भारतीय पासपोर्ट की कानूनी स्थिति को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी किए गए एक स्पष्टीकरण ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। मंत्रालय के इस रुख के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी और नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार से कड़े सवाल किए हैं।

विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है। मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट अनिवार्य रूप से यह दर्शाता है कि उसका धारक एक भारतीय नागरिक है और उसे विदेश यात्रा की अनुमति दी गई है, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं या विवादों में नागरिकता साबित करने के लिए इसे अंतिम या एकमात्र दस्तावेज नहीं माना जा सकता। सरकार का तर्क है कि इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा को सुगम बनाना और पहचान उपलब्ध कराना है।


रोहिणी आचार्य ने उठाए सवाल
फेसबुक पोस्ट के जरिए सरकार से मांगा जवाब
विदेश मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद रोहिणी आचार्य ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि यदि पासपोर्ट, वोटर आईडी, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज भी नागरिकता का वैध प्रमाण नहीं हैं, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर आम जनता के लिए नागरिकता साबित करने का असली और वैध दस्तावेज कौन-सा है। उन्होंने यह भी तंज कसा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि अब केवल भाजपा की सदस्यता का कार्ड ही नागरिकता साबित करने का वैध कार्ड माना जाएगा।

पासपोर्ट रैंकिंग और कानूनी पहलू
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत की स्थिति
इस बीच वैश्विक स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की स्थिति पर नजर डालें तो 'हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026' के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ग्लोबल रैंकिंग में भारतीय पासपोर्ट 80वें स्थान पर है। वर्तमान में भारतीय पासपोर्ट धारकों को दुनिया के लगभग 57 देशों या क्षेत्रों में वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिल रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट को अमान्य घोषित नहीं किया है, बल्कि केवल उसकी तकनीकी और कानूनी सीमाओं को रेखांकित किया है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि इस प्रकार के बयानों से जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।






