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'मन की बात' में पीएम मोदी ने किया नालंदा की 'शास्त्रार्थ' परंपरा का जिक्र, बोले— 'नए अवतार में भारत का भाग्य बदल रहा है'

By | Published: 06 Jul 2026, 04:33 PM
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'मन की बात' में पीएम मोदी ने किया नालंदा की 'शास्त्रार्थ' परंपरा का जिक्र, बोले— 'नए अवतार में भारत का भाग्य बदल रहा है'
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मुख्य बातें

  • नई दिल्ली / राजगीर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में बिहार के ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय की जमकर तारीफ की है।
  • पीएम मोदी ने बताया कि कैसे यह विश्वविद्यालय भारत की सदियों पुरानी सभ्यता और धरोहर को आधुनिक शिक्षा व तकनीक (AI और Data Science) के साथ बेहतरीन ढंग से जोड़ रहा है।'दो सा...
  • आज मुझे यह देखकर बेहद खुशी हो रही है कि नालंदा ने हमारी प्राचीन 'शास्त्रार्थ' (शास्त्रीय वाद-विवाद और चिंतन) की परंपरा को फिर से जीवंत कर दिया है।"क्या है 'शास्त्रार्थ...
  • पीएम ने समझाया इसका महत्वप्रधानमंत्री ने 'शास्त्रार्थ' के महत्व पर रोशनी डालते हुए कहा कि यह केवल अपनी बात रखने या बहस करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संवाद, चिंतन और...

नई दिल्ली / राजगीर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में बिहार के ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय की जमकर तारीफ की है। पीएम मोदी ने बताया कि कैसे यह विश्वविद्यालय भारत की सदियों पुरानी सभ्यता और धरोहर को आधुनिक शिक्षा व तकनीक (AI और Data Science) के साथ बेहतरीन ढंग से जोड़ रहा है।'


दो साल पहले हुए उद्घाटन के पलों को किया याद

पीएम मोदी ने लगभग दो साल पहले (जून 2024 में) नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस के उद्घाटन के ऐतिहासिक पलों को याद करते हुए कहा, "कुछ समय पहले मुझे नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस को देश को समर्पित करने का अवसर मिला था। आज मुझे यह देखकर बेहद खुशी हो रही है कि नालंदा ने हमारी प्राचीन 'शास्त्रार्थ' (शास्त्रीय वाद-विवाद और चिंतन) की परंपरा को फिर से जीवंत कर दिया है।"



क्या है 'शास्त्रार्थ' परंपरा? पीएम ने समझाया इसका महत्व

प्रधानमंत्री ने 'शास्त्रार्थ' के महत्व पर रोशनी डालते हुए कहा कि यह केवल अपनी बात रखने या बहस करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संवाद, चिंतन और विचार-मंथन की एक बेहद अनुशासित प्राचीन प्रक्रिया है।

तर्क और तथ्य: यह परंपरा प्रतिभागियों को तर्क और तथ्यात्मक ढंग से अपनी बात रखना सिखाती है।

धैर्य और सम्मान: इसका सबसे बड़ा पहलू यह है कि यह हमें अपने विरोधी के विचारों को भी धैर्य के साथ सुनने और उन्हें समझने की सीख देती है।


दीक्षांत समारोह में शामिल हुआ 'शास्त्रार्थ', विदेशी छात्र भी हुए प्रभावित

नालंदा विश्वविद्यालय ने इस प्राचीन परंपरा को अपने दीक्षांत समारोह (Convocation Ceremony) का हिस्सा बनाया है। पीएम मोदी ने खुशी जताते हुए बताया कि इस शास्त्रार्थ में भाग लेने वाले लगभग आधे छात्र विदेशों से थे। उन्होंने इस बात की सराहना की कि विश्वविद्यालय प्राचीन ज्ञान को आधुनिक युग से जोड़कर देश के कोने-कोने और विश्व भर में पहुंचा रहा है। उन्होंने देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों (Higher Educational Institutions) से भी इस बेहतरीन पहल को अपनाने की अपील की।


AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के युग में 'जड़ों' से जुड़ना जरूरी

आज के तकनीकी दौर का ज़िक्र करते हुए पीएम ने कहा, "आज नए-नए AI इनोवेशन हो रहे हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि हम अपनी क्रिएटिविटी को कैसे बचाएं? नई टेक्नोलॉजी के साथ आगे बढ़ते हुए भी अपनी जड़ों (Roots) से कैसे जुड़े रहें? नालंदा यूनिवर्सिटी ने भारत के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर इस सवाल का सटीक जवाब दे दिया है।" उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि हजारों साल पुरानी नालंदा यूनिवर्सिटी अब एक नए अवतार में भारत का भाग्य संवार रही है।


सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी का भी किया ज़िक्र

नालंदा के साथ-साथ पीएम मोदी ने दिल्ली की सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी के एक क्रांतिकारी कदम की भी तारीफ की। यह विश्वविद्यालय अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस में बी.टेक (B.Tech) प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से हजारों साल पुराने प्राचीन ग्रंथों, वेदों और दुर्लभ पांडुलिपियों (Manuscripts) को डिजिटल रूप में हमेशा के लिए सुरक्षित किया जा सकेगा।



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