
पटना के IGIMS में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पांच नई स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं से नाराज बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन सीधे मंत्री के सामने अपनी शिकायतें लेकर पहुंच गए।
जैसे ही स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल परिसर में पहुंचे, कई मरीजों ने उन्हें घेर लिया और इलाज में हो रही देरी तथा अस्पताल में दलालों के सक्रिय होने का आरोप लगाया। मरीजों की शिकायत थी कि लंबी कतारों के कारण गंभीर हालत में भी समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। एक मरीज ने भावुक होकर कहा कि व्यवस्था इतनी खराब है कि मरीज लाइन में लगते-लगते ही दम तोड़ देगा। एक अन्य मरीज ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मेडिकल स्टोर में दवा होने के बावजूद बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर किए जाने का आरोप लगाया।
IGIMS में मरीजों की व्यथा और गंभीर आरोप
दौरे के दौरान एक युवक स्वास्थ्य मंत्री के सामने रो पड़ा और आरोप लगाया कि समय पर उसकी मां का ब्लड प्रेशर न जांचे जाने के कारण उनकी मौत हो गई। वहीं एक अन्य महिला, जो दोनों खराब किडनी के साथ लंबे समय से ऑपरेशन का इंतजार कर रही थी, उसने हाथ जोड़कर अपना इलाज कराने की गुहार लगाई। महिला की स्थिति देखने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने मौके पर मौजूद डॉक्टरों और अधिकारियों को तुरंत उसके

स्वास्थ्य मंत्री द्वारा शुरू की गई नई सुविधाएं
ओपीडी के निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अस्पताल में पांच नई स्वास्थ्य सुविधाओं की शुरुआत की जानकारी दी। इन नई व्यवस्थाओं के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- बिहार में पहली बार HIV, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित मरीजों के लिए अलग डायलिसिस सुविधा शुरू की गई है।
- अस्पताल में ओपीडी कमांड सेंटर की शुरुआत की गई है जिससे मरीज इलाज, जांच, भर्ती और आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकेंगे।
- अस्पताल में 20 नई डायलिसिस यूनिट शुरू की गई हैं ताकि अधिक मरीजों को लाभ मिल सके।
- गंभीर मरीजों के इलाज और जटिल ऑपरेशन के लिए नए मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और आधुनिक क्रिटिकल केयर ICU की शुरुआत की गई है।
मंत्री ने दावा किया कि इन सुविधाओं से मरीजों को पहले से बेहतर इलाज मिलेगा और ओपीडी कमांड सेंटर से दलालों की भूमिका कम होगी। हालांकि उद्घाटन के दौरान सामने आई मरीजों की शिकायतों ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल आधुनिक मशीनों और योजनाओं से परे अस्पताल की जमीनी व्यवस्था, समय पर इलाज और दवाओं की उपलब्धता में सुधार करना आवश्यक है।





