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भावना कंठ ने रचा इतिहास, 20 सप्ताह का कठिन फाइटर कॉम्बेट लीडर कोर्स पूरा कर बनीं पहली महिला ‘टॉप गन’

By | Published: 08 Aug 2026, 10:30 AM
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भावना कंठ ने रचा इतिहास, 20 सप्ताह का कठिन फाइटर कॉम्बेट लीडर कोर्स पूरा कर बनीं पहली महिला ‘टॉप गन’
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मुख्य बातें

  • बिहार के मिथिला की बेटी और भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है।
  • उन्होंने भारतीय वायुसेना का सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण फाइटर कॉम्बेट लीडर (एफसीएल) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
  • इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करने के साथ ही वह भारतीय वायुसेना की पहली महिला ‘टॉप गन’ बन गई हैं।
  • भावना कंठ की इस अभूतपूर्व सफलता से उनके परिवार सहित पूरे मिथिला क्षेत्र में खुशी की लहर है।

बिहार के मिथिला की बेटी और भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। उन्होंने भारतीय वायुसेना का सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण फाइटर कॉम्बेट लीडर (एफसीएल) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करने के साथ ही वह भारतीय वायुसेना की पहली महिला ‘टॉप गन’ बन गई हैं। भावना कंठ की इस अभूतपूर्व सफलता से उनके परिवार सहित पूरे मिथिला क्षेत्र में खुशी की लहर है। दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव में इस समय उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।


ग्वालियर के प्रतिष्ठित संस्थान में पूरी की ट्रेनिंग

भावना कंठ के पिता तेज नारायण ने इस गौरवशाली क्षण पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि फाइटर कॉम्बेट लीडर (एफसीएल) कोर्स मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बेट डेवलपमेंट स्टेब्लिशमेंट में संचालित किया जाता है। इस संस्थान को भारतीय वायुसेना का सबसे प्रतिष्ठित ‘टॉप गन’ प्रशिक्षण संस्थान माना जाता है। यह प्रशिक्षण बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण होता है, जो लगभग 20 सप्ताह तक चलता है। इस कोर्स की कठिन शर्तों और उच्च मानकों के कारण भारतीय वायुसेना के केवल लगभग एक प्रतिशत फाइटर पायलटों को ही इसमें शामिल होने के लिए चुना जाता है।

कठिन प्रशिक्षण और बढ़ी हुई जिम्मेदारियां

इस 20 सप्ताह के कड़े प्रशिक्षण के दौरान पायलटों को अत्याधुनिक हवाई युद्ध कौशल सिखाया जाता है। इसके साथ ही उन्हें सामरिक नेतृत्व, आधुनिक लड़ाकू अभियानों की विस्तृत योजना बनाने का प्रशिक्षण और जटिल युद्ध परिस्थितियों से कुशलतापूर्वक निपटने की रणनीतियों की तैयारी कराई जाती है। इस प्रतिष्ठित एफसीएल कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ की जिम्मेदारियां और अधिक बढ़ गई हैं। वह अब भविष्य में भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण लड़ाकू अभियानों का नेतृत्व करने के योग्य हो गई हैं।


पहले भी कई बार रच चुकी हैं इतिहास

स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ का करियर देश की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत रहा है और वह पहले भी कई बड़े कीर्तिमान अपने नाम कर चुकी हैं। साल 2016 में वह अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह के साथ भारतीय वायुसेना की पहली तीन महिला फाइटर पायलटों के बैच में शामिल हुई थीं। इसके बाद नवंबर 2017 में उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन जॉइन किया। मार्च 2018 में उन्होंने मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमान से अपनी पहली एकल उड़ान भरकर एक और नया इतिहास रचा था। साल 2021 में जब वह फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर थीं, तब गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय वायुसेना की झांकी और टुकड़ी का हिस्सा बनने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनी थीं।


बचपन से ही अनुशासित और मेधावी थीं भावना

बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए पिता तेज नारायण कंठ ने बताया कि उन्होंने भावना को कभी केवल एक लड़की के रूप में नहीं देखा, बल्कि हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह बचपन से ही बेहद मेधावी और अनुशासित थीं और अपने लक्ष्यों के प्रति हमेशा समर्पित रहीं। भावना की प्रारंभिक शिक्षा बेगूसराय के बरौनी में हुई थी। बचपन से ही उनका सपना आसमान की ऊंचाइयों को छूने का था, जिसे उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर सच कर दिखाया और भारतीय वायुसेना में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई।

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