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पटना में मकान और जमीन मालिकों के लिए चेतावनी, 30 सितंबर तक टैक्स नहीं भरा तो लगेगा भारी ब्याज

| Published: | Updated:
पटना में मकान और जमीन मालिकों के लिए चेतावनी, 30 सितंबर तक टैक्स नहीं भरा तो लगेगा भारी ब्याज
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मुख्य बातें

  • पटना नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी मकान, जमीन और अन्य संपत्तियों के मालिकों के लिए चालू वित्तीय वर्ष का संपत्ति कर जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
  • इस तय सीमा के भीतर अपने बकाये का भुगतान न करने वाले संपत्तिधारकों पर एक अक्टूबर से दंडात्मक ब्याज और प्रशासनिक कार्रवाई की तलवार लटक जाएगी।
  • नगर निगम प्रशासन द्वारा संपत्तिधारकों को लगातार डिजिटल माध्यमों और मोबाइल संदेशों के जरिए कर निर्धारण एवं भुगतान की जानकारी दी जा रही है।
  • अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अंतिम तिथि के बाद लगने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाना और शहर के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राजस्व को सुदृढ़ करना है।

पटना नगर निगम का संपत्ति कर भुगतान और समय-सीमा का विस्तार

पटना नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी मकान, जमीन और अन्य संपत्तियों के मालिकों के लिए चालू वित्तीय वर्ष का संपत्ति कर जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इस तय सीमा के भीतर अपने बकाये का भुगतान न करने वाले संपत्तिधारकों पर एक अक्टूबर से दंडात्मक ब्याज और प्रशासनिक कार्रवाई की तलवार लटक जाएगी।

नगर निगम प्रशासन द्वारा संपत्तिधारकों को लगातार डिजिटल माध्यमों और मोबाइल संदेशों के जरिए कर निर्धारण एवं भुगतान की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अंतिम तिथि के बाद लगने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाना और शहर के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राजस्व को सुदृढ़ करना है।

पटना में मकान और जमीन मालिकों के लिए चेतावनी, 30 सितंबर तक टैक्स नहीं भरा तो लगेगा भारी ब्याज

बिहार नगरपालिका नियमावली और कर निर्धारण का प्रशासनिक ढांचा

बिहार नगरपालिका संपत्ति कर नियमावली 2013 के अंतर्गत कर भुगतान के लिए अलग-अलग अवधियों में भिन्न प्रावधान और प्रोत्साहन तय किए गए हैं। इन प्रशासनिक नियमों का उद्देश्य नागरिकों को समय पर कर जमा करने के लिए प्रेरित करना और स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत रखना है।

वार्षिक कर चक्र और छूट के प्रावधान

नगर निगम के नियमों के अनुसार करदाताओं को वर्ष भर में अलग-अलग चरणों में वित्तीय लाभ और हानियां उठानी पड़ती हैं:

  • अप्रैल से जून (प्रथम तिमाही): इस अवधि के दौरान पूरे वित्तीय वर्ष का संपत्ति कर एकमुश्त जमा करने पर मूल कर राशि में 5 प्रतिशत की अनिवार्य छूट दी जाती है। चालू वित्तीय वर्ष में इस अवधि के दौरान 1,24,641 संपत्तिधारकों ने इस छूट का लाभ उठाया था।
  • जुलाई से सितंबर (द्वितीय तिमाही): इस समय सीमा के दौरान टैक्स जमा करने पर किसी प्रकार की अतिरिक्त छूट नहीं मिलती है, लेकिन संपत्तिधारक अक्टूबर से प्रभावी होने वाले मासिक ब्याज से सुरक्षित रहते हैं।
  • एक अक्टूबर के बाद: इस तिथि के पश्चात भुगतान न करने पर संपत्तिधारकों को डिफाल्टर घोषित कर दिया जाता है और बकाया मूल राशि पर प्रति माह 1.5 प्रतिशत की दर से ब्याज जोड़ा जाता है।

कड़े प्रावधान और बकायेदारों पर संभावित विधिक कार्रवाई

यदि कोई संपत्तिधारक लंबे समय तक अपना कर बकाया रखता है, तो नगर निगम के पास सख्त कानूनी कदम उठाने के स्पष्ट अधिकार सुरक्षित हैं। बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 के प्रावधानों के तहत निकाय प्रशासन को कर वसूली के लिए व्यापक शक्तियां दी गई हैं, जिनका उपयोग डिफाल्टरों के खिलाफ किया जा सकता है।

इन प्रशासनिक और विधिक कार्रवाइयों में संपत्ति की कुर्की और उसकी खुली बिक्री करना शामिल है। इसके अलावा, गंभीर मामलों में बकायेदार के बैंक खातों को सीज करने और कर की वसूली सुनिश्चित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी करने का प्रावधान भी है। हालांकि, निगम की प्राथमिकता हमेशा नोटिस और डिजिटल संदेशों के माध्यम से लोगों को स्वेच्छा से भुगतान करने का अवसर देने की होती है।

पटना में मकान और जमीन मालिकों के लिए चेतावनी, 30 सितंबर तक टैक्स नहीं भरा तो लगेगा भारी ब्याज

राजस्व संग्रह में वृद्धि और आगामी विभागीय समीक्षा

पटना नगर निगम के हालिया आंकड़ों के अनुसार, शहर में करदाताओं की जागरूकता लगातार बढ़ रही है। निगम क्षेत्र में अब तक करीब 3.10 लाख संपत्तियों का स्व कर निर्धारण पूरा हो चुका है। चालू वित्तीय वर्ष में 9 सितंबर तक 1,51,331 संपत्तिधारकों ने कर जमा किया है जिससे 61.19 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस बार 4,383 अधिक लोगों ने टैक्स भरा है और राजस्व में 11.29 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। निगम अब 30 सितंबर की समय-सीमा समाप्त होने के तुरंत बाद शेष डिफाल्टरों की सूची तैयार कर अगली वैधानिक वसूली प्रक्रिया की समीक्षा करेगा।

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