Sugar Price Hike: त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के साथ-साथ सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। मिठाई, खीर और दूसरे पकवानों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीनी महंगी होने से त्योहारों का बजट भी बढ़ रहा है। इसी बीच केंद्र सरकार ने चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यानी इतनी मात्रा में कच्ची चीनी विदेश से बिना आयात शुल्क के भारत लाई जा सकेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। दरअसल, भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ताओं में शामिल है। देश में हर साल बड़ी मात्रा में चीनी की खपत होती है। खासकर त्योहारों के समय इसकी मांग अचानक बढ़ जाती है। राखी, जन्माष्टमी, गणेश उत्सव और आगे आने वाले त्योहारी सीजन में मिठाइयों और घर में बनने वाले पकवानों की वजह से चीनी की मांग और बढ़ने की संभावना रहती है।

ऐसे समय में अगर बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हो जाए, तो कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। पिछले कुछ समय से चीनी की कीमतों में तेजी भी इसी चिंता को बढ़ा रही है। बताया जा रहा है कि करीब दो महीनों में चीनी के दाम में लगभग 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह उत्पादन में कमी और बाजार में उपलब्धता का कम होना माना जा रहा है। यही कारण है कि लंबे समय के बाद भारत को चीनी के आयात की जरूरत महसूस हुई है। सरकार अब आयात के जरिए घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाना चाहती है।
Department of Food & Public Distribution ने भी इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए दी है। विभाग के मुताबिक, सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकार का मकसद सिर्फ बाजार में चीनी की कमी दूर करना नहीं है, बल्कि कीमतों को स्थिर रखना भी है। जब बाजार में किसी सामान की सप्लाई कम होती है और मांग ज्यादा रहती है, तो उसकी कीमत बढ़ने लगती है। सरकार को उम्मीद है कि आयात के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर बना दबाव कम होगा।

इस फैसले से जमाखोरी पर भी लगाम लगने की उम्मीद है। अगर बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहती है, तो कृत्रिम कमी पैदा करके कीमत बढ़ाने की संभावना कम हो सकती है। सरकार चाहती है कि त्योहारों के दौरान आम लोगों को चीनी उचित और स्थिर कीमत पर मिलती रहे। हालांकि, सरकार के इस फैसले का असर बाजार में कितनी जल्दी दिखाई देगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। आयातित चीनी की उपलब्धता, घरेलू बाजार की मांग और अंतरराष्ट्रीय कीमतों जैसे कई कारक इसमें अहम भूमिका निभाएंगे।
दिलचस्प बात यह भी है कि भारत की ओर से शुल्क-मुक्त आयात की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों पर भी असर देखने को मिला है। इससे पता चलता है कि भारत की चीनी की मांग वैश्विक बाजार के लिए भी कितनी महत्वपूर्ण है। फिलहाल आम उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि सरकार के इस फैसले के बाद खुदरा बाजार में चीनी कितनी सस्ती होती है। अगर आयात के बाद सप्लाई बढ़ती है और कीमतों में नरमी आती है, तो त्योहारों से पहले लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का असर बाजार में कब तक दिखाई देता है और क्या इससे आम लोगों को त्योहारों से पहले सच में सस्ती चीनी मिल पाती है।





