Bankipur By-election: बिहार की सबसे चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने आखिरी समय में बड़ा फैसला लेकर सभी को चौंका दिया है। पहले पार्टी ने अभिषेक सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उनके नामांकन वापस लेने के कुछ ही मिनटों बाद बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को अपना नया उम्मीदवार घोषित कर दिया। आखिर कौन हैं नीरज कुमार सिन्हा? क्यों पार्टी ने उन पर भरोसा जताया? और इस चुनाव में उनके सामने क्या चुनौती होगी? इस रिपोर्ट में मिलेगा सबका जवाब।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव इस समय बिहार की सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली सीट बन चुकी है। सभी राजनीतिक दल इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। ऐसे में बीजेपी ने उम्मीदवार बदलकर चुनावी माहौल को और भी गरमा दिया है।
दरअसल, पार्टी ने पहले अभिषेक सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी को टिकट दिया था। लेकिन उन्होंने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई नामों की चर्चा शुरू हो गई। माना जा रहा था कि पार्टी किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतार सकती है, लेकिन बीजेपी ने संगठन में लंबे समय से काम कर रहे नीरज कुमार सिन्हा पर भरोसा जताया।

कौन है नीरज सिन्हा?
नीरज कुमार सिन्हा की उम्र करीब 32 साल है। वह लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने संगठन में कई जिम्मेदारियां निभाई हैं और पार्टी के कार्यक्रमों में लगातार एक्टिव भी रहे हैं। नीरज कुमार सिन्हा दो बार मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं। फिलहाल वह नरेंद्र भारती मंडल के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। यही वजह है कि पार्टी ने इस महत्वपूर्ण चुनाव में किसी बड़े राजनीतिक चेहरे की बजाय संगठन से जुड़े नेता को मौका दिया है।

नीरज सिन्हा का पारिवारिक रिश्ता राजनीति से है या नहीं?
नीरज कुमार सिन्हा का राजनीतिक सफर केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत तक सीमित नहीं है। उनका परिवार भी वर्षों से जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़ा रहा है। बताया जाता है कि उनके चाचा जनसंघ के समय से सक्रिय कार्यकर्ता थे और संगठन को मजबूत बनाने में उनकी अहम भूमिका रही थी।
उनके सम्मान में इलाके के पार्टी संगठन का नाम नरेंद्र भारती मंडल रखा गया। आज उसी मंडल का नेतृत्व नीरज कुमार सिन्हा कर रहे हैं। इससे साफ है कि उनका परिवार लंबे समय से संगठन के साथ जुड़ा रहा है और पार्टी में उनकी मजबूत पहचान रही है।

BJP ने क्यों बदला उम्मीदवार?
पॉलिटिकल एक्सपर्ट कह रहे हैं कि बीजेपी ने यह फैसला सोच-समझकर लिया है। पार्टी इस चुनाव में ऐसे उम्मीदवार को सामने लाना चाहती थी, जिसकी संगठन में मजबूत पकड़ हो और जो कार्यकर्ताओं को एकजुट रख सके। यही वजह है कि आखिरी समय में भी पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा पर भरोसा जताया। मगर प्रशांत किशोर भी क्या एक फैक्टर हो सकते हैं? इस सवाल का जवाब बीजेपी ने नजरअंदाज कर दिया।

नीरज सिन्हा की राह में बड़े-बड़े कांटे
नीरज सिन्हा के सामने चुनौती भी कम नहीं होगी। बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी की परंपरागत और प्रतिष्ठित सीट मानी जाती है। ऐसे में इस सीट को बचाए रखना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी। इस उपचुनाव में मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा का सामना राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा गुप्ता से होगा। वहीं, जनसुराज की ओर से प्रशांत किशोर भी चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में मुकाबला त्रिकोणीय है।
इस चुनाव में केवल उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि पार्टी का संगठन, चुनावी रणनीति और स्थानीय मुद्दे भी अहम भूमिका निभाएंगे। यही कारण है कि पूरे बिहार की नजर अब बांकीपुर विधानसभा सीट पर टिकी हुई है। सम्राट का रिपोर्ट कार्ड के तौर पर भी बांकीपुर उपचुनाव को देखा जा रहा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि संगठन से निकले युवा नेता नीरज कुमार सिन्हा बीजेपी के भरोसे पर कितना खरे उतरते हैं और क्या वह पार्टी की इस अहम सीट को बचाने में सफल हो पाते हैं या फिर विपक्ष कोई बड़ा उलटफेर करता है। फिलहाल, बांकीपुर का चुनाव अब और भी इंट्रेस्टिंग हो गया है। इस चुनाव का नतीजा सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं करेगा, बल्कि बिहार की राजनीति को उलट कर रख सकता है।





