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Jitia Vrat Recipes & Food Guide: नहाय-खाए से पारण तक के पारंपरिक व्यंजन और रेसिपी

| Published: 02 Oct 2026, 03:04 PM
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Jitia Vrat Recipes & Food Guide: नहाय-खाए से पारण तक के पारंपरिक व्यंजन और रेसिपी
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मुख्य बातें

  • जिउतिया व्रत के खास पकवान: नहाय-खाय से पारण तक क्या बनता है और कैसे बनाएं जिउतिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाकों म...
  • संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए माताएं यह कठिन व्रत रखती हैं।
  • कई घरों में इसकी तैयारी एक-दो दिन पहले से ही शुरू हो जाती है।
  • जिउतिया की एक खास बात यह भी है कि इसके साथ खान-पान की कई पुरानी परंपराएं जुड़ी हुई हैं।

जिउतिया व्रत के खास पकवान: नहाय-खाय से पारण तक क्या बनता है और कैसे बनाएं

जिउतिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाकों में बड़े ही श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए माताएं यह कठिन व्रत रखती हैं। कई घरों में इसकी तैयारी एक-दो दिन पहले से ही शुरू हो जाती है।

जिउतिया की एक खास बात यह भी है कि इसके साथ खान-पान की कई पुरानी परंपराएं जुड़ी हुई हैं। नहाय-खाय में क्या बनेगा, व्रत से पहले क्या खाया जाएगा और पारण किस चीज से होगा—इन सबको लेकर अलग-अलग इलाकों और परिवारों की अपनी परंपराएं हैं।

कहीं मड़ुआ की रोटी और नोनिया का साग जरूरी माना जाता है, तो कहीं अरवा चावल, सब्जी और दूसरे स्थानीय व्यंजन बनाए जाते हैं। पारण के समय भी घरों में ठेकुआ, पुआ और कई तरह के पकवान तैयार होते हैं।

अगर आपके घर में भी जिउतिया की तैयारी चल रही है, तो यहां जानिए इस पर्व से जुड़े कुछ प्रमुख पारंपरिक व्यंजन और उन्हें बनाने का आसान तरीका।

जिउतिया के तीन दिन और खान-पान की परंपरा

आमतौर पर जिउतिया व्रत तीन चरणों में पूरा होता है। हर चरण का अपना धार्मिक महत्व है और खान-पान को लेकर भी अलग परंपराएं हैं।

नहाय-खाय

व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। महिलाएं स्नान-पूजा के बाद शुद्ध भोजन करती हैं। बिहार के कई इलाकों में इस दिन मड़ुआ की रोटी, नोनिया का साग और अरवा चावल जैसे पारंपरिक भोजन बनाए जाते हैं।

निर्जला व्रत

अगले दिन माताएं संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखती हैं। इस दौरान अन्न के साथ पानी भी ग्रहण नहीं किया जाता।

पारण

व्रत पूरा होने के बाद निर्धारित समय और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करके पारण किया जाता है। इसी दौरान घरों में कई तरह के पारंपरिक पकवान भी बनाए जाते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि जिउतिया की परंपराएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदल सकती हैं। इसलिए घर में पीढ़ियों से चली आ रही विधि को प्राथमिकता देना बेहतर है।

1. मड़ुआ की रोटी

बिहार में जिउतिया की बात हो और मड़ुआ का जिक्र न आए, ऐसा मुश्किल है। खासकर ग्रामीण इलाकों में मड़ुआ की रोटी इस पर्व के पारंपरिक भोजन से लंबे समय से जुड़ी हुई है।

मड़ुआ को रागी भी कहा जाता है। इसकी रोटी गेहूं की रोटी की तुलना में थोड़ी अलग तरह से बनती है क्योंकि इसका आटा आसानी से बंधता नहीं है।

मड़ुआ की रोटी बनाने के लिए सामग्री

  • मड़ुआ का आटा – 2 कप
  • गुनगुना पानी – जरूरत के अनुसार
  • नमक – स्वादानुसार, यदि आपकी पारंपरिक विधि में इस्तेमाल होता हो
  • बेलने के लिए थोड़ा मड़ुआ या गेहूं का आटा

मड़ुआ की रोटी बनाने की विधि

सबसे पहले एक परात में मड़ुआ का आटा लें। इसमें थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी डालते हुए आटा गूंधें। पानी एक साथ न डालें, वरना आटा बहुत नरम हो सकता है।

आटा तैयार हो जाए तो उसे करीब 10 मिनट के लिए ढककर रख दें। इसके बाद छोटी या मध्यम आकार की लोई बनाएं।

मड़ुआ की रोटी को सामान्य रोटी की तरह बेलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, इसलिए इसे हाथ से थपथपाकर भी आकार दिया जा सकता है।

