Bihar News: सामान्य तौर पर शादी-ब्याह के मौके पर दूल्हा महंगी लग्जरी गाड़ियों, सजे-धजे वाहनों और बैंड-बाजे के साथ अपनी बारात लेकर निकलता है। लेकिन बिहार के कटिहार जिले के फलका इलाके से एक बेहद अनोखी और दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। यहां एक दूल्हे ने किसी महंगी कार या दिखावे के बजाय अपनी खेती-किसानी के मुख्य साधन ट्रैक्टर को प्राथमिकता दी। दूल्हा खुद ट्रैक्टर की ड्राइविंग सीट पर बैठा, स्टेयरिंग थामी और बारात लेकर दुल्हन के घर पहुंच गया। इस अनोखी बारात का नजारा देखकर गांव के लोग हैरान रह गए और सड़क किनारे लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
दो दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों का काफिला बना आकर्षण का केंद्र
बिहार के कटिहार अंतर्गत फलका थाना क्षेत्र के मोरसंडा पंचायत के मांगणपट्टी गांव का यह पूरा मामला है। मांगणपट्टी गांव के वार्ड संख्या 12 के रहने वाले मोहम्मद महबूब के बेटे दिलशाद उर्फ राजा की शादी तय हुई थी। दिलशाद की शादी मोरसंडा गांव निवासी मोहम्मद आबिद की बेटी रौनक परवीन के साथ संपन्न होनी थी। शादी के तय दिन जब बारात निकलने का समय आया, तो दूल्हा दिलशाद खुद ट्रैक्टर की ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और स्टेयरिंग संभालते हुए बारात की अगुवाई करने लगा।
दूल्हे के ट्रैक्टर के पीछे एक-दो नहीं, बल्कि दो दर्जन से भी ज्यादा ट्रैक्टरों का एक लंबा काफिला चल रहा था। इन सभी ट्रैक्टरों पर बाराती सवार थे। जब दो दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों का यह पूरा काफिला गांव की सड़कों से गुजरते हुए शादी समारोह की ओर रवाना हुआ, तो पूरे इलाके में कौतूहल का माहौल बन गया।

ग्रामीणों में दिखा उत्साह, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
दूल्हे को खुद अपनी शादी की बारात में ट्रैक्टर चलाते देखकर रास्ते में मौजूद ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई। इस अनोखी बारात को देखने के लिए बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। बारात के गुजरने के दौरान सड़क किनारे खड़े लोगों ने इस अनूठे नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया। मोबाइल फोन से बनाए गए ये वीडियो अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इस देसी अंदाज की काफी तारीफ कर रहे हैं।

किसान परिवार से जुड़ाव और सादगी का संदेश
अपनी शादी को इस अनोखे देसी अंदाज में मनाने को लेकर दूल्हे दिलशाद उर्फ राजा ने अपने विचार साझा किए। दूल्हे दिलशाद का कहना है कि वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। ट्रैक्टर उनके परिवार की खेती-किसानी और रोजमर्रा के जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण और अटूट हिस्सा है। इसी वजह से उन्होंने अपने जीवन के इस सबसे खास और यादगार मौके पर भी ट्रैक्टर को ही बारात का मुख्य साथी बनाने का निर्णय लिया।
दूल्हे ने स्पष्ट किया कि उनके इस कदम के पीछे किसी भी तरह का दिखावा करना मकसद नहीं था। बल्कि वे इसके जरिए सादगी, अपनी मिट्टी और किसान जीवन से जुड़ाव का एक स्पष्ट संदेश देना चाहते थे। महंगी गाड़ियों के जगमगाते काफिले से अलग इस अनोखी बारात ने पूरे फलका इलाके में चर्चा बटोरी है। स्थानीय लोग भी दूल्हे के इस प्रयास और बारात के देसी रंग को देखकर कह रहे हैं कि बारात हो तो ऐसी।





