Breaking
Entertainment

Happy Birthday Amitabh Bachchan: शून्य से शिखर तक का सफर, जानिए 'मेगास्टार' बच्चन साहब के अनसुने राज़

| Published: | Updated:
Happy Birthday Amitabh Bachchan: शून्य से शिखर तक का सफर, जानिए 'मेगास्टार' बच्चन साहब के अनसुने राज़
Share:

मुख्य बातें

  • भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी किसी ऐसे अभिनेता का जिक्र होता है जिसने अपनी अनूठी शैली, दमदार अभिनय, भारी आवाज और अद्भुत शख्सियत से पर्दें पर अमिट छाप छोड़ी है, तो सबसे पहला नाम अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) का आता है।
  • उन्हें हिंदी सिनेमा का "शहंशाह", "मेगास्टार" और "Angry Young Man" कहा जाता है।
  • आज, 11 अक्टूबर, 2026 को अमिताभ बच्चन अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं।
  • उनके इस विशेष अवसर पर आइए उनके शुरुआती जीवन, संघर्षों, अनसुने किस्सों और भारतीय सिनेमा में उनके अद्वितीय योगदान पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

अमिताभ बच्चन का जीवन परिचय: 'शहंशाह' के अनसुने किस्से, संघर्ष और भारतीय सिनेमा का स्वर्णिम इतिहास

भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी किसी ऐसे अभिनेता का जिक्र होता है जिसने अपनी अनूठी शैली, दमदार अभिनय, भारी आवाज और अद्भुत शख्सियत से पर्दें पर अमिट छाप छोड़ी है, तो सबसे पहला नाम अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) का आता है। उन्हें हिंदी सिनेमा का "शहंशाह", "मेगास्टार" और "Angry Young Man" कहा जाता है।

आज, 11 अक्टूबर, 2026 को अमिताभ बच्चन अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके इस विशेष अवसर पर आइए उनके शुरुआती जीवन, संघर्षों, अनसुने किस्सों और भारतीय सिनेमा में उनके अद्वितीय योगदान पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

1. प्रारंभिक जीवन और परिवार: साहित्य की छाया में पले-बढ़े अमिताभ

अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था। उनके पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन थे, जो भारत के प्रख्यात और सम्मानित कवि तथा लेखक थे। उनकी प्रसिद्ध कृति 'मधुशाला' आज भी घर-घर में पढ़ी जाती है। हरिवंश राय बच्चन जी ने ही अपने परिवार का उपनाम 'श्रीवास्तव' बदलकर 'बच्चन' कर लिया था।

अमिताभ की माता का नाम तेजी बच्चन था, जो कराची (अब पाकिस्तान) की रहने वाली थीं। तेजी बच्चन जी का कला, संगीत और रंगमंच से गहरा नाता था। उनके इसी प्रभाव के कारण अमिताभ बच्चन के भीतर कला और अभिनय के प्रति रुचि बहुत कम उम्र में ही जागृत हो गई थी। उनके छोटे भाई का नाम अजिताभ बच्चन है।

शिक्षा और शुरुआती रुझान

अमिताभ बच्चन की प्रारंभिक स्कूली शिक्षा नैनीताल के प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज (Sherwood College) से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज (Kirori Mal College) से विज्ञान (साइंस) और कला (आर्ट्स) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। शिक्षा पूरी करने के बाद वे रोजगार की तलाश में कलकत्ता (अब कोलकाता) चले गए, जहां उन्होंने 'बर्ड एंड कंपनी' नाम की एक ब्रिटिश फर्म में एक्जीक्यूटिव के रूप में काम किया। वहां उन्हें ₹500 प्रति माह वेतन मिलता था। हालांकि, उनका मन हमेशा अभिनय की दुनिया में ही रमा हुआ था।

2. नाम का रहस्य: 'इंकलाब' से लेकर 'अमिताभ' तक

अमिताभ बच्चन के जीवन से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और कम चर्चित किस्सा उनके नाम से जुड़ा हुआ है। जब उनका जन्म हुआ था, तब देश में स्वतंत्रता संग्राम का दौर चल रहा था। उनके पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन उनका नाम 'इंकलाब' रखना चाहते थे, ताकि देश की आज़ादी की गूंज उनके नाम में भी झलके।

लेकिन, उनके एक पारिवारिक मित्र और महान कवि सुमित्रानंदन पंत जी ने सुझाव दिया कि उनका नाम 'अमिताभ' रखा जाना चाहिए। संस्कृत भाषा में 'अमिताभ' का अर्थ होता है — "वह प्रकाश जो कभी बुझ न सके" या जिसकी चमक कभी फीकी न पड़े। आगे चलकर उनके इस नाम और उनके व्यक्तित्व ने इस अर्थ को पूरी तरह सार्थक कर दिखाया।

3. फ़िल्मी करियर की शुरुआत और 'Angry Young Man' का उदय

अमिताभ बच्चन ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 1969 में ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म 'सात हिन्दुस्तानी' से की थी। इस फिल्म में उन्होंने अनवर अली नाम का एक देशभक्त किरदार निभाया था। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल नहीं कर पाई, लेकिन उनके अभिनय की सराहना जरूर हुई।

