आरा (खबर डोज़ ब्यूरो)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के गंभीर आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी संग्राम छिड़ गया है। दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत करीब तीन सौ विपक्षी सांसदों के विरोध प्रदर्शन के बाद बुधवार को बिहार में महागठबंधन आक्रामक नजर आया। तेजस्वी यादव के आह्वान पर राज्य के तमाम प्रखंडों में राजद और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की।
बिहार से दिल्ली तक सड़क पर उतरा विपक्ष
राजधानी दिल्ली के आकाशवाणी भवन से शुरू हुआ यह राजनीतिक विरोध अब देश के विभिन्न हिस्सों में फैल चुका है। मंगलवार को निर्वाचन आयोग तक मार्च निकालने वाले विपक्षी सांसदों को पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद, बुधवार को इसका विस्तार देखने को मिला। बिहार के भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड मुख्यालय पर राजद नेत्री सोनाली सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।

मतदाता सूची पुनरीक्षण और SIR विवाद की असल जड़
यह पूरा राजनीतिक टकराव मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर खड़ा हुआ है। विपक्ष का दावा है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं और फॉर्म-6 से जुड़े संशोधनों में भी गंभीर खामियां पाई गई हैं। इसी कड़ी में दिल्ली स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और वाम दलों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला है। इंडिया गठबंधन की ओर से 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान की रूपरेखा तैयार की जा रही है जो नवंबर तक चलाए जाने की योजना है।
- ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष, दिल्ली में आप, कांग्रेस और वाम दलों का संयुक्त प्रदर्शन।
- बिहार के सभी प्रखंडों में राजद और कांग्रेस का आक्रोश मार्च, जिला मुख्यालयों पर धरने की तैयारी।
- भोजपुर के बड़हरा में राजद नेत्री सोनाली सिंह के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त और शीर्ष नेतृत्व का पुतला फूंका गया।
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा बुलाई गई बैठक में 10 से 20 अक्टूबर तक देशव्यापी प्रदर्शनों का फैसला।

दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी इन तमाम विरोध प्रदर्शनों को चुनावी राज्यों में पराजय की निराशा करार दे रही है। वहीं, निर्वाचन आयोग की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि उससे जुड़े सभी नीतिगत फैसले पूरी तरह से सर्वसम्मति के आधार पर लिए गए हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक चुनावी विवाद न मानकर संस्थागत विश्वसनीयता और मतदाता अधिकारों की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी अगली कड़ियों में 8 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर होने वाले धरने और प्रदर्शन शामिल हैं।





