Breaking
● बिहार में बारिश का डबल अटैक! 12 जिलों में भारी बारिश, 20 में वज्रपात का अलर्ट; जानें आपके जिले में कैसा रहेगा मौसम ● पटना में आज कई इलाकों में बिजली कटौती, इन क्षेत्रों में इतने घंटे बाधित रहेगी बिजली सप्लाई; जानें अपने इलाके का हाल ● बिहार में खाद दुकानदारों की नहीं चलेगी मनमानी... अब QR कोड से मिलेगी खाद, तय कीमत से ज्यादा वसूली की तो होगी सख्त कार्रवाई ● NEET-UG पेपर लीक केस में संजीव मुखिया को बड़ी राहत, हिरासत से मुक्त करने का कोर्ट ने दिया आदेश ● स्वर्ण व्यवसायी को बदमाशों ने सीने में मारी गोली, GMCH में इलाज को लेकर भड़का हंगामा; मौके पर मची अफरातफरी ● बिहार में ममता हुई शर्मसार, अपनी मर्जी से शादी करने पर टीचर मां-बाप ने बेटी का गला दबाकर कर दी हत्या ● धान की भूसी के नीचे छिपा था करोड़ों का माल, 16 चक्का ट्रक की तलाशी लेते ही खुल गया बड़ा राज; बिहार में 1.28 करोड़ की विदेशी शराब जब्त ● नेपाल की बाढ़ का बिहार में असर: गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा, कई जिलों में हाई अलर्ट; तटबंधों की बढ़ी निगरानी ●
BIHAR

सातवें वेतनमान और पुरानी पेंशन की मांग को लेकर शिक्षकों का प्रदर्शन, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध

By | Published: 01 Sep 2026, 06:45 PM
सातवें वेतनमान और पुरानी पेंशन की मांग को लेकर शिक्षकों का प्रदर्शन, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
Share:

मुख्य बातें

  • बिहार में शिक्षकों ने सातवें वेतनमान और पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस की मांग को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
  • मंगलवार को बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन गोपगुट के आह्वान पर राज्यभर के शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया और अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया।शिक...
  • वे अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए स्कूलों में शिक्षण कार्य करते रहे, लेकिन साथ ही काली पट्टी बांधकर सरकार तक अपनी नाराजगी और मांगों का संदेश पहुंचाया।दरअसल, शिक्षक लंबे सम...
  • संगठन का कहना है कि राज्य के अलग-अलग वर्गों के शिक्षकों को वेतन और सेवा से जुड़ी कई विसंगतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें सरकार को जल्द दूर करना चाहिए।बिहार स्ट...

बिहार में शिक्षकों ने सातवें वेतनमान और पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस की मांग को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन गोपगुट के आह्वान पर राज्यभर के शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया और अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया।

शिक्षकों का कहना है कि उनका विरोध बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित करने के लिए नहीं है। वे अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए स्कूलों में शिक्षण कार्य करते रहे, लेकिन साथ ही काली पट्टी बांधकर सरकार तक अपनी नाराजगी और मांगों का संदेश पहुंचाया।

दरअसल, शिक्षक लंबे समय से सातवें वेतनमान के अनुसार वेतन और भत्ते देने के साथ-साथ पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि राज्य के अलग-अलग वर्गों के शिक्षकों को वेतन और सेवा से जुड़ी कई विसंगतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें सरकार को जल्द दूर करना चाहिए।


बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन गोपगुट की प्रमुख मांगों में सभी कोटि के शिक्षकों, विद्यालय अध्यापकों, विशिष्ट शिक्षकों, प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को सातवें वेतनमान के अनुरूप पूर्ण वेतन और भत्ते देने की मांग शामिल है।

इसके अलावा संगठन ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। शिक्षकों का कहना है कि नौकरी के बाद उनका भविष्य सुरक्षित होना चाहिए और इसके लिए पुरानी पेंशन योजना जरूरी है।

संगठन की एक और महत्वपूर्ण मांग प्रधान शिक्षकों के मूल वेतन को बढ़ाकर 44 हजार 200 रुपये करने की है। साथ ही वेतन और सेवा से संबंधित सभी विसंगतियों को दूर करने की मांग की गई है।

बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन गोपगुट के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक और महासचिव शकीरा इमाम ने कहा कि शिक्षक अपने अधिकार और भविष्य की सुरक्षा के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि सरकार को शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और संगठन के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत कर उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला लेना चाहिए।

शिक्षक नेताओं ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन ने आंदोलन का अगला चरण भी घोषित कर दिया है। इसके तहत पांच सितंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया जाएगा। यानी शिक्षक जिला स्तर पर एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे।

इसके बाद भी अगर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। संगठन ने घोषणा की है कि दो अक्टूबर से पटना में आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। शिक्षक नेताओं का कहना है कि उनकी मांगें केवल वेतन बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें शिक्षकों की सेवा शर्तों और भविष्य की सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है।

अब देखना होगा कि शिक्षकों के इस विरोध और आगामी सत्याग्रह के बाद सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है। क्या सरकार शिक्षक संगठनों के साथ बातचीत कर उनकी मांगों का समाधान निकालती है या फिर शिक्षकों का आंदोलन पटना में आमरण अनशन तक पहुंचता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

Read This Also