पटना में शनिवार सुबह उस वक्त भारी राजनीतिक हलचल मच गई, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह अचानक पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पहुंच गए। इस दौरान नीतीश कुमार के आवास के बाहर और अंदर जमकर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जहां करीब 20 मिनट के इंतजार और जेडीयू नेताओं की बेरुखी से नाराज आरसीपी सिंह के समर्थकों ने जमकर हंगामा किया।

नीतीश कुमार की बेरुखी और आरसीपी समर्थकों का विरोध
सूत्रों के अनुसार, आरसीपी सिंह अपने 20-25 उत्साही समर्थकों के साथ नीतीश कुमार से मुलाकात करने पहुंचे थे। वहां उन्हें करीब 20 मिनट तक बिठाकर रखा गया। इसके बाद जब नीतीश कुमार अपने कमरे से बाहर निकले, तो आरसीपी सिंह ने उन्हें आदरपूर्वक प्रणाम किया। लेकिन नीतीश कुमार ने पुराने साथी की तरह गर्मजोशी दिखाने के बजाय एक आम कार्यकर्ता की तरह सिर्फ दूर से इशारों में जवाब दिया और तुरंत वापस अपने कमरे के अंदर चले गए।

जेडीयू नेताओं पर लगे आरोप और सोशल मीडिया पर तस्वीर
इस वाकये के बाद आरसीपी सिंह के समर्थक भड़क गए और उन्होंने आरोप लगाया कि जेडीयू एमएलसी संजय गांधी और ललन सराफ ने जानबूझकर आरसीपी सिंह को नीतीश कुमार से ठीक से मिलने नहीं दिया। इससे नाराज कार्यकर्ताओं ने दोनों एमएलसी के खिलाफ परिसर में ही तीखी नारेबाजी की। हंगामे को बढ़ता देख आरसीपी सिंह बिना लंबी बातचीत किए वहां से लौट गए। हालांकि, बाद में डैमेज कंट्रोल करते हुए आरसीपी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर नीतीश कुमार के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि मुलाकात बड़ी आत्मीय थी।

आवास से निकलने के बाद जब मीडिया ने आरसीपी सिंह से जेडीयू में दोबारा घर-वापसी को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने सस्पेंस बरकरार रखते हुए कहा कि इंतजार कीजिए और सब कुछ समय और काल पर छोड़ दीजिए। समर्थकों के हंगामे पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता चार साल बाद अपने नेताओं को साथ देख रहे थे, इसलिए वे भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा कि नीतीश जी आज मुख्यमंत्री नहीं भी हैं, तब भी वे हमारे नेता हैं और हमारे संबंध हमेशा वैसे ही रहेंगे।

जेडीयू के अंदर चल रही इस उठापटक के बीच जनवरी में एक भोज के दौरान आरसीपी सिंह द्वारा नीतीश कुमार को अपना 'अभिभावक' बताए जाने के बाद से उनकी वापसी की अटकलें तेज हैं। हालांकि, ललन सिंह जैसे शीर्ष नेता उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और उनका कहना है कि जेडीयू को 72 से 42 सीटों पर समेटने वाले नेता के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है। साल 2022 में बिना नीतीश की मर्जी के केंद्रीय मंत्री बनने और 35 पन्नों के जमीन घोटाले के आरोपों के बाद आरसीपी सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया गया था, जिससे साफ है कि पार्टी का एक बड़ा धड़ा उनके लिए दरवाजे खोलने को तैयार नहीं है।