गर्म तवे पर रोटी डालें। एक तरफ सिकने के बाद इसे पलटें और दोनों तरफ अच्छी तरह सेंक लें। गरम मड़ुआ की रोटी नोनिया के साग के साथ खाने पर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।

2. नोनिया का साग

जिउतिया के पारंपरिक भोजन में नोनिया के साग का अपना अलग स्थान है। बिहार के कई हिस्सों में नहाय-खाय के दिन इसे विशेष रूप से बनाया जाता है।

नोनिया का साग स्थानीय रूप से मिलने वाला साग है, इसलिए इसे बनाने का तरीका भी घर-घर में थोड़ा अलग हो सकता है। कोई इसे बिल्कुल सादा बनाता है तो कहीं लहसुन और मिर्च का तड़का लगाया जाता है।

नोनिया का साग बनाने के लिए सामग्री

  • नोनिया का साग – लगभग 500 ग्राम
  • सरसों का तेल – 2 से 3 बड़े चम्मच
  • लहसुन – 8 से 10 कलियां
  • सूखी लाल मिर्च – 2
  • हरी मिर्च – 2
  • हींग – एक चुटकी
  • नमक – स्वादानुसार

नोनिया का साग बनाने की विधि

सबसे पहले साग को अच्छी तरह चुन लें। इसमें मिट्टी होने की संभावना रहती है, इसलिए इसे साफ पानी से कई बार धोना जरूरी है। धोने के बाद साग को बारीक काट लें।

कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म करें। तेल गर्म हो जाने पर हींग, सूखी लाल मिर्च और कटा हुआ लहसुन डालें। लहसुन हल्का सुनहरा हो जाए तो हरी मिर्च और साग डाल दें।

अब इसे मध्यम आंच पर पकने दें। साग से खुद पानी निकलेगा। इसे बीच-बीच में चलाते रहें और पानी सूखने तक पकाएं।

अंत में स्वादानुसार नमक डालें और कुछ देर भून लें। मड़ुआ की गर्म रोटी के साथ नोनिया का साग बेहद स्वादिष्ट लगता है।

3. पारंपरिक ठेकुआ

बिहार के पारंपरिक पकवानों की बात ठेकुआ के बिना अधूरी है। अलग-अलग पर्वों और धार्मिक अवसरों पर ठेकुआ बनाया जाता रहा है। कई परिवार जिउतिया के अवसर पर भी इसे प्रसाद या पारंपरिक पकवान के रूप में तैयार करते हैं।

अच्छे ठेकुए की पहचान है कि वह बाहर से कुरकुरा और अंदर से अच्छी तरह पका हुआ हो।

ठेकुआ बनाने के लिए सामग्री

  • गेहूं का आटा – 2 कप
  • सूजी – 4 बड़े चम्मच
  • चीनी या गुड़ – लगभग 3/4 कप
  • घी – 4 से 5 बड़े चम्मच
  • सौंफ – 1 छोटा चम्मच
  • कसा हुआ सूखा नारियल – 2 बड़े चम्मच
  • इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच
  • तलने के लिए घी या तेल

ठेकुआ बनाने की विधि

आटा और सूजी एक बड़े बर्तन में मिला लें। इसमें सौंफ, नारियल और इलायची डालें। इसके बाद घी डालकर हथेलियों से अच्छी तरह मिलाएं। मिश्रण ऐसा होना चाहिए कि मुट्ठी में दबाने पर हल्का बंधने लगे।

अगर गुड़ इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे थोड़े गर्म पानी में घोलकर ठंडा कर लें। इसी घोल की मदद से आटा गूंधें। ठेकुए का आटा रोटी के आटे की तरह बहुत नरम नहीं होना चाहिए। इसे थोड़ा सख्त रखें।

अब छोटी-छोटी लोइयां बनाकर ठेकुआ के सांचे पर दबाएं। सांचा नहीं है तो हाथ से चपटा करके भी डिजाइन बनाया जा सकता है।

कढ़ाई में तेल या घी गर्म करें। ठेकुए को धीमी से मध्यम आंच पर तलें। तेज आंच पर ठेकुआ ऊपर से तो लाल हो जाएगा, लेकिन अंदर से कच्चा रह सकता है।

सुनहरा होने के बाद ठेकुआ निकाल लें। ठंडा होने के बाद यह और कुरकुरा हो जाता है।

4. मीठा पुआ

पारण के दिन कई घरों में पुआ भी बनाया जाता है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि सामग्री बहुत साधारण होती है, लेकिन इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है।

