Gold Monetization: अगर आपके घर में सोना रखा है, चाहे वह गहनों के रूप में हो या सिक्कों के रूप में, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। दरअसल, केंद्र सरकार एक बार फिर गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम यानी GMS को नए रूप में लाने की तैयारी कर रही है। इस नई योजना का मकसद लोगों के घरों में रखा सोना देश की अर्थव्यवस्था के काम में लाना है।
हालांकि, सबसे पहले एक बात साफ कर दें। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सरकार आपके घर में रखा सोना लेने जा रही है या उसे जबरदस्ती जमा करवाएगी। यह पूरी तरह से एक ऑप्शनल योजना होगी। अगर कोई व्यक्ति चाहे, तभी वह इसमें हिस्सा ले सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अगस्त तक इस योजना का फिर से नए रूप में लॉन्च कर सकती है। माना जा रहा है कि इस बार सरकार का लक्ष्य पहले से कहीं ज्यादा सोना बैंकिंग और वित्तीय सिस्टम में लाना है।

अब सवाल है कि सरकार ऐसा क्यों करना चाहती है?
दरअसल, भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना खरीदने वाले देशों में से एक है। हर साल बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से आयात किया जाता है। इस आयात पर देश के अरबों डॉलर खर्च होते हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और रुपये पर भी असर पड़ता है।
वहीं दूसरी ओर, देश के करोड़ों परिवारों के घरों में हजारों टन सोना वर्षों से बिना किसी उपयोग के रखा हुआ है। सरकार चाहती है कि इसी सोने का कुछ हिस्सा देश की अर्थव्यवस्था के काम आए।
इस बार की सबसे बड़ी खास बात यह हो सकती है कि योजना में सिर्फ बैंक ही नहीं, बल्कि ज्वैलर्स भी शामिल किए जाएंगे।

अब तक लोगों को अपना सोना सीधे बैंक के जरिए जमा करना पड़ता था। लेकिन नई व्यवस्था में लोग अपने भरोसेमंद ज्वैलर के पास भी सोना जमा कर सकेंगे। इसके बाद ज्वैलर उस सोने को आसानी से बैंक तक पहुंचाएंगे।

सोना मॉन्टीजेशन में व्यापारी को क्यों जोड़ा?
सरकार का मानना है कि आम लोग कई बार बैंक की तुलना में अपने पुराने ज्वैलर पर ज्यादा भरोसा करते हैं। इसलिए इस बदलाव से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़ सकते हैं।अगर यह योजना सफल रहती है, तो इसका फायदा सिर्फ सरकार को ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी मिल सकता है। पहले की योजना में जो लोग अपना सोना जमा करते थे, उन्हें उस पर ब्याज भी मिलता था। साथ ही तय समय पूरा होने पर वे सोना या उसके बराबर नकद राशि लेने का विकल्प चुन सकते थे। उम्मीद की जा रही है कि नई योजना में भी लोगों को आकर्षित करने के लिए इसी तरह के बेहतर विकल्प दिए जा सकते हैं।

सरकार को इस योजना से क्या फायदा?
जानकारी के मुताबिक, भारत के घरों और मंदिरों में करीब 25 हजार टन से ज्यादा सोना मौजूद है। अगर इसका सिर्फ 5 प्रतिशत हिस्सा भी इस योजना के तहत आ जाए, तो देश में लाखों करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी पैदा हो सकती है। इससे बैंकों को मजबूती मिलेगी, उद्योगों को निवेश मिलेगा और सोने के आयात की जरूरत भी काफी कम हो सकती है।

पुरानी योजना क्या कहती है?
गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम पहली बार साल 2015 में शुरू की गई थी। उस समय भी सरकार का उद्देश्य यही था कि घरों में रखा निष्क्रिय सोना देश की अर्थव्यवस्था के काम आए। लेकिन यह योजना उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो सकी। करीब दस साल में केवल 38 टन सोना ही इस योजना के तहत जमा हो पाया। इसकी कई वजह थीं। लोगों को अपने पुश्तैनी और भावनात्मक महत्व वाले गहने पिघलाने में संकोच था। कुछ लोगों को टैक्स जांच का डर था। वहीं प्रक्रिया भी काफी मुश्किल मानी गई और बैंकों की सीमित भागीदारी भी एक बड़ी वजह रही। अब सरकार इन कमियों को दूर करने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि नई योजना पहले से ज्यादा आसान, भरोसेमंद और लोगों के लिए सुविधाजनक होगी।

अगर इस बार करीब 1,250 टन सोना भी वित्तीय सिस्टम में आ जाता है, तो भारत को लंबे समय तक नए सोने के आयात की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है। इससे डॉलर की बचत होगी, रुपये को मजबूती मिलेगी और देश का व्यापार घाटा भी घट सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से नई योजना की आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। इसलिए इसके अंतिम नियम और शर्तें सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
तो अगर आपके घर में भी सोना रखा है, तो आने वाले दिनों में सरकार की इस नई योजना पर जरूर नजर रखें। हो सकता है भविष्य में यही सोना सिर्फ तिजोरी में रखने की बजाय आपके लिए एकस्ट्रा कमाई का जरिया भी बन जाए और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले।





