पटना के IGIMS में आज एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने अस्पताल की जमीनी हकीकत को सबके सामने ला दिया। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार यहां अस्पताल में शुरू की गई पांच नई स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन करने पहुंचे थे। लेकिन उद्घाटन कार्यक्रम से ज्यादा चर्चा उस समय शुरू हो गई, जब बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन सीधे स्वास्थ्य मंत्री के पास पहुंच गए और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर अपनी शिकायतें सामने रखने लगे।
जैसे ही स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल परिसर में पहुंचे, कई मरीजों ने उन्हें घेर लिया। किसी ने इलाज में हो रही देरी की शिकायत की, तो किसी ने अस्पताल में दलालों के सक्रिय होने का आरोप लगाया। मरीजों का कहना था कि अस्पताल में इलाज कराने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगानी पड़ती हैं और कई बार मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
एक मरीज ने भावुक होकर कहा, "सर, यहां की व्यवस्था इतनी खराब है कि मरीज लाइन में लगते-लगते ही मर जाएगा, इलाज बाद में होगा।" वहीं एक अन्य मरीज ने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना लागू होने के बावजूद अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर दवाइयां उपलब्ध होने के बाद भी मरीजों को बाहर की दुकानों से दवा खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। मरीजों ने इसे अस्पताल में दलाली की व्यवस्था से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की।

इस दौरान सबसे भावुक पल तब आया, जब एक युवक स्वास्थ्य मंत्री के सामने रो पड़ा। उसने आरोप लगाया कि उसकी मां का समय पर ब्लड प्रेशर तक नहीं जांचा गया, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई। युवक ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। वहां मौजूद लोग भी उसकी बात सुनकर भावुक हो गए।
इसी बीच एक महिला भी रोते हुए स्वास्थ्य मंत्री के पास पहुंची। उसने बताया कि उसकी दोनों किडनी खराब हैं और काफी समय से ऑपरेशन का इंतजार कर रही है। महिला ने हाथ जोड़कर कहा, "सर, आप लोग तो चले जाते हैं, लेकिन बाद में कोई हमारी सुनवाई नहीं करता। मेरा इलाज करवा दीजिए।" महिला की बात सुनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने मौके पर मौजूद डॉक्टरों और अधिकारियों को तुरंत उसके इलाज की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।

उद्घाटन कार्यक्रम के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल की ओपीडी का भी निरीक्षण किया और मरीजों से सीधे बातचीत की। कुछ मरीजों ने इलाज और डॉक्टरों के व्यवहार को संतोषजनक बताया, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने लंबी लाइन, भीड़ और अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि IGIMS में पांच नई स्वास्थ्य सुविधाओं की शुरुआत की गई है, जिससे मरीजों को पहले से बेहतर इलाज मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि पहली बार HIV, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित मरीजों के लिए अलग डायलिसिस सुविधा शुरू की गई है। उनका दावा है कि बिहार में यह अपनी तरह की पहली व्यवस्था है और आने वाले समय में इसे दूसरे सरकारी अस्पतालों तक भी विस्तारित किया जाएगा।
इसके साथ ही अस्पताल में OPD कमांड सेंटर की भी शुरुआत की गई है। इस सेंटर के जरिए मरीज इलाज, जांच, भर्ती, आयुष्मान भारत योजना और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे अस्पतालों में दलालों की भूमिका कम होगी और मरीजों की समस्याओं का तेजी से समाधान हो सकेगा।
अस्पताल में 20 नई डायलिसिस यूनिट भी शुरू की गई हैं, जिससे पहले की तुलना में अधिक मरीजों का डायलिसिस किया जा सकेगा। इसके अलावा नए मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और आधुनिक क्रिटिकल केयर ICU की शुरुआत से गंभीर मरीजों के इलाज और जटिल ऑपरेशन की क्षमता में भी बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। हालांकि, नई सुविधाओं की शुरुआत के बीच मरीजों की शिकायतों ने यह साफ कर दिया कि केवल आधुनिक मशीनें और नई योजनाएं शुरू करना ही पर्याप्त नहीं है। अगर अस्पताल की व्यवस्था, समय पर इलाज, दवाओं की उपलब्धता और मरीजों की सुनवाई में सुधार नहीं हुआ, तो स्वास्थ्य सेवाओं पर उठ रहे सवाल लगातार बने रहेंगे। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य मंत्री के इस दौरे के बाद IGIMS की व्यवस्थाओं में वास्तव में कितना बदलाव आता है।





