दरभंगा (खबर डोज़ ब्यूरो)। बिहार की राजनीति में एक नए और अनोखे राजनीतिक घटनाक्रम के तहत कॉकरोच जनता पार्टी की अधिकारिक एंट्री हो गई है। दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है, जब पूर्व वार्ड पार्षद सह पूर्व मेयर पति मो. शिवगतुल्लाह उर्फ डब्बू खान ने मंगलवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस दौरान वे अपने समर्थकों और गाड़ियों के बड़े काफिले के साथ 'कॉकरोच' का सिंबल लेकर नामांकन स्थल पहुंचे, जिससे स्थानीय राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा छिड़ गई। डब्बू खान ने इस चुनाव में छात्र, नौजवानों और शिक्षकों की ज्वलंत समस्याओं को अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने का ऐलान किया है।

बदलाव की बयार और शिक्षा-रोजगार पर जोर
नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए डब्बू खान ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब क्षेत्र में बदलाव का समय आ चुका है। स्नातक मतदाताओं से जुड़े तमाम गंभीर मुद्दों को विधान परिषद और सार्वजनिक मंचों पर प्रमुखता से उठाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को दूर करने, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने और छात्र-शिक्षक हित से जुड़े सवालों को लेकर सीधे घर-घर जाकर मतदाताओं से संवाद स्थापित करेंगे। उनके इस जनसंपर्क अभियान से पारंपरिक राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

कॉकरोच सिंबल और वैचारिक पृष्ठभूमि
'कॉकरोच जनता पार्टी' के अनूठे नाम और सिंबल के बारे में पूछे जाने पर डब्बू खान ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि एक समय कॉकरोच आंदोलन के बाद देश की सत्ता तक हिल गई थी और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने आगे कहा कि आज देश का जो सामाजिक-आर्थिक माहौल है, उसमें हर वह युवा, छात्र और नौजवान जो बेरोजगार है, वह किसी न किसी रूप में कॉकरोच की तरह कड़ा संघर्ष कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भले ही अभी एक औपचारिक पंजीकृत दल न हो, लेकिन यह ज़मीन पर उतर चुकी एक मजबूत वैचारिक और जनसंघर्ष की धारा बन चुकी है।
त्रिकोणीय हुआ मुकाबला
डब्बू खान के मैदान में उतरने और नामांकन दाखिल करने के साथ ही दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनावी मुकाबला अब और भी अधिक दिलचस्प तथा त्रिकोणीय हो गया है। क्षेत्र में पहले से सक्रिय विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों और अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच इस नए समीकरण से मुकाबला कड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार अभियान के और अधिक तेज होने और सभी प्रत्याशियों द्वारा अपनी पूरी ताकत झोंकने की पूरी संभावना जताई जा रही है।





