बिहार राजस्व अमीन संघ के बैनर तले यह आंदोलन तेज हो रहा है। राज्य भर के अमीनों ने पहले 5 अक्टूबर को अपने-अपने जिलों में प्रदर्शन किया था और चेतावनी दी थी। सरकार की ओर से कोई ठोस पहल न होने पर 1200 से अधिक अमीन सोमवार 6 अक्टूबर से बेमियादी हड़ताल पर चले गए। संघ ने घोषणा की है कि 9 अक्टूबर से पटना के गर्दनीबाग में राज्यभर के अमीन धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे और सरकार पर दबाव बनाएंगे।
क्या हैं अमीनों की प्रमुख मांगें और विवाद की वजह?
आंदोलनकारी अमीनों का कहना है कि मार्च 2026 में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव के साथ हुई वार्ता में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी। इनमें वेतनमान बढ़ाकर पे लेवल 6 करने और नजदीकी जिलों में तबादला करने जैसे मुद्दे शामिल थे, लेकिन उस पर अब तक कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई। अमीनों का आरोप है कि विभाग ने तीन बार ट्रांसफर पोर्टल खोला, फिर भी तबादले नहीं किए गए, जिससे कई बीमार और दिव्यांग अमीन घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर तैनात हैं।

- वेतनमान बढ़ाकर पे लेवल 6 किया जाए।
- सेवाकाल के दौरान प्रमोशन का स्पष्ट प्रावधान हो।
- फील्ड वर्क के लिए यात्रा भत्ता और पेट्रोल खर्च दिया जाए।
- खाली पदों पर जल्द बहाली की जाए।
अमीनों का तर्क है कि उनका अधिकांश कार्य क्षेत्र यानी फील्ड वर्क से जुड़ा होता है। उन्हें अपने निजी संसाधनों से 50 से 100 किलोमीटर तक की यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन सरकार की तरफ से उन्हें कोई यात्रा भत्ता नहीं मिलता है। इसके अलावा, पूरे सेवाकाल में एक ही पद पर रहने के कारण उन्हें प्रमोशन के अवसर भी नहीं मिलते हैं।
विशेष अभियान और राजस्व कार्यों पर असर
वर्तमान में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से 31 अक्टूबर तक जमाबंदी शुद्धिकरण एवं उत्तराधिकार नामांतरण विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जमाबंदी में दर्ज त्रुटियों को सुधारा जा रहा है। सरकारी अमीनों के हड़ताल पर चले जाने से इस विशेष अभियान की गति धीमी पड़ गई है और जमीन के रिकॉर्ड दुरुस्त करने के विभागीय लक्ष्य को झटका लगा है। राजस्व विभाग के अगले निर्देशों और प्रशासनिक वार्ताओं पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।





