाकात प्रशांत किशोर से हुई।
  • इस रिपोर्ट में आपको बताएँगे दोस्ती,प्यार और शादी से राजनीत तक की PK की अनसुनी कहानी हर सफल इंसान की कहानी के पीछे अक्सर एक ऐसा साथी होता है, जो खुद सुर्खियों से दूर रह...

बिहार की राजनीति में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की पहचान एक बेहतरीन चुनावी रणनीतिकार और नेता के तौर पर है। लेकिन इन दिनों उनकी जीत जितनी चर्चा में है, उतनी ही चर्चा उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास की भी हो रही है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वह कौन हैं, कहां की रहने वाली हैं और कैसे उनकी मुलाकात प्रशांत किशोर से हुई। इस रिपोर्ट में आपको बताएँगे दोस्ती,प्यार और शादी से राजनीत तक की PK की अनसुनी कहानी 

हर सफल इंसान की कहानी के पीछे अक्सर एक ऐसा साथी होता है, जो खुद सुर्खियों से दूर रहकर भी उसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। बिहार की राजनीति में तेजी से उभरे प्रशांत किशोर की जिंदगी में भी एक ऐसा ही नाम है..डॉ. जाह्नवी दास। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दोनों की पहली मुलाकात कहां हुई थी? कैसे एक प्रोफेशनल मुलाकात दोस्ती में बदली, फिर प्यार हुआ और आखिरकार दोनों शादी के बंधन में बंध गए? आखिर क्यों एक सफल डॉक्टर ने अपने करियर से दूरी बना ली? 

डॉ. जाह्नवी दास मूल रूप से असम के गुवाहाटी की रहने वाली हैं। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। वह सार्वजनिक स्वास्थ्य यानी पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र में लंबे समय तक काम करती रहीं और राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य परियोजनाओं से भी जुड़ी रहीं। बताया जाता है कि उन्होंने दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भी अपनी सेवाएं दीं। हालांकि, उन्होंने हमेशा अपनी निजी जिंदगी को मीडिया और लाइमलाइट से दूर रखा।


अब बात करते हैं उस मुलाकात की जिसने दोनों की जिंदगी बदल दी। दिलचस्प बात यह है कि प्रशांत किशोर और डॉ. जाह्नवी दास की पहली मुलाकात किसी राजनीतिक मंच या चुनावी कार्यक्रम में नहीं हुई थी। दोनों की मुलाकात संयुक्त राष्ट्र यानी यूनाइटेड नेशंस के एक स्वास्थ्य कार्यक्रम के दौरान हुई थी। उस समय दोनों पब्लिक हेल्थ से जुड़े एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। बहुत कम लोग जानते हैं कि राजनीति में आने से पहले प्रशांत किशोर करीब आठ साल तक संयुक्त राष्ट्र से जुड़े स्वास्थ्य कार्यक्रमों में काम कर चुके हैं। इसी दौरान उनकी मुलाकात डॉ. जाह्नवी दास से हुई। साथ काम करते-करते दोनों के बीच बातचीत बढ़ी, फिर दोस्ती हुई और यही दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। कुछ समय बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया और हमेशा के लिए एक-दूसरे का साथ निभाने की कसम खा ली।

शादी के बाद डॉ. जाह्नवी दास ने अपने परिवार को प्राथमिकता देने का फैसला किया। कहा जाता है कि उन्होंने अपनी मेडिकल प्रैक्टिस से दूरी बना ली ताकि परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से संभाल सकें। यही वजह है कि वह हमेशा सार्वजनिक जीवन और राजनीति से दूर रहीं। प्रशांत किशोर भी कई मौकों पर अपनी पत्नी के योगदान का खुलकर जिक्र कर चुके हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से कहा है कि अगर उनकी पत्नी परिवार की जिम्मेदारी नहीं संभालतीं, तो शायद वह बिहार में लगातार पदयात्रा और राजनीतिक अभियान नहीं चला पाते। उनके मुताबिक, डॉ. जाह्नवी ने अपने सपनों से ज्यादा परिवार को महत्व दिया, जिससे उन्हें लोगों के बीच रहकर काम करने का अवसर मिला।


लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहने वाली डॉ. जाह्नवी दास पहली बार अगस्त 2024 में पटना में आयोजित 'जन सुराज महिला संवाद' कार्यक्रम में सार्वजनिक मंच पर नजर आईं। इसी कार्यक्रम में प्रशांत किशोर ने पहली बार उन्हें लोगों से औपचारिक रूप से मिलवाया। उस दौरान उन्होंने कहा था कि आज वह जो कुछ भी कर पा रहे हैं, उसमें उनकी पत्नी का सबसे बड़ा योगदान है। हाल ही में बांकीपुर विधानसभा सीट से प्रशांत किशोर की जीत के बाद एक बार फिर डॉ. जाह्नवी चर्चा में आ गईं। चुनावी हलफनामे में उनकी 111 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का उल्लेख भी सामने आया, जिसके बाद लोगों की जिज्ञासा और बढ़ गई।

हालांकि, राजनीति में इतनी चर्चा होने के बावजूद डॉ. जाह्नवी दास ने साफ कर दिया है कि उनकी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की कोई इच्छा नहीं है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि राजनीतिक काम के लिए प्रशांत किशोर के पास एक मजबूत टीम है और वह निजी जीवन में उनका जितना संभव हो सके, उतना साथ देती रहेंगी।


यही वजह है कि भले ही डॉ. जाह्नवी दास राजनीति में सक्रिय न हों, लेकिन प्रशांत किशोर के करीबी लोग उन्हें उनकी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। पर्दे के पीछे रहकर परिवार की जिम्मेदारी संभालना और हर कठिन दौर में अपने पति का साथ देना, यही उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है। कुल मिलाकर, प्रशांत किशोर और डॉ. जाह्नवी दास की कहानी सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि भरोसे, समझदारी और आपसी सहयोग की मिसाल भी है। संयुक्त राष्ट्र के एक स्वास्थ्य कार्यक्रम में शुरू हुई दोस्ती आज एक मजबूत वैवाहिक रिश्ते में बदल चुकी है और यही रिश्ता प्रशांत किशोर के राजनीतिक सफर की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

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