इस वक्त की बड़ी खबर बिहार और नेपाल से जुड़ी हुई है। उत्तरी नेपाल में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ ने हालात बिगाड़ दिए हैं और अब इसका असर बिहार में भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। नेपाल के रसुवा इलाके में आई फ्लैश फ्लड के बाद बिहार प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। सबसे बड़ी चिंता गंडक नदी को लेकर है। आशंका जताई जा रही है कि नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में आई बाढ़ का पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ सकता है। इसके चलते गंडक नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने और नदी में करीब तीन मीटर तक ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की संभावना बताई गई है।
अगर ऐसा होता है, तो बिहार के गंडक नदी से जुड़े इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से प्रशासन ने पश्चिमी चंपारण यानी बेतिया, पूर्वी चंपारण यानी मोतिहारी, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। वहीं सीतामढ़ी, शिवहर और दूसरे संवेदनशील जिलों में भी हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

नदी किनारे रहने वाले लोगों को खास सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी संभावित आपदा से पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके और राहत एवं बचाव की व्यवस्था तैयार रहे। बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल ने बताया कि राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मुख्य सचिव ने बॉर्डर से लगे जिलों के जिलाधिकारियों के साथ स्थिति को लेकर बातचीत की है और अधिकारियों को हर जरूरी तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी नेपाल में आई फ्लैश फ्लड को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को मुख्यमंत्री कार्यालय बुलाकर स्थिति की समीक्षा की। प्रशासन की नजर खास तौर पर गंडक नदी के जलस्तर और नेपाल से आने वाले पानी पर बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, लमजुंग और तनहुं जैसे इलाकों में फ्लैश फ्लड का हाई रिस्क बताया गया है। ये इलाके गंडक के कैचमेंट से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा दोलखा और सिंधुपालचोक में भी फ्लैश फ्लड का खतरा बताया गया है, जो कोसी कैचमेंट से जुड़े हैं। कोसी, बागमती और गंडक कैचमेंट के कई अन्य इलाकों में भी मध्यम जोखिम का अनुमान है।

हालांकि सरकार ने साफ कहा है कि आम लोगों को घबराने या पैनिक करने की जरूरत नहीं है। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और NDRF समेत राहत एवं बचाव दलों को जरूरत के मुताबिक तैयार रखा जा रहा है। फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि लोग अफवाहों पर भरोसा न करें और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। खासकर नदी किनारे रहने वाले लोग सतर्क रहें, जरूरी सामान तैयार रखें और पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थान की ओर जाने में बिल्कुल देरी न करें।
नेपाल की पहाड़ियों में आई इस अचानक आपदा का असर बिहार तक कितना पहुंचता है, यह आने वाले घंटों में साफ होगा। लेकिन फिलहाल बिहार सरकार और प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने का दावा कर रहे हैं।





