Panchayat Election: अगर आप भी बिहार के पंचायत चुनाव यानी मुखिया चुनाव का इंतज़ार कर रहे थे, तो अब आपके लिए बड़ी खबर सामने आई है। बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। अब चुनाव की तारीखों को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है।
मिली जानकारी के अनुसार, बिहार में पंचायत चुनाव इस साल सितंबर के आखिरी सप्ताह से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह के बीच शुरू हो सकते हैं। चुनाव को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए इसे 8 से 9 चरणों में आयोजित करने की तैयारी चल रही है।

इस बार का पंचायत चुनाव कई कारणों से बेहद खास और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे बड़ा बदलाव चुनावी प्रक्रिया में देखने को मिलेगा। पहली बार पंचायत चुनाव के सभी छह पदों पर EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से मतदान कराया जाएगा। पहले कुछ पदों पर बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब सभी पदों पर वोटिंग EVM से होगी। इससे मतदान प्रक्रिया और भी तेज और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

वहीं दूसरी बड़ी बात आरक्षण रोस्टर में बदलाव को लेकर है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतों के सीमा और जनसंख्या के आधार पर आरक्षण तय करने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। इस बार नया आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा, जिसका असर हजारों पंचायतों और वार्डों पर पड़ेगा।

बताया जा रहा है कि बिहार की 4 हजार से ज्यादा पंचायतों और 55 हजार से ज्यादा वार्डों में नए आरक्षण नियम लागू होंगे। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
इस बदलाव का असर स्थानीय राजनीति पर भी पड़ेगा। कई वर्तमान मुखिया, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों की सीटें इस बार आरक्षित या अनारक्षित हो सकती हैं। ऐसे में कई नेताओं को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। वहीं नए उम्मीदवारों के लिए भी चुनाव लड़ने के अवसर बढ़ सकते हैं।

आरक्षण तय करने के लिए आयोग ने साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया है। आयोग ने ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने के लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तारीख 15 जून तक बढ़ाई थी। अब यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम तैयारियों पर तेजी से काम किया जा रहा है।
फिलहाल आयोग वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने, मतदान केंद्रों के सत्यापन और अन्य प्रशासनिक तैयारियों में जुटा हुआ है। जिला स्तर पर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं ताकि चुनाव समय पर और बिना किसी परेशानी के संपन्न कराया जा सके।

इस बार का पंचायत चुनाव बिहार की राजनीति के लिए काफी अहम साबित हो सकता है। क्योंकि पंचायत स्तर पर चुने जाने वाले जनप्रतिनिधि ग्रामीण विकास योजनाओं और स्थानीय प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में चुनाव का असर आने वाले वर्षों की गाँव की राजनीति पर भी देखने को मिलेगा।

हालांकि अभी तक राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन तैयारियों की रफ्तार को देखते हुए माना जा रहा है कि जल्द ही चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है।