मीठा पुआ बनाने के लिए सामग्री

  • गेहूं का आटा या मैदा – 2 कप
  • चीनी – 3/4 कप
  • दूध या पानी – जरूरत के अनुसार
  • सौंफ – 1 छोटा चम्मच
  • इलायची – आधा से 1 छोटा चम्मच
  • किशमिश या बारीक कटे मेवे – इच्छानुसार
  • तलने के लिए घी या तेल

मीठा पुआ बनाने की विधि

एक बर्तन में आटा लें। इसमें चीनी, सौंफ और इलायची डालें। अब थोड़ा-थोड़ा दूध या पानी डालकर घोल बनाएं। घोल न बहुत पतला होना चाहिए और न बहुत गाढ़ा।

इसे करीब आधे घंटे के लिए ढककर छोड़ दें। इससे चीनी अच्छी तरह घुल जाएगी और घोल भी सेट हो जाएगा।

कढ़ाई में तेल या घी मध्यम गर्म करें। एक कड़छी से थोड़ा घोल लेकर तेल में डालें। पुआ अपने आप थोड़ा फैल जाएगा।

इसे दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें और फिर निकाल लें। गरम पुआ खाने में मुलायम लगता है, जबकि ठंडा होने के बाद इसका स्वाद थोड़ा अलग हो जाता है। दोनों ही तरह से इसे परोसा जा सकता है।

5. अरवा चावल और कद्दू की सब्जी

जिउतिया के आसपास बनने वाले पारंपरिक सात्विक भोजन में अरवा चावल का भी खूब इस्तेमाल होता है। इसके साथ हल्की और सादी सब्जी बनाई जाती है।

कई परिवारों में कद्दू या लौकी की सब्जी बनाई जाती है। इसकी विधि भी स्थानीय परंपरा के हिसाब से थोड़ी अलग हो सकती है।

अरवा चावल और कद्दू की सब्जी के लिए सामग्री

  • अरवा चावल – 1 कप
  • कद्दू या लौकी – लगभग 500 ग्राम
  • जीरा – 1 छोटा चम्मच
  • सूखी लाल मिर्च – 1 से 2
  • हल्दी – आधा छोटा चम्मच
  • अदरक – थोड़ा सा
  • घी या सरसों का तेल – 2 बड़े चम्मच
  • नमक – स्वादानुसार
  • हरा धनिया – इच्छानुसार

बनाने की विधि

अरवा चावल को सामान्य तरीके से धोकर पका लें।

सब्जी के लिए कढ़ाई में घी या सरसों का तेल गर्म करें। इसमें जीरा और सूखी लाल मिर्च डालें। इसके बाद अदरक और हल्दी डालकर हल्का सा भूनें।

अब कटे हुए कद्दू या लौकी को डालकर मिला दें। नमक डालें और ढककर धीमी से मध्यम आंच पर पकने दें। कद्दू और लौकी दोनों में पर्याप्त पानी होता है, इसलिए शुरुआत में बहुत ज्यादा पानी डालने की जरूरत नहीं पड़ती।

सब्जी अच्छी तरह गल जाए तो इसे हल्का सा मैश कर सकते हैं। ऊपर से हरा धनिया डालकर अरवा चावल के साथ परोसें।

जिउतिया के भोजन में छिपी है पीढ़ियों पुरानी परंपरा

जिउतिया के पकवानों की खासियत उनकी भव्यता नहीं, बल्कि उनका पीढ़ियों से लगभग उसी रूप में बने रहना है। मड़ुआ, स्थानीय साग, अरवा चावल, गुड़, गेहूं और घर में उपलब्ध सामान्य चीजों से तैयार होने वाला भोजन इस पर्व को अपनी मिट्टी से जोड़ता है।

किसी घर में दादी जिस तरीके से नोनिया का साग बनाती थीं, उसी तरीके से आज बहू बना रही है। कहीं मां से बेटी ने ठेकुआ बनाना सीखा है, तो कहीं पारण की थाली में वही चीजें रखी जाती हैं जो दशकों पहले परिवार की बुजुर्ग महिलाएं रखा करती थीं।

यही वजह है कि जिउतिया में भोजन केवल स्वाद या रेसिपी तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ परिवार की यादें, स्थानीय खेती, मौसम और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं भी जुड़ी होती हैं। शायद इसी वजह से जिउतिया की थाली में रखा साधारण-सा मड़ुआ और साग भी किसी महंगे पकवान से ज्यादा खास लगता है।

नोट: जिउतिया से जुड़ी पूजा, नहाय-खाय, पारण और भोजन की परंपराएं बिहार तथा आसपास के क्षेत्रों में समुदाय और परिवार के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। व्रत रखने वाले अपने परिवार की पारंपरिक विधि और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भोजन और पारण करें।

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