बिहार में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी कवायद तेज कर दी है। मिलों के पुनरुद्धार के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बने जमीन से जुड़े कानूनी विवादों को शीघ्र सुलझाने के लिए सरकार ने नई रणनीति बनाई है। इस योजना के तहत राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और गन्ना उद्योग विभाग संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। सरकार का मुख्य लक्ष्य अदालतों में लंबित भूमि विवादों को जल्द समाप्त कर बंद मिलों में औद्योगिक गतिविधियां और रोजगार के नए अवसर शुरू करना है।

उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक और मंत्रियों के निर्देश
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षत में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बंद चीनी मिलों की जमीनों का विस्तृत ब्योरा खंगाला गया। इस बैठक में गन्ना उद्योग मंत्री संजय पासवान भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान मंत्रियों ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागीय स्तर पर होने वाली किसी भी प्रशासनिक देरी के कारण राज्य के औद्योगिक विकास में बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने सभी लंबित मामलों की अद्यतन स्थिति तैयार करने और कानूनी प्रक्रिया को गति देने का आदेश दिया।
तीन प्रमुख चीनी मिलों की जमीनों पर विशेष ध्यान
बैठक के दौरान राज्य की तीन बड़ी चीनी मिलों की जमीन से जुड़े मामलों पर प्रमुखता से चर्चा की गई:
- बारा चकिया चीनी मिल (पूर्वी चंपारण): इस मिल से जुड़ी लगभग 1,008 एकड़ जमीन और संपत्तियों का मामला लंबे समय से कानूनी पेंच में फंसा हुआ है। इसमें बेतिया राज की जमीन भी शामिल है। इतनी विशाल भूखंड पर विवाद होने के कारण मिल को फिर से चालू करने या किसी नए औद्योगिक प्रोजेक्ट की स्थापना में अड़चनें आ रही हैं।
- हनुमान शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (मोतिहारी): मोतिहारी स्थित इस मिल से संबंधित 13 बीघा 6 कट्ठा 13 धूर फ्रीहोल्ड जमीन और बेतिया राज की 24 बीघा 15 कट्ठा 2 धूर लीजहोल्ड जमीन पर विवाद जारी है। सरकार इन सभी दस्तावेजों की जांच कर कोर्ट में अपना पक्ष मजबूत कर रही है।
- सासामुसा चीनी मिल (गोपालगंज): इस मिल के पास 44 बीघा 8 कट्ठा 7 धूर स्वामित्व वाली जमीन और हथुआ राज की 21 बीघा 19 कट्ठा 9 धूर मुकर्ररी लीज जमीन मौजूद है। इसके कानूनी पेंच को सुलझाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड का बारीकी से मिलान किया जा रहा है।
स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड की जांच
राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सरकारी और रैयती जमीनों के पुराने रिकॉर्ड, वर्तमान स्थिति और मालिकाना हक का गहन अध्ययन करें। अदालतों में चल रहे मुकदमों में सरकार की ओर से मजबूत साक्ष्य और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं, ताकि मामलों का निपटारा शीघ्र हो सके। जब तक जमीन की कानूनी स्थिति और मालिकाना हक पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता, तब तक नए निवेशकों का आना मुश्किल रहता है।
किसान हित और गन्ने की उन्नत खेती पर जोर
बंद मिलों को चालू करने के साथ-साथ सरकार गन्ने की खेती को लाभदायक बनाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। गन्ना उद्योग विभाग किसानों को वर्षाकालीन गन्ना रोपाई की आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। विभाग के अनुसार:
- बारिश के मौसम में लगाया गया गन्ना अगले वर्ष फरवरी तक गुणवत्तापूर्ण बीज के रूप में तैयार हो जाता है।
- इसके बाद उसी फसल की खूंटी से नवंबर-दिसंबर तक रैटून फसल (दूसरी फसल) हासिल की जा सकती है।
- एक ही बार की रोपाई से किसानों को बीज उत्पादन और रैटून फसल दोनों का सीधा फायदा मिलेगा, जिससे लागत घटेगी और आमदनी बढ़ेगी।
राज्य से जुड़ी अन्य प्रमुख प्रशासनिक व कानून-व्यवस्था संबंधी खबरें
राज्य में बंद चीनी मिलों के फैसले के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सामने आए हैं:
- विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बंद: भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत कार्य के चलते तीन महीने के लिए वाहनों का परिचालन और पैदल यात्रा पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।
- पुलिस के हथियारों पर नया नियम: बिहार पुलिस ने भीड़भाड़ वाले इलाकों और आम सभाओं में एके-47 जैसे घातक हथियारों के प्रदर्शन पर रोक लगाने का बड़ा निर्णय लिया है।
- एनएचआरसी की चेतावनी: रोशन आनंद की गिरफ्तारी के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने पटना एसएसपी को चेतावनी देते हुए 3 सितंबर तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
- झारखंड विधानसभा घेराव पर कार्रवाई: विधानसभा घेराव मामले में पुलिस ने सख्त कदम उठाते हुए 100 नामजद सहित 600 प्रदर्शनकारियों पर प्राथमिकी दर्ज की है।
- पटना में आपराधिक वारदात: पटना में मात्र 400 रुपये के मामूली विवाद को लेकर एक दिव्यांग व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, जिस पर पुलिस जांच जारी है।






