Breaking
Education

सरकारी स्कूलों से 86 लाख छात्र गायब | UDISE Report में बड़ा खुलासा

By | Published: 10 Jul 2026, 02:37 PM
👁 56 views
सरकारी स्कूलों से 86 लाख छात्र गायब | UDISE Report में बड़ा खुलासा
Share:

मुख्य बातें

  • क्या आप जानते हैं कि पिछले सिर्फ दो साल में करीब 86 लाख छात्रों ने सरकारी स्कूल छोड़ दिए हैं।
  • क्या सरकारी स्कूलों पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है?
  • और बिहार,झारखंड और उत्तर प्रदेश जहां सबसे ज्यादा बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, वहां की क्या स्थिति है?
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की नई UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट में कई ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या आप जानते हैं कि पिछले सिर्फ दो साल में करीब 86 लाख छात्रों ने सरकारी स्कूल छोड़ दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? क्या सरकारी स्कूलों पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है? और बिहार,झारखंड और उत्तर प्रदेश जहां सबसे ज्यादा बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, वहां की क्या स्थिति है? केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की नई UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट में कई ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने UDISE+ यानी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस की नई रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट पूरे देश के स्कूलों से जुड़े आंकड़े जुटाती है। इसमें छात्रों के नामांकन, शिक्षकों की संख्या, स्कूलों की स्थिति और पढ़ाई से जुड़े कई अहम पहलुओं की जानकारी दी जाती है।


रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023-24 से लेकर 2025-26 के बीच सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। दो साल पहले सरकारी स्कूलों में करीब 12 करोड़ 75 लाख छात्र पढ़ रहे थे। अब यह संख्या घटकर 11 करोड़ 89 लाख रह गई है। यानी करीब 86 लाख छात्रों की कमी दर्ज की गई है।

वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट, यानी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों में छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ी है। यहां दो साल में 88 लाख से ज्यादा नए छात्रों का दाखिला हुआ है। कुल संख्या अब 9 करोड़ 89 लाख के करीब पहुंच गई है। यानि साफ है कि बड़ी संख्या में परिवार अब अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से निकालकर निजी स्कूलों में भेज रहे हैं।

बिहार जैसे राज्य का क्या हाल?

रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में आज भी 1 करोड़ 66 लाख से ज्यादा छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। यह देश में सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा नामांकन वाले राज्यों में से एक है। लेकिन चिंता की बात यह है कि बिहार में भी सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या पहले के मुकाबले कम हुई है।

हालांकि अच्छी खबर यह भी है कि राज्य में स्कूलों और शिक्षकों की संख्या बढ़ी है। इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। जैसे बेहतर अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई, प्राइवेट स्कूलों का तेजी से विस्तार, शहरों का बढ़ना और अभिभावकों की बदलती सोच। अब कई माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर सुविधाओं और अंग्रेजी शिक्षा के लिए निजी स्कूलों में भेजना पसंद कर रहे हैं।


रिपोर्ट में कुछ अच्छी खबरें भी सामने आई हैं

देश में कुल स्कूलों की संख्या थोड़ी कम होकर 14 लाख 67 हजार रह गई है। लेकिन शिक्षकों की संख्या बढ़कर 1 करोड़ 2 लाख 73 हजार से ज्यादा हो गई है। यह पहली बार है जब देश में स्कूल शिक्षकों की संख्या एक करोड़ के पार पहुंची है। इसका असर छात्र-शिक्षक अनुपात पर भी पड़ा है। पहले एक शिक्षक पर औसतन 25 छात्र थे, अब यह घटकर 24 छात्र रह गया है। यानी पढ़ाई की व्यवस्था पहले से कुछ बेहतर हुई है।

इसके अलावा बिना छात्रों वाले स्कूलों की संख्या भी काफी कम हुई है। पहले ऐसे स्कूल करीब 13 हजार थे, जो अब घटकर 5 हजार 663 रह गए हैं। एक और अच्छी बात यह है कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चों यानी ड्रॉपआउट की संख्या में भी कमी आई है। प्रारंभिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2.3 प्रतिशत से घटकर 1.8 प्रतिशत हो गई है। वहीं माध्यमिक स्तर पर यह 8.2 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह गई है।


यानी पहले की तुलना में ज्यादा बच्चे अब अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मिडिल और सेकेंडरी स्तर पर छात्रों का स्कूल में बने रहने का प्रतिशत बढ़ा है। साथ ही उच्च कक्षाओं में दाखिले भी पहले से ज्यादा हो रहे हैं। अगर ड्रॉपआउट वाले राज्यों की बात करें, तो पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार बिहार, झारखंड, असम, मेघालय, मध्य प्रदेश और राजस्थान में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा रही है।

वहीं केरल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों में ड्रॉपआउट दर काफी कम है।


कुल मिलाकर UDISE+ 2025-26 की यह रिपोर्ट एक बड़ा बदलाव दिखाती है। एक तरफ सरकारी स्कूलों से लाखों छात्र कम हुए हैं और प्राइवेट स्कूलों की ओर रुख बढ़ा है। वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों की संख्या बढ़ना, ड्रॉपआउट कम होना और छात्रों का पढ़ाई में टिके रहना भी सकारात्मक संकेत हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में और सुधार कर इस बदलते रुझान को रोका जा सकता है? इस पर सरकार और शिक्षा विभाग को गंभीरता से काम करना होगा। फिलहाल इस रिपोर्ट ने देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

Read This Also