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Bihar के UPSC कैंडिडेट्स को झटका, बिहार कैडर नहीं मिलेगा : नियम बदला

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Bihar के UPSC कैंडिडेट्स को झटका, बिहार कैडर नहीं मिलेगा : नियम बदला
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मुख्य बातें

  • बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था (ब्यूरोक्रेसी) में आने वाले समय में एक बड़ा और अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिलने वाला है।
  • भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय द्वारा बिहार सरकार को भेजे गए 2025 बैच के आईएएस अधिकारियों के 'सोशल पैटर्न' के अनुसार, राज्य में ईडब्ल्यूएस-जनरल (EWS-General) और ओबीसी (OBC) कैटेगरी के लिए 'इनसाइडर वैकेंसी' यानी गृह राज्य के कोटे को पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है।
  • इस नए प्रशासनिक निर्णय का सीधा असर यह होगा कि अप्रैल-मई 2027 में जब 2025 बैच के आईएएस अधिकारी अपनी ट्रेनिंग पूरी कर बिहार में फील्ड पोस्टिंग के लिए तैनात किए जाएंगे, तो उनमें सामान्य और ओबीसी वर्ग का कोई भी स्थानीय बिहारी चेहरा शामिल नहीं होगा।
  • इस नए सोशल पैटर्न से बिहार की नौकरशाही का 'लोकल कनेक्शन' काफी हद तक प्रभावित होने की संभावना है।

बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था (ब्यूरोक्रेसी) में आने वाले समय में एक बड़ा और अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिलने वाला है। भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय द्वारा बिहार सरकार को भेजे गए 2025 बैच के आईएएस अधिकारियों के 'सोशल पैटर्न' के अनुसार, राज्य में ईडब्ल्यूएस-जनरल (EWS-General) और ओबीसी (OBC) कैटेगरी के लिए 'इनसाइडर वैकेंसी' यानी गृह राज्य के कोटे को पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है। इस नए प्रशासनिक निर्णय का सीधा असर यह होगा कि अप्रैल-मई 2027 में जब 2025 बैच के आईएएस अधिकारी अपनी ट्रेनिंग पूरी कर बिहार में फील्ड पोस्टिंग के लिए तैनात किए जाएंगे, तो उनमें सामान्य और ओबीसी वर्ग का कोई भी स्थानीय बिहारी चेहरा शामिल नहीं होगा। इस नए सोशल पैटर्न से बिहार की नौकरशाही का 'लोकल कनेक्शन' काफी हद तक प्रभावित होने की संभावना है।

2025 बैच का सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गीकरण

कार्मिक मंत्रालय द्वारा निर्धारित नए नियमों के आधार पर वर्ष 2027 में बिहार कैडर में कुल 9 नए आईएएस अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। इन अधिकारियों का सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गीकरण इस प्रकार है:

  • सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी: इस श्रेणी के तहत कुल 2 आईएएस अधिकारी बिहार कैडर में भेजे जाएंगे। हालांकि, ये दोनों ही अधिकारी बिहार के बाहर के राज्यों के मूल निवासी (आउटसाइडर) होंगे।
  • ओबीसी (OBC) श्रेणी: इस वर्ग के तहत कुल 3 आईएएस अधिकारियों की तैनाती बिहार कैडर में होगी। ये तीनों अधिकारी भी बिहार से बाहर के राज्यों के निवासी होंगे।
  • अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी: इस श्रेणी के तहत बिहार कैडर में कुल 2 अधिकारियों की तैनाती होगी। ये दोनों ही अधिकारी बिहार के स्थानीय निवासी (इनसाइडर) होंगे।
  • अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी: इस वर्ग के तहत 1 अधिकारी बिहार कैडर में आएगा, जो बिहार का ही स्थानीय निवासी (इनसाइडर) होगा।

यूपीएससी टॉपर होने पर भी क्यों नहीं मिलेगा होम कैडर?

बिहार के युवाओं के संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में शीर्ष स्थान या टॉप रैंक हासिल करने के बावजूद उन्हें अपना गृह राज्य (होम कैडर) न मिलने के पीछे मुख्य प्रशासनिक कारण जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार द्वारा बिहार कैडर में ईडब्ल्यूएस, जनरल और ओबीसी श्रेणी की इनसाइडर सीटों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

इनसाइडर वैकेंसी शून्य होने के कारण, अब कोई भी मेधावी सामान्य या ओबीसी उम्मीदवार 'अनारक्षित श्रेणी' के अंतर्गत भी बिहार कैडर प्राप्त नहीं कर सकेगा। नियमों के मुताबिक, यदि किसी राज्य में इनसाइडर सीट उपलब्ध नहीं होती है, तो यूपीएससी टॉपर्स को भी उनके गृह राज्य के बजाय उनके द्वारा चुने गए दूसरे पसंदीदा बाहरी राज्यों (कैडर) में भेज दिया जाता है.

Bihar के UPSC कैंडिडेट्स को झटका, बिहार कैडर नहीं मिलेगा : नियम बदला

बिहार में लगातार घट रही है आईएएस अधिकारियों की संख्या

राज्य के प्रशासनिक हलकों के लिए एक और चिंताजनक बात यह है कि बिहार को मिलने वाले कुल आईएएस अधिकारियों की संख्या में साल-दर-साल लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार:

  • वर्ष 2022 और 2023 बैच में बिहार को 11-11 आईएएस अधिकारी मिले थे।
  • वर्ष 2024 बैच में यह संख्या घटकर 10 रह गई।
  • अब 2025 बैच में यह संख्या और कम होकर केवल 9 रह गई है, जो 2027 में बिहार में तैनात होंगे।

पिछले पांच बैचों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि वर्ष 2021, 2022, 2023 और 2025 में जनरल कैटेगरी से किसी भी स्थानीय उम्मीदवार को बिहार का होम कैडर नहीं मिल सका है। इस लगातार घटते ट्रेंड के कारण राज्य प्रशासन में स्थानीय जुड़ाव कम होने की बात कही जा रही है।

मार्च 2026 में आए अधिकारियों की क्या थी स्थिति?

इससे पहले मार्च 2026 में 2024 बैच के कुल 10 आईएएस अधिकारियों को बिहार कैडर आवंटित कर भेजा गया था। उस समय की स्थिति भी इस घटते ट्रेंड को स्पष्ट रूप से दर्शाती है:

  • सामान्य श्रेणी के तहत आए कुल 7 आईएएस अधिकारियों में से केवल 2 को ही 'होम कैडर' (बिहार) मिल पाया था, जबकि शेष 5 अधिकारी अन्य राज्यों के मूल निवासी थे।
  • ओबीसी कोटे से आए 2 आईएएस अधिकारियों में से केवल 1 अधिकारी बिहार का मूल निवासी था, जबकि दूसरा अधिकारी बाहरी राज्य का रहने वाला था।

इस प्रकार, केंद्र सरकार द्वारा इनसाइडर वैकेंसी को शून्य किए जाने और नियमों में बदलाव के कारण बिहार के सामान्य और ओबीसी वर्ग के सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए होम कैडर पाने की राह पूरी तरह बंद हो गई है।

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