इसके बाद का दौर उनके लिए काफी संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने लगातार कई फिल्मों में काम किया, जिनमें से अधिकांश फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल (फ्लॉप) साबित हुईं। एक समय ऐसा भी आया जब फिल्म उद्योग के लोगों ने उन्हें 'अमिताभ बच्चन फ्लॉप एक्टर' का ठप्पा तक देना शुरू कर दिया था। इंडस्ट्री के कई निर्माताओं का मानना था कि उनकी लंबाई बहुत ज्यादा है और उनकी आवाज बहुत भारी है, इसलिए वे मुख्य नायक के रूप में फिट नहीं बैठते।

Happy Birthday Amitabh Bachchan: शून्य से शिखर तक का सफर, जानिए 'मेगास्टार' बच्चन साहब के अनसुने राज़

वह मोड़ जिसने इतिहास बदल दिया: फिल्म 'जंजीर' (1973)

वर्ष 1973 निर्देशक प्रकाश मेहरा के लिए और अमिताभ बच्चन के जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। फिल्म 'जंजीर' में उन्हें पुलिस इंस्पेक्टर 'विजय खन्ना' की भूमिका मिली। इस फिल्म में उनका शांत, गंभीर और व्यवस्था के खिलाफ अकेले खड़े रहने वाला गुस्सा लोगों के दिलों को छू गया।

इस फिल्म की सफलता ने अमिताभ बच्चन को रातों-रात भारतीय सिनेमा का "Angry Young Man" (क्रोधित युवा) बना दिया। उस दौर में भारत के युवाओं के मन में सिस्टम के प्रति जो आक्रोश था, वह अमिताभ के पर्दे पर किए गए अभिनय में साफ झलकता था।

4. स्वर्णिम युग और ऐतिहासिक फिल्में (1970 और 1980 का दशक)

'जंजीर' की सफलता के बाद अमिताभ बच्चन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 70 और 80 के दशक में उन्होंने हिंदी सिनेमा पर एकछत्र राज किया। उनकी फिल्मों को देखने के लिए सिनेमाघरों के बाहर लंबी कतारें लग जाती थीं।

  • शोले (1975): रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर मानी जाती है। इसमें अमिताभ बच्चन ने 'जय' का किरदार निभाया था और धर्मेंद्र के साथ उनकी दोस्ती (ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे) अमर हो गई।

  • दीवार (1975): यश चोपड़ा की इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन के 'Angry Young Man' के रुतबे को और मजबूत किया। उनका डॉयलॉग "आज मेरे पास बिल्डिंग है, प्रॉपर्टी है, बैंक बैलेंस है... तुम्हारे पास क्या है?" आज भी लोगों की जुबान पर है।

  • डॉन (1978): इस फिल्म में उन्होंने दोहरी भूमिका निभाई और साबित किया कि वे एक्शन और स्टाइल के भी बेताज बादशाह हैं।

  • अन्य सुपरहिट फिल्में: त्रिशूल, मुकद्दर का सिकंदर, काला पत्थर, लावारिस, अमर अकबर एन्थोनी, और सत्ते पे सत्ता जैसी फिल्मों ने उन्हें भारतीय दर्शकों का चहेता बना दिया।

5. आवाज़ का जादू और ऑल इंडिया रेडियो द्वारा खारिज़ किया जाना

आज दुनिया भर में अमिताभ बच्चन की भारी, गूँजती और रोबीली आवाज (Baritone Voice) को उनकी सबसे बड़ी पहचान माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि करियर की शुरुआत में इसी आवाज को ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio) ने खारिज कर दिया था?

जब अमिताभ बच्चन ने रेडियो जॉकी या अनाउन्सर बनने के लिए ऑडिशन दिया था, तो अधिकारियों ने उनकी आवाज को यह कहकर अस्वीकार कर दिया था कि यह बहुत भारी है और प्रसारण के लिए उपयुक्त नहीं है। बाद में, जब वे फिल्मों में आए, तो यही भारी आवाज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई। आज न केवल उनकी फिल्मों के संवाद, बल्कि उनकी आवाज में रिकॉर्ड की गई कविताएँ, महाकाव्य (जैसे 'मधुशाला') और विज्ञापन बहुत लोकप्रिय हैं।

Happy Birthday Amitabh Bachchan: शून्य से शिखर तक का सफर, जानिए 'मेगास्टार' बच्चन साहब के अनसुने राज़

6. फिल्म 'कुली' की शूटिंग के दौरान मौत के मुँह से वापसी

वर्ष 1982 में बेंगलुरु में फिल्म 'कुली' की शूटिंग चल रही थी। एक एक्शन सीक्वेंस के दौरान अभिनेता पुनीत इस्सर के साथ फाइट सीन करते वक्त अमिताभ बच्चन को पेट में गंभीर चोट लग गई थी। यह चोट इतनी खतरनाक थी कि उनके पेट की आंतें फट गई थीं।

उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां कई डॉक्टरों की टीम ने उनकी जान बचाने की कोशिश की। वे कई हफ्तों तक कोमा में रहे और देश भर में उनके ठीक होने के लिए महामृत्युंजय मंत्र और विशेष प्रार्थनाएं की गईं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी उनका हालचाल जानने अस्पताल पहुंची थीं। डॉक्टरों ने यहाँ तक घोषित कर दिया था कि वे चिकित्सकीय रूप से मृत (Clinically Dead) हो चुके थे, लेकिन उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और देशवासियों की दुआओं के कारण वे मौत को मात देकर वापस लौटे। इस घटना के बाद फिल्म 'कुली' रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की।

7. करियर का दूसरा दौर और 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC)

90 के दशक के मध्य में अमिताभ बच्चन के करियर में एक ऐसा समय आया जब उनकी कई फिल्में असफल रहीं और उन्होंने फिल्मों से कुछ समय के लिए दूरी बना ली। उन्होंने अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड (ABCL) नाम की एक कंपनी शुरू की, जिसे आर्थिक मोर्चे पर भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।

साल 2000: टीवी की दुनिया में कदम और KBC

वर्ष 2000 में अमिताभ बच्चन ने टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा और क्विज़ शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) की मेजबानी शुरू की। इस शो ने भारतीय टेलीविजन का इतिहास बदल दिया। अमिताभ बच्चन का दर्शकों से जुड़ने का अंदाज, उनका "देवियों और सज्जनों" कहना और कंटेस्टेंट्स के साथ दोस्ताना व्यवहार ने उन्हें घर-घर का चहेता बना दिया। इस शो ने उनके डूबते हुए करियर को एक नया जीवन दिया और उन्हें आधुनिक डिजिटल युग के दर्शकों से भी जोड़ दिया।

8. चरित्र अभिनेता के रूप में पुनर्जन्म (2000 के बाद का सिनेमा)

उम्र के बढ़ने के साथ अमिताभ बच्चन ने खुद को केवल पारंपरिक नायक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उम्र के अनुकूल ऐसे दमदार किरदार चुने जिन्होंने सभी को हैरान कर दिया।

  • मोहब्बतें (2000): इसमें उन्होंने सख्त मिजाज कॉलेज प्रिंसिपल 'नारायण शंकर' का रोल निभाया।

  • ब्लैक (2005): संजय लीला भंसाली की इस फिल्म में उन्होंने एक अंधे और बहरे बच्चे को पढ़ाने वाले शिक्षक (देबराज सहाय) की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

  • पा (2009): इस फिल्म में उन्होंने प्रोजेरिया (Progeria) नामक बीमारी से ग्रस्त एक 13 साल के बच्चे 'औरा' का किरदार निभाया, जबकि उनके वास्तविक जीवन के बेटे अभिषेक बच्चन ने उनके पिता की भूमिका निभाई। इस अनूठे प्रयोग के लिए उन्हें फिर से राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

  • पीकू (2015) और पिंक (2016): पीकू में एक बुजुर्ग और पेट की बीमारियों से परेशान पिता का किरदार हो, या pink में कोर्ट में खड़े होकर "No means No" का नारा देने वाले वकील का किरदार, उन्होंने साबित कर दिया कि वे अभिनय के मामले में आज भी युवाओं को टक्कर दे सकते हैं।

    Happy Birthday Amitabh Bachchan: शून्य से शिखर तक का सफर, जानिए 'मेगास्टार' बच्चन साहब के अनसुने राज़

9. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान

अमिताभ बच्चन के भारतीय सिनेमा और वैश्विक कला जगत में योगदान को देखते हुए भारत सरकार और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा उन्हें सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया है:

  • पद्म श्री (1984): भारत सरकार द्वारा कला क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया नागरिक सम्मान।

  • पद्म भूषण (2001): देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान।

  • पद्म विभुषण (2015): देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान।

  • दादा साहब फाल्के पुरस्कार (2018): भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार, जो उनके पूरे जीवन के योगदान के लिए दिया गया।

  • इसके अलावा फ्रांस सरकार द्वारा उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'नाइट ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर' (Knight of the Legion of Honour) से सम्मानित किया जा चुका है।

10. निष्कर्ष: एक युग जो कभी समाप्त नहीं होगा

अमिताभ बच्चन केवल एक अभिनेता का नाम नहीं है, बल्कि वह भारतीय सिनेमा की एक पूरी संस्था हैं। उनके जीवन का सफर हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो असफलता के बाद भी शून्य से उठकर शिखर पर पहुंचना चाहता है। उन्होंने अपने अनुशासन, कड़ी मेहनत, भाषा पर पकड़ और अभिनय के प्रति समर्पण से यह साबित कर दिया है कि उम्र केवल एक संख्या है, असली ताकत व्यक्ति का जनून और उनकी कला होती है।

आज, उनके 84वें जन्मदिन पर पूरा देश और दुनिया भर के करोड़ों प्रशंसक उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना कर रहे हैं। अमिताभ बच्चन का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि जब लगन सच्ची हो, तो इंसान समय और उम्र दोनों को हरा सकता है।

Happy Birthday Amitabh Bachchan: शून्य से शिखर तक का सफर, जानिए 'मेगास्टार' बच्चन साहब के अनसुने राज़

यह भी पढ़ें