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पंचायत चुनाव से पहले सरकार का बड़ा आदेश, कम खर्च हुआ तो मुखिया-सचिव पर होगी कार्रवाई

By | Published: 19 Jul 2026, 01:26 PM
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पंचायत चुनाव से पहले सरकार का बड़ा आदेश, कम खर्च हुआ तो मुखिया-सचिव पर होगी कार्रवाई
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मुख्य बातें

  • Bihar Panchayat Election: बिहार में पंचायत चुनाव से पहले राज्य सरकार ने पंचायतों में विकास कार्य और सरकारी राशि के खर्च को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
  • सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन पंचायतों में उपलब्ध राशि का खर्च एक प्रतिशत से भी कम पाया जाएगा, वहां के मुखिया और पंचायत सचिव से जवाब मांगा जाएगा।
  • लापरवाही सामने आने पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।सरकार का मानना है कि गांवों के विकास के लिए पंचायतों को पैसा दिया जाता है।
  • अगर वह पैसा समय पर खर्च नहीं होगा, तो सड़क, नाली, पेयजल, पंचायत भवन और दूसरी जरूरी योजनाओं का काम प्रभावित होगा।

Bihar Panchayat Election: बिहार में पंचायत चुनाव से पहले राज्य सरकार ने पंचायतों में विकास कार्य और सरकारी राशि के खर्च को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन पंचायतों में उपलब्ध राशि का खर्च एक प्रतिशत से भी कम पाया जाएगा, वहां के मुखिया और पंचायत सचिव से जवाब मांगा जाएगा। लापरवाही सामने आने पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।

सरकार का मानना है कि गांवों के विकास के लिए पंचायतों को पैसा दिया जाता है। अगर वह पैसा समय पर खर्च नहीं होगा, तो सड़क, नाली, पेयजल, पंचायत भवन और दूसरी जरूरी योजनाओं का काम प्रभावित होगा। इसका सीधा नुकसान गांव में रहने वाले लोगों को उठाना पड़ेगा। इसलिए अब पंचायतों में विकास राशि को बिना कारण रोके रखने वालों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।


मुखिया और पंचायत सचिव को जिम्मेदार ठहराने के पीछे एक अहम वजह है। पंचायत के खाते से सरकारी राशि की निकासी मुखिया और पंचायत सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से होती है। यह भुगतान डिजिटल डोंगल के माध्यम से किया जाता है। यानी पंचायत की राशि खर्च करने में दोनों की भूमिका रहती है। इसी कारण काम की धीमी रफ्तार या बहुत कम खर्च होने पर दोनों से जवाब मांगा जा सकता है। पंचायती राज विभाग ने सिर्फ कम खर्च को लेकर ही निर्देश नहीं दिया है। विभाग ने पंचायतों में बिना टेंडर के बड़े काम कराने पर भी सख्ती दिखाई है। निर्देश के मुताबिक, 15 लाख रुपये से अधिक का कोई काम बिना टेंडर के कराया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य पंचायतों में मनमाने तरीके से ठेका देने और सरकारी राशि के गलत इस्तेमाल को रोकना है।

सरकार ने यह भी कहा है कि पंचायतों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। अगर किसी एजेंसी ने सड़क, नाली, भवन या दूसरी योजना में घटिया निर्माण किया, तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। ब्लैकलिस्ट होने के बाद उस एजेंसी को भविष्य में सरकारी काम मिलने में परेशानी होगी। वहीं, काम में लापरवाही करने वाली एजेंसियों पर जुर्माना लगाने की भी तैयारी है। इसका मतलब है कि काम लेकर उसे समय पर पूरा नहीं करने, नियमों का पालन नहीं करने या खराब निर्माण करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होगी। दूसरी तरफ, अच्छा काम करने वाली पंचायतों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इससे बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को आगे की योजनाओं में फायदा मिल सकता है।


जर्जर पंचायत भवनों को लेकर भी सरकार ने ध्यान दिया है। कई जगह पंचायत भवन की हालत खराब है, जबकि उसके निर्माण या मरम्मत के लिए पैसा उपलब्ध कराया गया था। ऐसे मामलों की जांच हो सकती है। यह देखा जाएगा कि राशि मिलने के बाद भी भवन की मरम्मत क्यों नहीं हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

सरकार के इन निर्देशों को आगामी पंचायत चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। चुनाव से पहले सरकार पंचायतों के कामकाज, खर्च और विकास योजनाओं की स्थिति को दुरुस्त करना चाहती है। इससे पहले पंचायतों के परिसीमन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दी गई थी। इसके अलावा गांवों में कुछ सेवाओं, मकानों और व्यावसायिक गतिविधियों पर कर तथा शुल्क लगाने से जुड़े नियमों पर भी काम हुआ है।

अब बड़ा सवाल यह है कि इन निर्देशों का जमीन पर कितना असर दिखाई देगा। क्या पंचायतों में रुके हुए विकास कार्य तेज होंगे? क्या सरकारी राशि का सही और पारदर्शी तरीके से इस्तेमाल होगा? या फिर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी? मुखिया और पंचायत सचिवों के लिए यह आदेश एक साफ संदेश है कि पंचायत के खाते में पैसा पड़ा रहने और विकास कार्य धीमा होने पर अब जवाब देना पड़ सकता है। साथ ही, बिना टेंडर बड़े काम कराने और खराब निर्माण करने वाली एजेंसियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। अगर इन निर्देशों को ईमानदारी से लागू किया गया, तो गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ सकती है और सरकारी राशि के गलत इस्तेमाल पर रोक लग सकती है। लेकिन इसके लिए नियमित जांच, पारदर्शी व्यवस्था और दोषी पाए जाने वालों पर समय से कार्रवाई जरूरी होगी।


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